कानपुर में नर्वल-साढ़ मार्ग पर जाने से पहले पढ़ लें यह खबर! पांडु नदी पर बना 'सचौली पुल' बंद, दीवार बना आवागमन रोका
17 अप्रैल 2026
कानपुर में पांडु नदी पर बना 59 साल पुराना सचौली पुल जर्जर हालत के कारण बंद कर दिया गया है। दरारें और क्षतिग्रस्त पिलर सुरक्षा के लिए खतरा बन गए थे, जिससे पीडब्ल्यूडी ने आवागमन पूरी तरह रोक दिया।
कानपुर में नर्वल-साढ़ मार्ग से प्रतिदिन गुजरने वाले हजारों लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है। पांडु नदी पर बना लगभग 59 साल पुराना सचौली पुल अत्यधिक जर्जर हो जाने के कारण बंद कर दिया गया है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पुल के दोनों सिरों पर दीवारें खड़ी कर दी हैं, जिससे इस पर यातायात पूरी तरह से रुक गया है। यह पुल नर्वल और साढ़ क्षेत्रों को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी था और इसके बंद होने से स्थानीय निवासियों और दैनिक यात्रियों के सामने गंभीर आवागमन संकट खड़ा हो गया है।
यह पुल पिछले काफी समय से खराब हालत में था। भारी वाहनों के निरंतर दबाव के कारण इसके पिलर कमजोर हो गए थे और पुल के ढांचे में कई जगह दरारें आ गई थीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पिछले साल ही इसे जर्जर घोषित कर दिया गया था और भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। इसके बावजूद, हल्के वाहनों की आवाजाही जारी रही, जिससे पुल की स्थिति और बिगड़ती चली गई। अंततः, किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए, प्रशासन को इसे पूरी तरह से बंद करने और यातायात रोकने के लिए दीवार बनाने जैसा कठोर कदम उठाना पड़ा।
पुल के अचानक बंद हो जाने का सीधा असर आम जनजीवन पर पड़ा है। चूंकि कोई तत्काल वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं है, इसलिए लोगों को कई किलोमीटर लंबा चक्कर लगाकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है। हमीरपुर और कबरई से लखनऊ और सीतापुर की ओर जाने वाले वाहनों को लगभग 30 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही है। इस मार्ग पर निर्भर रहने वाले स्थानीय ग्रामीणों, व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों को सबसे अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि, इस असुविधा के बीच एक राहत की बात भी है। सचौली में पांडु नदी पर एक नए पुल का निर्माण कार्य पहले से ही प्रगति पर है। यह निर्माण उस बड़ी परियोजना का हिस्सा है जिसके तहत नर्वल मोड़ से साढ़ होते हुए डिफेंस कॉरिडोर तक एक फोर-लेन सड़क बनाई जा रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य प्रयागराज हाईवे को डिफेंस कॉरिडोर से जोड़कर क्षेत्र में औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है। 16 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस नए पुल के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
नए स्थायी पुल के निर्माण में लगभग एक वर्ष का समय लगने का अनुमान है। इस लंबी अवधि को देखते हुए क्षेत्रवासियों को हो रही परेशानी को कम करने के लिए प्रशासन एक अस्थायी समाधान पर भी विचार कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, नदी पर कुछ दिनों के लिए एक पीपा पुल बनाने की संभावना तलाशी जा रही है, ताकि लोगों को आवागमन में कुछ राहत मिल सके। जब तक नया पुल बनकर तैयार नहीं हो जाता, तब तक इस क्षेत्र के लोगों को या तो लंबे वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करना होगा या फिर पीपा पुल जैसे अस्थायी समाधानों का इंतजार करना होगा।
Source: jagran