पाकिस्तान की कब्र में पहुंची अर्थव्यवस्था, ऑयल क्राइसिस ने ठोंक दी ताबूत में आखिरी कील, अब सिर्फ बचा 5 दिन का तेल
28 अप्रैल 2026

<p style="text-align: justify;"><strong>Pakistan Oil Crisis:</strong> वैश्विक मंचों पर खुद को ‘मध्यस्थ’ के रूप में पेश करने वाला पाकिस्तान अब गंभीर घरेलू संकट से जूझ रहा है. देश के ऊर्जा और वित्त मंत्रालय के ताजा बयान ने हलचल मचा दी है. सरकार ने स्वीकार किया है कि पाकिस्तान के पास कच्चे तेल का भंडार केवल 5-7 दिनों का ही बचा है, जबकि डीजल और एलपीजी का स्टॉक भी सीमित समय के लिए ही उपलब्ध है.</p> <p style="text-align: justify;">इस ऊर्जा संकट की बड़ी वजह मध्य पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है. ईरान और अमेरिका के बीच टकराव के चलते होर्मुज स्ट्रेट लगभग बंद हो गया है, जिससे व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है. दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है. पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब और कुवैत पर निर्भर है, लेकिन इस मार्ग के बाधित होने से सप्लाई चेन पूरी तरह प्रभावित हो गई है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>पेट्रोलियम मंत्री का बड़ा खुलासा</strong><br />पाकिस्तान के केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने समा टीवी के एक कार्यक्रम में देश के ऊर्जा भंडार को लेकर गंभीर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में देश के पास केवल 5 से 7 दिन का कच्चा तेल बचा है. इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि पेट्रोल का एक दिन का भी रिजर्व नहीं है. वहीं डीजल का स्टॉक 26-28 दिन और एलपीजी का भंडार करीब 15 दिन के लिए ही पर्याप्त है. उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान ने एयरलाइंस के लिए ईंधन की कमी को लेकर आधिकारिक चेतावनी (NOTAM) जारी की है, जो दुनिया में पहली बार हुआ है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>वैश्विक बाजार में अस्थिरता का असर</strong><br />मंत्री ने बताया कि ईरान-अमेरिका तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी अस्थिरता है. उन्होंने कहा कि इतिहास में दुबई क्रूड की कीमतें कभी 170 डॉलर तक नहीं पहुंची थीं, लेकिन मौजूदा हालात में कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है. इससे साफ है कि पाकिस्तान की ऊर्जा भंडारण क्षमता को मजबूत करना अब बेहद जरूरी हो गया है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>कोविड जैसे सख्त नियम लागू करने की तैयारी</strong><br />ईंधन की बचत के लिए पाकिस्तान सरकार सख्त कदम उठाने पर विचार कर रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के लिए लॉकडाउन जैसे नियम लागू किए जा सकते हैं. सरकारी और निजी दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम लागू करने, स्कूल-कॉलेज बंद कर ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करने और लोगों से निजी वाहन कम इस्तेमाल करने की अपील की जा सकती है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>महंगाई और आर्थिक संकट और गहराएगा</strong><br />पाकिस्तान पहले से ही महंगाई और आर्थिक संकट से जूझ रहा है. अब ईंधन संकट के कारण पेट्रोल-डीजल की कीमतों की समीक्षा हर हफ्ते की जा सकती है. युद्ध क्षेत्र से तेल लाने वाले जहाजों का बीमा खर्च 30 हजार डॉलर से बढ़कर 4 लाख डॉलर तक पहुंच गया है, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा. परिवहन महंगा होने से फल, सब्जियां, राशन और दवाइयों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की आशंका है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>‘मध्यस्थ’ की भूमिका पर उठे सवाल</strong><br />अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान खुद को इस्लामी देशों और पश्चिमी ताकतों के बीच ‘मध्यस्थ’ के रूप में पेश करता रहा है. लेकिन मौजूदा हालात यह दिखाते हैं कि देश अपनी बुनियादी जरूरत यानी ऊर्जा सुरक्षा को ही संभालने में संघर्ष कर रहा है. विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और आईएमएफ के सख्त नियमों के बीच यह तेल संकट पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है.</p>
Source: abplive