देहरादून में भारतीय सैन्य अकादमी के पास प्रस्तावित माल की स्वीकृति रद, सुरक्षा कारणों से MDDA का बड़ा फैसला

17 अप्रैल 2026

देहरादून में भारतीय सैन्य अकादमी के पास प्रस्तावित माल की स्वीकृति रद, सुरक्षा कारणों से MDDA का बड़ा फैसला

एमडीडीए ने देहरादून में आईएमए के पास प्रस्तावित 35 करोड़ रुपये के शॉपिंग मॉल परियोजना की सशर्त स्वीकृति रद कर दी है।

मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) के पास प्रस्तावित एक बड़े शॉपिंग मॉल की स्वीकृति को रद्द कर दिया है। यह निर्णय सुरक्षा कारणों और सेना द्वारा उठाई गई आपत्तियों के बाद लिया गया। करीब 35 करोड़ रुपये की इस परियोजना को दी गई सशर्त मंजूरी को निरस्त कर दिया गया है क्योंकि विकासकर्ता, शिवम बिल्डर्स एंड डेवलपर्स, सेना से अनिवार्य अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त करने में विफल रहे। इस कदम को रक्षा प्रतिष्ठानों के आसपास निर्माण से संबंधित नियमों के सख्त अनुपालन के तौर पर देखा जा रहा है।

यह मामला तब सामने आया जब भारतीय सैन्य अकादमी ने पंडितवाड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित 'दून कर्व' नामक मॉल-सह-आवासीय परियोजना पर गंभीर सुरक्षा चिंताएं व्यक्त कीं। आईएमए ने फरवरी 2026 की शुरुआत में जिला मजिस्ट्रेट और एमडीडीए सहित कई अधिकारियों को पत्र लिखकर इस पर आपत्ति जताई थी। सेना ने इस बात पर सवाल उठाया कि आईएमए जैसे अत्यधिक संवेदनशील सैन्य प्रशिक्षण संस्थान के इतने करीब एक बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत के निर्माण को स्थानीय सैन्य प्राधिकरण (एलएमए) से एनओसी के बिना कैसे आगे बढ़ाया जा रहा था। सेना के अनुसार, इस तरह की ऊंची इमारत से अकादमी के अंदर की गतिविधियों पर सीधी नजर रखी जा सकती है, जो एक बड़ा सुरक्षा जोखिम है।

इस परियोजना के लिए एमडीडीए ने शुरुआत में बिल्डर को सशर्त मंजूरी दी थी। इस शर्त के तहत बिल्डर को दो महीने के भीतर आईएमए से एनओसी प्राप्त करनी थी। एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने बताया कि जब यह बात सामने आई कि बिल्डर निर्धारित समय-सीमा के भीतर एनओसी हासिल नहीं कर पाया है, तो प्राधिकरण ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 15 अप्रैल, 2026 को भवन के नक्शे को अस्वीकार कर दिया और दी गई मंजूरी रद्द कर दी। प्राधिकरण ने यह भी उल्लेख किया कि उन्होंने पहले इस संबंध में आईएमए को पत्र भेजा था, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली थी, हालांकि सेना द्वारा औपचारिक आपत्ति दर्ज कराए जाने के बाद त्वरित कार्रवाई की गई।

यह पूरा प्रकरण रक्षा मंत्रालय द्वारा 2011 में जारी दिशा-निर्देशों के महत्व को भी रेखांकित करता है। इन नियमों के अनुसार, किसी भी रक्षा प्रतिष्ठान की भूमि से 100 मीटर के दायरे में किसी भी निर्माण और 500 मीटर के दायरे में चार मंजिला से ऊंची इमारत के निर्माण के लिए एलएमए से पूर्व सुरक्षा मंजूरी अनिवार्य है। प्रस्तावित मॉल कथित तौर पर सात से आठ मंजिल का था, जो इन नियमों का स्पष्ट उल्लंघन प्रतीत होता है। आईएमए ने अपने पत्रों में इस बात पर भी हैरानी जताई थी कि इन स्पष्ट नियमों के बावजूद परियोजना के आवेदन पर विचार कैसे किया गया।

एमडीडीए के इस फैसले से देहरादून में रक्षा भूमि के आसपास तेजी से हो रहे शहरी विकास पर लगाम लगने की उम्मीद है। यह भविष्य की सभी निर्माण परियोजनाओं के लिए एक कड़ा संदेश है कि संवेदनशील क्षेत्रों के पास विकास करते समय राष्ट्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इस मामले ने यह सुनिश्चित किया है कि आगे किसी भी निर्माण योजना को मंजूरी देने से पहले संबंधित सैन्य अधिकारियों से उचित और समय पर मंजूरी लेना अनिवार्य होगा, जिससे शहरी विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच एक आवश्यक संतुलन बना रहे।

Source: jagran

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The World Dispatch

Source: World News API