.. झुकूंगा नहीं... फ्लावर समझा है क्या !

23 अप्रैल 2026

.. झुकूंगा नहीं... फ्लावर समझा है क्या !

.. झुकूंगा नहीं... फ्लावर समझा है क्या ! - ललिता जोशी पुष्पा..... पुष्पा राज ! झुकूँगा नहीं ...... फ्लावर समझा है क्या ! फिल्म ‘पुष्पा: द राइज’ का ये डायलॉग बहुत मशहूर हुआ था । ये डायलॉग इस फिल्म के हीरो यानि पुष्पराज की अदम्य इच्छाशक्ति और साहस का परिचायक है । एक युवा जो अपने बलबूते पर अपना साम्राज्य स्थापित कर लेता है लेकिन ये साम्राज्य तस्करी का था । आजकल ऐसा ही कुछ चल रहा है होर्मुज जलडमरू मध्य को लेकर । अमरीका के वर्तमान राष्ट्रपति की तेल उत्पादक देशों को नियंत्रित करने के लालच ने समस्त विश्व को मुसीबत में ला खड़ा किया है । वेनेजुएला में तो इनके निर्देश पर ‘ऑपरेशन अब्सोल्यूट रिसोलव’के तहत इनके सैनिक आए और उनके राष्ट्रपति मादुरो को पत्नी सहित किडनैप कर के ले गए । तो इन महाराज नेइज़राइल के बहाने ईरान को भी अपनी गिरफ्त में लेने की कोशिश की और अपने दोस्त के साथ मिलकर बमबारी की और उनके सभी वरिष्ठ नेताओं को मौत के घाट उतार दिया । ये ईरान ही है जिसने अपने देश में इतना बड़ा राजनीतिक संकट आने पर भी न तो अपना होश खोया न ही लड़ने का जोश । इस बमबारी ने न तो स्कूल छोड़े न ही रिहायशी इलाके। रमादान के पवित्र माह में ये युद्ध अपने चरम पर था लेकिन ईरानी लड़ाके भी हार मानने वाले भी नहीं थे । ट्रम्प महोदय अपने अति विश्वास में थे कि ये युद्ध एक या दो हफ्ते में अपने निर्णायक मोड़ पर पहुँच जाएगा । ये इस मुगालते में थे कि ये तो ईरान को अपने जेब में डाल ही लेंगे और उसका पूरा तेल पी जायेंगे और डकार भी नहीं लेंगे। ट्रम्प जी का देश विश्व का सबसे अमीर और खुशहाल देश है । इस देश में आकर रहना और वहीं बस जाना सभी देशों के नागरिकों की दिली इच्छा होती है । इस देश ने विश्व के कोने -कोने से आने वाले लोगों का अपनी बाहें खोलकर अपनाया और उन्हें बहुत कुछ दिया भी है । इसके एवज में प्रवासियों ने भी अमरीका को भी बहुत कुछ दिया है । अमरीका में सभी जाति और धर्मों को सम्मान दिया जाता रहा है । अपवाद तो हमेशा से ही रहते हैं । इसी का लाभ मिला रिपब्लिकन पार्टी को और नतीजा आया की ट्रम्प जी और उनकी पार्टी प्रचंड बहुमत से जीती और सत्ता पर काबिज हो गई । इस पार्टी का नारा था ‘मेक अमरीका ग्रेट अगेन’ । इसके लिए इस पार्टी ने नागरिकों की नब्ज को पकड़ा और महंगाई, सीमा सुरक्षा और विभिन्न सामाजिक मुद्दों को अपने चुनाव अभियान में बहुत भुनाया और ट्रम्प जी का ये पैंतरा काम आया और वो ऐसे जीते की बाकी सब फीके पड़ गए। कभी टेरीफ़ से अन्य देशों को आतंकित किया तो कभी तेल पर कब्जा करने के लिए । मजेदार बात तो यह हुई कि बहुत से देश इनकी टेरीफ़ नीति से टेरर में आए लेकिन उन्होने हिम्मत नहीं छोड़ी और अपने लिए वैकल्पिक रास्ते निकाल लिए । ट्रम्प जी की इस नीति की उनके अपने ही देश में बहुत आलोचना हुई । ढीठ आदमी अपनी हरकतों से बाज नहीं आता । उसे तो अपनी ताक़त पर नाज होता है कि वो कुछ भी कर सकता है और सभी सिर झुका के बाअदब बामुलयजा करते उनका हुक्म मानेगें । जमाना बदल गया है वो दिन गए जब आपकी तूती बोलती थी । अब तो आप बस ‘नक्कारखाने में तूती की आवाज’ बन कर रह गए हैं । जिन देशों को मक्खी की तरह मसलने का सोचा था वो चींटी की तरह आपकी च्युंटी काट रहा है और जनाबेआली तिलमिला कर रह जाते हैं । इसके सिवा कर भी क्या सकते हैं ये ? आत्मविश्वास होना अच्छी बात है लेकिन सामने वाले को कमजोर समझना अच्छा नहीं है । कहा भी जाता है कि पाँव के नीचे की धूल को कम नहीं समझना चाहिए । जनाब ट्रम्प को ईरान ने जो चक्करघिनी खिलाई है वो उसे ताउम्र याद रखेंगे । ये ईरान 21वीं सदी का ईरान है उसने भी युद्ध कौशल सीख लिए हैं और इसकी मिसाइलों कि मारक क्षमता का दम सारे देशों ने देख लिया है । ट्रम्प ने कभी नाकेबंदी की ,कभी आर्थिक प्रतिबंध लगाए । बाकी जो हो रहा है वार्ता के नाम पर उसे सारा विश्व देख रहा है । वार्ता के नाम पर अमरीकी शर्तों को ईरान ने नहीं माना तो क्या बिगाड़ पाये उसका । जो अमरीका ने इज़राइल के कंधे पर बंदूक रख कर किया वो भी जगजाहीर है । ईरान के साहस को मानना पड़ेगा की वो इनकी बयानबाजियों से नहीं डरा उसने खुद को सर्वशक्तिमान समझने वाले देश को धूल चटा दी । इतराते हुए पाकिस्तान में वार्ता के लिए गए लेकिन सब बेकार हो गया । लगता है ईरान अमरीका को ये कहकर मुंह चिढ़ा रहा है कि पुष्पा... पुष्पाराज झुकेगा नहीं...क्या फ्लावर समझा है!... फायर है फायर ...। भई ईरान मानो अमरीका को ये कह कर चिढ़ा रहा हो कि ... आ देखें जरा किसमें कितना है दम ! या फिर कह रहा हो छोटा जान के ना कोई आँख दिखाना रे .... हमसे ना टकराना रे ...... नाधिन धीना नाधिन धीना नाच नचा देंगे ...। (मुनिरका एंक्लेव, दिल्ली)

Source: newsprahari

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The World Dispatch

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