प्रदेश में प्रतिभा संकट:बिहार में देश की 10% आबादी, लेकिन पेटेंट में योगदान आधा फीसदी भी नहीं

28 अप्रैल 2026

प्रदेश में प्रतिभा संकट:बिहार में देश की 10% आबादी, लेकिन पेटेंट में योगदान आधा फीसदी भी नहीं

आविष्कार और नवाचार की कमी से ‘ब्रांड बिहार’ नहीं बन रहा आर्यभट्ट और चाणक्य की भूमि बिहार का ‘बौद्धिक वर्तमान’ बेहद डरावना है। देश की आबादी में 10% की हिस्सेदारी रखने वाला बिहार आविष्कार और नवाचार में राष्ट्रीय मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में नाकाम साबित हो रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक, देश में कुल 1,43,720 पेटेंट आवेदन फाइल किए गए, जिनमें बिहार का योगदान मात्र 417 है। यह देश का आधा प्रतिशत (0.5%) भी नहीं है। संसाधनों में 10वां हिस्सा की दावेदारी करने वाला राज्य वैज्ञानिक प्रतिभा दिखाने में 100वां हिस्सा भी योगदान नहीं दे पा रहा है। यह देश की बौद्धिक संपदा में बिहार की हिस्सेदारी की हकीकत है। साथ ही राज्य में प्रतिभा संकट की गवाही भी। हैरानी की बात यह है कि पड़ोसी राज्य झारखंड, जो कभी बिहार का हिस्सा था, आज आविष्कार और नवाचार के मामले में बिहार से आगे है। इसी अवधि में झारखंड ने 910 आवेदन फाइल किए और 157 पेटेंट हासिल किए, जबकि बिहार में महज 123 पेटेंट ग्रांट हुए। पिछले 16 वर्षों का रिकॉर्ड देखें तो स्थिति और भी चिंताजनक है। इस दौरान झारखंड ने 1753 पेटेंट हासिल किए, जो बिहार (467) की तुलना में करीब चार गुना है। पेटेंट के मामले में इस सुस्ती का असर बिहार की अर्थव्यवस्था और रोजगार पर पड़ रहा है। शोध और नवाचार के मामले में झारखंड से कोसों दूर है बिहार पेटेंट कम होने से उद्योग जगत में बिहार की छवि अनुसंधान और नवाचार के मामले में धूमिल है। नतीजा यह है कि बिहार के उत्पाद ब्रांड के तौर पर स्थापित नहीं हो पा रहे हैं। आविष्कार और नवाचार की कमी के कारण बिहार की कंपनियां नए उत्पाद तैयार नहीं कर पाती हैं। इसलिए, प्रतिस्पर्धा की कमी से बड़ी कंपनियां बिहार में प्रॉडक्शन प्लांट लगाने के बजाय राज्य को सिर्फ एक बाजार मानती हैं। इससे नई नौकरियां पैदा नहीं हो रही हैं। हाल के दिनों में कई संस्थानों ने इस दिशा में अच्छी पहल की है। बिहार के ग्रामीण इलाकों से निकले ‘देसी वैज्ञानिकों’ ने भी कुछ पेटेंट हासिल कर राज्य का मान बढ़ाया है। पटना : गाड़ियों से आपातकालीन निकास की तकनीक (व्हीकुलर एस्केप)। पूर्वी चंपारण : हर्बल कीटनाशक। नवादा : न्यूरोलॉजिकल की हर्बल दवा। समस्तीपुर : महिला सुरक्षा के लिए एंटी-मोलेस्टेशन कपड़े। मधुबनी : नींद में चलने की बीमारी को पकड़ने वाला डिटेक्टर। रिपोर्ट : बिहार बनाम झारखंड (2025-26) इन्वेंशन और इनोवेशन पर फोकस करे सरकार आंकड़े बताते हैं कि बिहार केवल ज्ञान की विरासत के भरोसे भविष्य नहीं संवार सकता। जब तक राज्य में अनुसंधान के लिए बजट और माहौल नहीं बदलेगा, बिहार की अर्थव्यवस्था की परिधि का विस्तार नामुमकिन है। सरकार को अब शिक्षा के साथ-साथ इन्वेंशन और इनोवेशन पर फोकस करना होगा। हम लोगों ने भारत सरकार को पेटेंट इनफॉर्मेशन सेल के लिए लिखा है। सैद्धांतिक सहमति भी मिल गई है। परंतु, कई बार प्रेजेंटेशन देने के बावजूद अभी कुछ स्वीकृत नहीं हुआ है। -अनंत कुमार, परियोजना निदेशक, बिहार काउंसिल ऑन साइंस एंड टेक्नोलॉजी पेटेंट व इनोवेशन के लिए पॉलिसी लाए सरकार बिहार सरकार को तत्काल पेटेंट और इनोवेशन से जुड़ा बोर्ड, काउंसिल या दफ्तर बनाना चाहिए। राज्य की परिस्थितियों के अनुकूल एक स्पष्ट पॉलिसी की जरूरत है। तकनीकी संस्थानों के छात्रों को केवल रिसर्च पेपर पब्लिश करने के बजाय पेटेंट हासिल करने के लिए प्रेरित करना होगा। राज्य में पेटेंट अटर्नी और ड्राफ्टिंग का एक ईको-सिस्टम विकसित करना अनिवार्य है, ताकि ग्रामीण और शहरी मेधा को सही मार्गदर्शन मिल सके।- टीएन सिंह, निदेशक, आईआईटी पटना

Source: bhaskar_hindi

Publication

The World Dispatch

Source: World News API

Keywords: dainikbhaskar, ONLY AVAILABLE IN PROFESSIONAL AND CORPORATE PLANS