गंगा सप्तमी और भगवान चित्रगुप्त प्रकट उत्सव आज:गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा जैसी पवित्र नदियों में स्नान की परंपरा, जानिए गंगा सप्तमी से जुड़ी मान्यताएं
22 अप्रैल 2026

आज 23 अप्रैल को वैशाख शुक्ल सप्तमी पर गंगा सप्तमी मनाई जाती है। इस दिन गंगा, यमुना, नर्मदा और शिप्रा जैसी पवित्र नदियों में स्नान, दान, मंत्र जप और तप करने की परंपरा है। आज किए गए धर्म-कर्म से भक्त को अक्षय पुण्य मिलता है, ऐसा पुण्य असर जीवनभर बना रहता है। आज भी भगवान चित्रगुप्त का प्रकट उत्सव भी मनाया जाएगा। मान्यता है कि चित्रगुप्त हमारे कर्मों का हिसाब रखते हैं और मृत्यु के आत्मा को कर्मों के हिसाब से स्वर्ग-नर्क मिलता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, गंगा सप्तमी पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से व्यक्ति के पाप धुल जाते हैं। जो लोग गंगा नदी तक नहीं पहुंच पाते, वे यमुना, नर्मदा, शिप्रा जैसी अन्य पवित्र नदियों में स्नान कर सकते हैं। अगर नदी में स्नान करना संभव न हो, तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी समान पुण्य देने वाला माना गया है। इन चीजों का कर सकते हैं दान आज नदी स्नान के बाद जरूरतमंद लोगों को अनाज, कपड़े, जूते-चप्पल, भोजन, पानी, मटका और धन का दान करना चाहिए। मान्यताओं है कि इस दिन किया गया दान कई गुना फल देता है और व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि लाता है। गंगा सप्तमी की पौराणिक कथा गंगा सप्तमी से जुड़ी कथा के अनुसार वैशाख शुक्ल सप्तमी पर महर्षि जह्नु तपस्या कर रहे थे। गंगा के तेज प्रवाह से उनका ध्यान बार-बार भंग हो रहा था। क्रोधित होकर उन्होंने अपने तपोबल से गंगा को पी लिया। बाद में देवताओं के आग्रह पर उन्होंने अपने दाहिने कान से गंगा को पुनः पृथ्वी पर प्रवाहित किया। इसी घटना की वजह से गंगा को जाह्नवी नाम मिला और इस तिथि को भी गंगा के प्राकट्य का दिन माना गया है। गंगा को महर्षि जह्नु की पुत्री के रूप में भी पूजा जाता है। गंगा नदी से जुड़ी मान्यताएं
Source: bhaskar_hindi