गेहूं खरीद के नियम आसान हुए, किसानों ने 'रेल रोको' आंदोलन वापस लिया
17 अप्रैल 2026
केंद्र सरकार ने गेहूं खरीद के नियमों में ढील दे दी है। इसके बाद किसान संगठनों ने अपना 'रेल रोको' आंदोलन रद्द कर दिया है। यह आंदोलन शुक्रवार को होना था।
पंजाब भर के किसान संगठनों ने अपना 'रेल रोको' आंदोलन रद्द कर दिया है। यह आंदोलन शुक्रवार को होना था और इससे ट्रेन सेवाओं में बाधा आने वाली थी। आंदोलन वापस लेने का यह फैसला केंद्र सरकार के एक ऐलान के बाद आया। सरकार ने गेहूं खरीद के क्वालिटी नियमों में बड़ी ढील दी है। इस कदम का मकसद उस गतिरोध को खत्म करना था, जिससे किसान परेशान थे। किसान मजदूर मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा जैसे बड़े संगठनों ने आंदोलन रद्द करने की पुष्टि की है। इससे किसानों और रेल यात्रियों, दोनों ने राहत की सांस ली है। यह विरोध प्रदर्शन राज्य भर में कई जगहों पर होना था, जिससे बड़े पैमाने पर अव्यवस्था फैलने का खतरा था।
यह विवाद बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण शुरू हुआ था। यह बारिश मार्च के आखिर और अप्रैल की शुरुआत में हुई थी। इस बेमौसम बारिश ने कटाई से ठीक पहले पकी हुई गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचाया। इससे दानों की चमक फीकी पड़ गई और सिकुड़े हुए दानों की मात्रा बढ़ गई। नतीजतन, खरीद केंद्रों पर पहुंचने वाला ज्यादातर गेहूं सरकार के कड़े फेयर एवरेज क्वालिटी (FAQ) मानकों पर खरा नहीं उतर रहा था। इससे एक गतिरोध पैदा हो गया। खरीद एजेंसियां अनाज नहीं खरीद पा रही थीं। किसान अपनी उपज के साथ मंडियों में फंसे हुए थे और उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम कीमत पर निजी व्यापारियों को अपनी फसल औने-पौने दाम में बेचने का डर था।
इस बढ़ते संकट और विरोध की घोषणा के जवाब में, केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने दखल दिया। सरकार ने खास तौर पर पंजाब और चंडीगढ़ के लिए खरीद के नियमों में ढील दी। इससे पहले राजस्थान और हरियाणा को भी ऐसी ही छूट दी गई थी। नए नियमों के तहत, चमक फीकी पड़ने की सीमा में 70% तक की छूट दी गई है। सिकुड़े और टूटे हुए दानों की सीमा 6% से बढ़ाकर 15% कर दी गई है। यह अहम फैसला किसानों को अपनी मौसम प्रभावित उपज सरकारी एजेंसियों को 2,585 रुपये प्रति क्विंटल के पूरे MSP पर बेचने की इजाजत देता है। इससे उन्हें बड़े वित्तीय नुकसान से बचाया जा सकेगा।
इस मुद्दे का घटनाक्रम देखें तो पता चलता है कि यह मामला तेजी से बढ़ा और फिर सुलझ गया। फसल खराब होने के बाद, पंजाब सरकार ने 9 अप्रैल को नियमों में ढील देने की औपचारिक मांग की। केंद्र ने 10 अप्रैल को अलग-अलग जिलों में फसल की स्थिति का जायजा लेने के लिए टीमें भेजीं। लेकिन, जब खरीद रुकी रही, तो किसान संगठनों ने 17 अप्रैल को 'रेल रोको' की योजना का ऐलान कर दिया। इसका मकसद सरकार पर जल्द समाधान के लिए दबाव बनाना था। केंद्र की घोषणा ठीक उसी दिन हुई, जिस दिन विरोध प्रदर्शन होना था। यह घोषणा टकराव को टालने में निर्णायक साबित हुई।
हालांकि फौरी तौर पर संकट टल गया है, लेकिन किसान नेताओं ने साफ किया है कि आंदोलन सिर्फ स्थगित किया गया है, स्थायी रूप से वापस नहीं लिया गया है। उन्होंने अगले तीन दिनों के लिए 'इंतजार करो और देखो' की नीति अपनाई है। वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि सरकार के नए आदेश जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू हों और खरीद प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के तेज हो। अधिकारियों को उम्मीद है कि नियमों में ढील से अब खरीद तेज और आसान हो जाएगी। इससे किसानों को बहुत जरूरी राहत मिलेगी और सीजन के लिए केंद्रीय पूल का स्टॉक भी मजबूत होगा।
Source: toi