सीएम धामी का विपक्ष पर हमला: बोले- नारी शक्ति वंदन अधिनियम रोकना महिलाओं का अपमान
17 अप्रैल 2026
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को रोकने पर विपक्ष की कड़ी आलोचना की है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने की प्रक्रिया से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के लोकसभा में पारित न हो पाने पर विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले इस ऐतिहासिक विधेयक को रोकना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह देश की नारी शक्ति का घोर अपमान है। मुख्यमंत्री धामी ने यह बयान उस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद दिया, जिसमें सरकार द्वारा महिला आरक्षण को जल्द लागू करने के उद्देश्य से लाया गया 131वां संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा।
यह राजनीतिक टकराव संसद के विशेष सत्र के दौरान अपने चरम पर पहुंच गया। सरकार ने इस सत्र को विशेष रूप से नारी शक्ति वंदन अधिनियम के कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए बुलाया था। शुक्रवार को विधेयक पर हुए मतदान में, प्रस्ताव के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सदस्यों ने इसके खिलाफ मतदान किया। संविधान संशोधन के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जो कि इस मामले में 352 वोटों का था। आवश्यक समर्थन न मिलने के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका, जिससे महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले लागू करने की सरकार की योजना को बड़ा झटका लगा।
इस विधेयक की पृष्ठभूमि सितंबर 2023 में संसद द्वारा पारित ऐतिहासिक 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' से जुड़ी है, जिसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। हालांकि, मूल कानून में यह शर्त थी कि आरक्षण नई जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन (निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण) के बाद ही लागू होगा। इस प्रक्रिया में कई वर्षों का समय लगने की आशंका थी, जिसके चलते आरक्षण का लाभ मिलने में काफी देरी हो सकती थी। इसी देरी को खत्म करने और 2011 की जनगणना के आधार पर आरक्षण को जल्द से जल्द लागू करने के लिए सरकार यह नया संशोधन विधेयक लेकर आई थी।
विपक्षी दलों ने विधेयक का विरोध करने के पीछे कई तर्क दिए। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों का कहना था कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सरकार के विधेयक में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की महिलाओं के लिए आरक्षण के भीतर अलग कोटा का प्रावधान नहीं किया गया है। विपक्ष ने इसे सामाजिक न्याय के विरुद्ध बताया और जातिगत जनगणना की मांग दोहराई। इसके अलावा, विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार परिसीमन की आड़ में देश का चुनावी नक्शा बदलना चाहती है, जिसका असर विशेषकर दक्षिण भारतीय राज्यों के प्रतिनिधित्व पर पड़ सकता है।
इस विधेयक के गिरने के साथ ही महिला आरक्षण का भविष्य एक बार फिर अनिश्चित हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाते हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। वहीं, विपक्षी दलों ने इसे सामाजिक न्याय और संघीय ढांचे की रक्षा के संघर्ष के रूप में प्रस्तुत किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विधेयक पारित न होने पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। अब यह स्पष्ट है कि यह मुद्दा केवल कानूनी या संवैधानिक नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक युद्ध का मैदान बन गया है, जिसका प्रभाव आने वाले चुनावों पर दिखना तय है।
Source: jagran