टिश्यू कल्चर केले ने बढ़ाई किसानों की आय:अयोध्या में 8 करोड़ की लागत से नया लैब हो रहा स्थापित, एक साथ तैयार होंगे 2 लाख पौध
24 अप्रैल 2026

आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने कृषि क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यहां के विद्यार्थियों ने प्रयोगशाला में ही रोगमुक्त केले के पौधे टिश्यू कल्चर तकनीक के माध्यम से तैयार कर दिए हैं, जिनका व्यावसायिक उपयोग भी शुरू हो चुका है। इन पौधों की बिक्री पूर्वांचल के किसानों के बीच तेजी से बढ़ रही है और एक पौधे की कीमत मात्र18रुपये रखी गई है।बीते वर्ष इस पहल से लगभग1.30 लाख रुपये की आय हुई, जिसे विद्यार्थियों के हित में खर्च किया जा रहा है। इस सफलता के पीछे वैज्ञानिक डॉ. दिवाकर सिंह और डॉ. अश्वनी कुमार का मार्गदर्शन रहा। उन्होंने बताया कि टिश्यू कल्चर प्रक्रिया नियंत्रित तापमान वाले प्रयोगशाला कक्ष में विशेष जार के माध्यम से की जाती है।एक पौधा तैयार होने में लगभग10 से 11 महीने का समय लगता है।इस विधि से तैयार पौधे विषाणु जनित रोगों से मुक्त होते हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता बेहतर होती है। टिश्यू कल्चर के लिए पहले रोगमुक्त मदर प्लांट का चयन किया जाता है और वैज्ञानिक प्रक्रिया के जरिए उससे नए पौधे विकसित किए जाते हैं।बीटेक बायोटेक्नोलॉजी के विद्यार्थियों ने अपनी रुचि और नवाचार के तहत इस तकनीक को सफल बनाया है। प्रदेश सरकार ने भी इस पहल को प्रोत्साहन देते हुए विश्वविद्यालय परिसर में 8 करोड़ रुपये की लागत से ढाई लाख पौधों की वार्षिक उत्पादन क्षमता वाला टिश्यू कल्चर प्लांट स्थापित करने की मंजूरी दी है। इसके तहत पाली हाउस, नेट हाउस और ग्रीन हाउस का निर्माण किया जा रहा है। डॉ.अश्वनी कुमार के अनुसार,G-9 केले की किस्म वर्तमान में देश की सबसे लोकप्रिय किस्म है।इसके पौधे मध्यम ऊंचाई के होते हैं और एक पौधे से 70 से 75किलोग्राम तक उत्पादन संभव है। टिश्यू कल्चर से तैयार पौधे समान आकार,तेज वृद्धि और एक साथ फल देने की विशेषता रखते हैं,जिससे कटाई भी एक साथ संभव होती है। पूर्वांचल के बाराबंकी,रायबरेली,सुल्तानपुर,जौनपुर, आजमगढ़,प्रतापगढ़,अंबेडकरनगर,बलिया और बस्ती सहित कई जिलों के किसान इस तकनीक को अपनाकर बेहतर उत्पादन और मुनाफा कमा रहे हैं। यह पहल क्षेत्र को केले के उत्पादन का नया हब बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रही है।
Source: bhaskar_hindi