पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग का एक्शन, TMC का प्रचार करने वाले तीन BLO सस्पेंड, विधाननगर पुलिस कमिश्नर पर भी गिरी गाज
17 अप्रैल 2026
कार्रवाई से पहले आयोग ने इन तीनों अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था. साहा और डे ने नोटिस का जवाब दिया लेकिन आयोग उससे बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं था. वहीं कुमारजीत दत्ता ने तो आयोग का नोटिस लेने से ही एकदम इनकार कर दिया था. इसके बाद इलेक्शन कमीशन ने तीनों पर कड़ा एक्शन लेने का आदेश जारी कर दिया. चुनाव में किसी भी पार्टी का सपोर्ट करने वाले अधिकारियों पर आयोग की पैनी नजर है.
पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से संपन्न कराने की अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए, भारत निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को एक बड़ी कार्रवाई की। आयोग ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लिए कथित रूप से प्रचार करने के आरोप में तीन बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को निलंबित कर दिया है और साथ ही विधाननगर के पुलिस कमिश्नर को भी उनके पद से हटा दिया है। यह कदम चुनाव प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक मशीनरी की तटस्थता सुनिश्चित करने के लिए आयोग द्वारा उठाए जा रहे सख्त उपायों का हिस्सा है।
निलंबित किए गए तीन बीएलओ पर आरोप था कि वे अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में राजनीतिक गतिविधियों में शामिल थे। कार्रवाई से पहले, आयोग ने इन तीनों अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। सूत्रों के अनुसार, दो अधिकारियों ने नोटिस का जवाब दिया, लेकिन आयोग उनके स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुआ। वहीं, एक तीसरे अधिकारी ने नोटिस स्वीकार करने से ही इनकार कर दिया, जिसके बाद चुनाव आयोग ने तीनों के खिलाफ तत्काल निलंबन का कड़ा आदेश जारी किया। यह कार्रवाई सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह की राजनीतिक पक्षधरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इसी क्रम में, एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, विधाननगर के पुलिस कमिश्नर मुरलीधर को भी उनके पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह त्रिपुरारी अथर्व को नया पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया है और उन्हें तत्काल कार्यभार संभालने का निर्देश दिया गया है। हालांकि इस तबादले के लिए कोई विशिष्ट कारण आधिकारिक तौर पर नहीं बताया गया है, लेकिन इसे चुनाव पूर्व प्रशासनिक फेरबदल के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य कानून-व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया पर किसी भी तरह के राजनीतिक प्रभाव को रोकना है। आयोग ने पहले भी संकेत दिया था कि वह निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए पुलिस और प्रशासन में बड़े बदलाव करने से नहीं हिचकिचाएगा।
पश्चिम बंगाल में चुनावों का इतिहास अक्सर राजनीतिक तनाव और हिंसा से भरा रहा है। ऐसे में चुनाव आयोग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। आयोग द्वारा की गई यह नवीनतम कार्रवाई, जिसमें जमीनी स्तर के चुनावकर्मी से लेकर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तक शामिल हैं, यह दर्शाती है कि आयोग राज्य में एक समान अवसर प्रदान करने और आदर्श आचार संहिता को सख्ती से लागू करने के लिए कितना गंभीर है। विपक्षी दल लगातार सत्ताधारी दल पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाते रहे हैं, और इन कार्रवाइयों को उन चिंताओं को दूर करने के एक प्रयास के रूप में भी देखा जा सकता है।
इन घटनाओं के बाद अब सभी की निगाहें चुनाव आयोग के अगले कदमों पर टिकी हैं। यह उम्मीद की जा रही है कि आयोग पूरे राज्य में अधिकारियों की गतिविधियों पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा ताकि कोई भी कर्मचारी किसी भी राजनीतिक दल के प्रभाव में काम न कर सके। इन निलंबन और तबादलों का असर निश्चित रूप से पूरे प्रशासनिक अमले पर पड़ेगा और उन्हें निष्पक्षता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए प्रेरित करेगा। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये कदम राज्य में एक शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव का मार्ग प्रशस्त करने में कितने सफल होते हैं।
Source: hindinews18