पीएम मोदी गंगा एक्सप्रेसवे पर लगाएंगे हरिशंकरी पौधा:जानिए इसके धार्मिक और पर्यावरणीय महत्व
26 अप्रैल 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गंगा एक्सप्रेसवे के लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान हरिशंकरी पौधा लगाएंगे। इस घोषणा के बाद हरिशंकरी पौधे की विशेषताओं और इसके महत्व को लेकर लोगों में उत्सुकता बढ़ गई है। हरिशंकरी वास्तव में कोई एक पौधा नहीं, बल्कि तीन पवित्र वृक्षों – पीपल, बरगद और पाकड़ – का संयुक्त रोपण है। इन तीनों पौधों को एक ही स्थान पर एक साथ लगाया जाता है, जिसके कारण इसे हरिशंकरी नाम दिया गया है। भारतीय परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं में इसका विशेष महत्व है। प्रधानमंत्री मोदी एक ही गड्ढे में इन तीनों पौधों का रोपण करेंगे। पीपल का वृक्ष वातावरण को शुद्ध करने और प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन प्रदान करने के लिए जाना जाता है। बरगद अपने विशाल आकार, लंबी आयु और घनी छाया के लिए उपयोगी माना जाता है। वहीं, पाकड़ का वृक्ष भी पर्यावरण संतुलन, हरियाली और जैव विविधता को बढ़ाने में सहायक होता है। जब ये तीनों वृक्ष एक साथ लगाए जाते हैं, तो इनका संयुक्त महत्व और बढ़ जाता है। धार्मिक दृष्टि से भी हरिशंकरी पौधे को अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इन तीनों वृक्षों में देव शक्तियों का वास होता है। ग्रामीण क्षेत्रों और मंदिर परिसरों में हरिशंकरी रोपण की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लोग इसकी पूजा-अर्चना करते हैं और इसे समृद्धि, शांति तथा सुख का प्रतीक मानते हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, हरिशंकरी रोपण से हरियाली बढ़ती है, मिट्टी का संरक्षण होता है और पक्षियों को आश्रय मिलता है। यह तापमान संतुलन बनाए रखने और वायु गुणवत्ता में सुधार करने में भी सहायक होता है। वर्तमान में जब दुनिया जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण जैसी वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रही है, ऐसे समय में हरिशंकरी जैसे पौधों का रोपण अत्यंत उपयोगी माना जा रहा है। यह पौधा न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि प्रकृति संरक्षण का भी महत्वपूर्ण संदेश देता है। गंगा एक्सप्रेसवे के लोकार्पण के अवसर पर हरिशंकरी रोपण कार्यक्रम को विशेष महत्व दिया जा रहा है, जो विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश देगा।
Source: bhaskar_hindi