उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग का फैसला, होटल-रेस्टोरेंट संचालकों को बिजली बिल में राहत की प्रक्रिया शुरू

17 अप्रैल 2026

उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग का फैसला, होटल-रेस्टोरेंट संचालकों को बिजली बिल में राहत की प्रक्रिया शुरू

उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने होटल, रेस्टोरेंट और रिसॉर्ट संचालकों को ऑफ सीजन में बिजली बिल में राहत देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) ने राज्य के होटल, रेस्टोरेंट और रिसॉर्ट संचालकों को ऑफ-सीजन में बिजली बिलों में राहत देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे पर्यटन उद्योग को एक बड़ी राहत मिली है। यह निर्णय वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जारी टैरिफ आदेश के तहत लिया गया है और इसका उद्देश्य पर्यटन-आधारित व्यवसायों को आर्थिक स्थिरता प्रदान करना है। इस कदम से विशेष रूप से उन कारोबारियों को लाभ होगा, जिनका व्यवसाय सर्दियों के महीनों में काफी कम हो जाता है, जिससे उन्हें बिना किसी महत्वपूर्ण आय के भारी-भरकम फिक्स्ड चार्ज का भुगतान करना पड़ता था।

आयोग द्वारा निर्धारित की गई नई व्यवस्था के अनुसार, होटल उद्योग के लिए 1 नवंबर से 31 मार्च तक की अवधि को ऑफ-सीजन माना जाएगा। इस दौरान, यदि किसी होटल, रेस्टोरेंट या पंजीकृत होम-स्टे की अधिकतम बिजली की मांग उसके कुल अनुबंधित लोड के 10 प्रतिशत तक ही सीमित रहती है, तो उससे फिक्स्ड चार्ज भी केवल 10 प्रतिशत लोड के आधार पर ही लिया जाएगा। हालांकि, यदि किसी महीने में बिजली की खपत इस 10 प्रतिशत की सीमा को पार कर जाती है, तो उस महीने के लिए यह छूट लागू नहीं होगी और पूरा बिल सामान्य दरों के अनुसार वसूला जाएगा। यह राहत अगले महीने फिर से मिलनी शुरू हो जाएगी यदि खपत निर्धारित सीमा के अंदर आ जाती है।

इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए कुछ शर्तें भी निर्धारित की गई हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस राहत के पात्र केवल वही उपभोक्ता होंगे जिनके परिसरों में स्मार्ट या टीवीएम मीटर लगे हुए हैं। यह व्यवस्था केवल होटल, रेस्टोरेंट, रिसॉर्ट और पंजीकृत होम-स्टे पर ही लागू होगी। इसके अलावा, ऑफ-सीजन की अवधि के दौरान उपभोक्ताओं द्वारा अपने बिजली लोड को बढ़ाने के किसी भी अनुरोध को स्वीकार नहीं किया जाएगा। आयोग ने ऊर्जा निगम को इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि सभी पात्र उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिल सके।

यह निर्णय उत्तराखंड के होटल और पर्यटन उद्योग की लंबे समय से चली आ रही मांग का परिणाम है। विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के बाद से यह उद्योग गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहा था, जब लॉकडाउन और यात्रा प्रतिबंधों के कारण व्यवसाय लगभग ठप हो गया था। होटल एसोसिएशनों ने लगातार सरकार और नियामक आयोग से बिजली और पानी के बिलों में राहत देने की मांग की थी, ताकि वे इस संकट से उबर सकें। पहले, ऑफ-सीजन में लगभग बंद रहने वाले होटलों को भी पूरे कनेक्टेड लोड के हिसाब से फिक्स्ड चार्ज देना पड़ता था, जो उनके लिए एक बड़ा वित्तीय बोझ था।

इस फैसले से राज्य की पर्यटन-आधारित अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। ऑफ-सीजन के दौरान वित्तीय बोझ कम होने से होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को अपने व्यवसाय को बनाए रखने और कर्मचारियों को रोजगार देने में मदद मिलेगी। इससे प्रदेश में पर्यटन को और अधिक बढ़ावा मिल सकता है, क्योंकि होटल संचालक इस बचत का उपयोग अपनी सेवाओं को बेहतर बनाने में कर सकते हैं। यह कदम न केवल मौजूदा कारोबारियों को राहत देगा, बल्कि राज्य में नए निवेश को भी प्रोत्साहित कर सकता है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

Source: jagran

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The World Dispatch

Source: World News API