पंजाब में अपने पैतृक गांव पहुंचे उत्तराखंड के राज्यपाल, भावुक होकर बोले- यही मेरी प्रेरणा की भूमि
17 अप्रैल 2026
उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह अपने पैतृक गांव जलाल उस्मान (अमृतसर) पहुंचे। ग्रामवासियों ने उनका आत्मीय स्वागत किया, जिससे वे भावुक हो गए। उन्होंने इस भूमि को अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा बताया।
उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह शुक्रवार को जब पंजाब के अमृतसर स्थित अपने पैतृक गांव जलाल उस्मान पहुंचे तो उनकी आंखें नम हो गईं। गांव की मिट्टी को नमन करते हुए वे भावुक हो गए और कहा कि यही भूमि उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा रही है। इस अवसर पर ग्रामवासियों ने उनका जोरदार और आत्मीय स्वागत किया, जिससे राज्यपाल अभिभूत नजर आए। यह यात्रा उनके लिए केवल एक औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि अपनी जड़ों की ओर लौटने का एक भावुक क्षण था, जहां से निकलकर उन्होंने भारतीय सेना के सर्वोच्च पदों तक का सफर तय किया।
1 फरवरी 1956 को जलाल उस्मान गांव में जन्मे गुरमीत सिंह एक सैन्य पृष्ठभूमि वाले परिवार से आते हैं; उनके पिता मोहन सिंह ने भारतीय थलसेना और बड़े भाई ने भारतीय वायुसेना में देश की सेवा की। उनकी प्रारंभिक शिक्षा सैनिक स्कूल, कपूरथला में हुई, जिसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त किया। लगभग चार दशकों के अपने शानदार सैन्य करियर में, वे डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ, एडजुटेंट जनरल और कश्मीर में नियंत्रण रेखा की निगरानी करने वाली महत्वपूर्ण 15वीं कोर के कोर कमांडर जैसे कई अहम पदों पर रहे। फरवरी 2016 में सेवानिवृत्त होने से पहले, उन्हें उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए परम विशिष्ट सेवा पदक, उत्तम युद्ध सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक और विशिष्ट सेवा पदक सहित कई सम्मानों से नवाजा गया।
अपने गांव की इस यात्रा के दौरान, राज्यपाल ने सबसे पहले गुरुद्वारे में अरदास की और अपनी जड़ों से मिले संस्कारों के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके बाद उन्होंने गांव के लोगों से खुलकर बातचीत की, उनकी समस्याएं सुनीं और उनके जीवन के बारे में जानकारी ली। ग्रामीणों ने अपने बीच पले-बढ़े व्यक्ति को प्रदेश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर देखकर गर्व और खुशी का इजहार किया। यह पल उस मजबूत बंधन को दर्शाता है जो राज्यपाल आज भी अपनी जन्मभूमि के साथ साझा करते हैं।
इस दौरे का एक विशेष क्षण तब आया जब राज्यपाल स्थानीय स्कूल में बच्चों से मिलने पहुंचे। उन्होंने छात्रों को जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि गांव और शिक्षा से उनका जुड़ाव केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी भी है। इस अवसर पर उन्होंने स्कूल को कंप्यूटर और पुस्तकें भी भेंट कीं तथा मेधावी विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। उनका यह कदम गांव के युवाओं के भविष्य को संवारने और उन्हें आधुनिक शिक्षा से जोड़ने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
राज्यपाल गुरमीत सिंह की यह यात्रा सिर्फ एक व्यक्ति की घर वापसी नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रतीक है कि ऊंचे पदों पर पहुंचने के बाद भी अपनी जड़ों को याद रखना कितना महत्वपूर्ण है। उन्होंने ग्रामीणों को विश्वास दिलाया कि वे उनके विकास और कल्याण के लिए हमेशा जुड़े रहेंगे। इस दौरे ने न केवल स्थानीय समुदाय में एक नई ऊर्जा का संचार किया है, बल्कि यह भी स्थापित किया है कि कैसे एक व्यक्ति की सफलता उसके पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती है। यह यात्रा उत्तराखंड और पंजाब के बीच एक भावनात्मक और सांस्कृतिक सेतु को और मजबूत करती है।
Source: jagran