नारी वंदन अधिनियम संशोधन पर भाजपा का कांग्रेस पर तीखा वार, बोली- महिलाएं इस दिन को भूलेंगी नहीं

17 अप्रैल 2026

नारी वंदन अधिनियम संशोधन पर भाजपा का कांग्रेस पर तीखा वार, बोली- महिलाएं इस दिन को भूलेंगी नहीं

नारी वंदन अधिनियम संशोधन को मंजूरी न मिलने पर उत्तराखंड में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है, आरोप लगाया कि विपक्ष महिलाओं के अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी के प्रति गंभीर नहीं है।

भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक नारी शक्ति वंदन अधिनियम के कार्यान्वयन में तेजी लाने के उद्देश्य से लाए गए संशोधन विधेयक के लोकसभा में पारित न हो पाने के लिए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। सत्तारूढ़ दल ने कांग्रेस पर महिला सशक्तिकरण के मार्ग में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश की महिलाएं इस दिन को नहीं भूलेंगी जब उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम विफल कर दिया गया। यह राजनीतिक घमासान उस वक्त शुरू हुआ जब संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा, जिससे महिला आरक्षण के शीघ्र कार्यान्वयन पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।

यह पूरा विवाद 2023 में पारित हुए मूल नारी शक्ति वंदन अधिनियम से जुड़ा है, जिसका उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना है। हालाँकि, इस कानून के कार्यान्वयन को भविष्य में होने वाली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ा गया था, जिसके कारण इसके लागू होने में कई वर्षों की देरी की आशंका थी। इसी देरी को दूर करने और 2029 के लोकसभा चुनावों तक महिला आरक्षण को एक वास्तविकता बनाने के लक्ष्य के साथ, सरकार ने हाल ही में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पेश किया था। इस संशोधन का प्रस्ताव था कि नई जनगणना की प्रतीक्षा करने के बजाय 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही परिसीमन प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाए।

लोकसभा में इस संशोधन विधेयक पर हुए मत विभाजन के दौरान, इसे पारित करने के लिए सदन के दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता थी। विधेयक के पक्ष में 298 मत पड़े, जबकि 230 सदस्यों ने इसके विरुद्ध मतदान किया। यद्यपि विधेयक को साधारण बहुमत से अधिक मत मिले, लेकिन यह संवैधानिक संशोधन के लिए जरूरी 352 मतों के जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंच सका, जिसके परिणामस्वरूप विधेयक गिर गया। इस विफलता ने भाजपा को कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर निशाना साधने का अवसर दे दिया, और उन पर महिला विरोधी राजनीति करने का आरोप लगाया गया।

दूसरी ओर, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए सरकार की नीयत पर ही सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का तर्क है कि सरकार ने इतने महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन पर आम सहमति बनाने का कोई ईमानदार प्रयास नहीं किया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकार द्वारा जल्दबाजी में और बिना किसी संवाद के लाए गए इस विधेयक का उद्देश्य केवल राजनीतिक लाभ लेना था। विपक्ष का यह भी आरोप है कि सरकार को पहले से ही अंदाजा था कि यह विधेयक पारित नहीं हो सकता और उन्होंने जानबूझकर विपक्ष को एक जाल में फंसाने के लिए यह दांव खेला, ताकि वे अपनी विफलता का ठीकरा उन पर फोड़ सकें।

इस विधेयक के गिरने के साथ ही, महिला आरक्षण के तत्काल कार्यान्वयन की संभावनाएं धूमिल हो गई हैं। अब यह प्रक्रिया वापस अपने मूल पथ पर लौट गई है, जिसमें नई जनगणना और परिसीमन की लंबी प्रतीक्षा शामिल है, जिससे इसका 2029 के चुनावों से पहले लागू होना लगभग असंभव हो गया है। यह घटनाक्रम आने वाले समय में एक बड़े राजनीतिक टकराव की नींव रख चुका है, जहाँ भाजपा इसे महिला सशक्तिकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और विपक्ष के कथित दोहरे मापदंड के रूप में प्रस्तुत करेगी, जबकि विपक्ष सरकार पर प्रक्रियात्मक खामियों और राजनीतिक पैंतरेबाजी का आरोप लगाकर अपना बचाव करेगा।

Source: jagran

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The World Dispatch

Source: World News API