हरियाणा निकाय चुनाव: पंचकूला, अंबाला व सोनीपत में ‘झाड़ू’ सिंबल पर उतरेगी AAP, क्या होंगे मुद्दे?
17 अप्रैल 2026
आम आदमी पार्टी ने हरियाणा के नगर निकाय चुनाव में पूरी ताकत से उतरने का ऐलान किया है। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता ने बताया कि पार्टी पंचकूला, अंबाला और सोनीपत नगर निगमों में अपने चुनाव चिन्ह 'झाड़ू' पर चुनाव लड़ेगी। AAP भ्रष्टाचार खत्म करने और बुनियादी सुविधाएं बेहतर करने का वादा कर रही है। पार्टी भाजपा-कांग्रेस से निराश जनता के बीच 'काम की राजनीति' का मॉडल पेश करेगी।
आम आदमी पार्टी (आप) ने हरियाणा की राजनीति में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करने का संकेत देते हुए एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। पार्टी ने आगामी नगर निगम चुनावों में पंचकूला, अंबाला और सोनीपत में अपने चुनाव चिन्ह 'झाड़ू' पर उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। यह कदम पंजाब और दिल्ली में अपनी सरकारों के प्रदर्शन के आधार पर हरियाणा में एक मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में उभरने की पार्टी की रणनीति का हिस्सा है। पार्टी का यह निर्णय राज्य की स्थापित पार्टियों, विशेषकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के लिए एक नई चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
आप के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि पार्टी इन तीनों प्रमुख शहरों में पूरी ताकत से चुनाव लड़ेगी। उन्होंने दावा किया कि हरियाणा की जनता भाजपा और कांग्रेस की राजनीति से तंग आ चुकी है और एक बदलाव की तलाश में है। इसी को ध्यान में रखते हुए, 'आप' अपने दिल्ली और पंजाब के शासन मॉडल को हरियाणा के शहरी मतदाताओं के सामने पेश करेगी। पार्टी के मुख्य चुनावी मुद्दे भ्रष्टाचार का खात्मा और बुनियादी नागरिक सुविधाओं में सुधार करना होंगे। इसमें साफ-सफाई, बेहतर स्कूल, और डिस्पेंसरी जैसी सुविधाएं शामिल हैं, जिन्हें पार्टी अपनी 'काम की राजनीति' के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करेगी।
हरियाणा राज्य चुनाव आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, इन नगर निगमों के लिए मतदान 10 मई को होना है और मतगणना 13 मई को होगी। नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया 21 अप्रैल से 25 अप्रैल तक चलने की उम्मीद है। हालांकि, वार्डबंदी को लेकर कांग्रेस द्वारा दायर एक याचिका के कारण हाल ही में उच्च न्यायालय ने इन चुनावों पर अस्थायी रोक लगा दी थी, जिससे चुनाव कार्यक्रम को लेकर कुछ अनिश्चितता बनी हुई है। इस कानूनी पहलू के बावजूद, सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं, क्योंकि ये चुनाव शहरी क्षेत्रों में उनके प्रभाव को मापने का एक महत्वपूर्ण पैमाना होंगे।
इन निकाय चुनावों को हरियाणा में 'आप' के लिए एक लिटमस टेस्ट के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी का प्रदर्शन यह तय करेगा कि वह राज्य में खुद को भाजपा और कांग्रेस के एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में स्थापित कर पाती है या नहीं। पिछले चुनावों में 'आप' का प्रदर्शन बहुत उत्साहजनक नहीं रहा है, लेकिन पार्टी को उम्मीद है कि दिल्ली और पंजाब में उसके काम को देखते हुए इस बार मतदाता उसे एक मौका देंगे। पार्टी का लक्ष्य उन शहरी मतदाताओं को आकर्षित करना है जो स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और अव्यवस्था से त्रस्त हैं।
आगामी कुछ सप्ताह हरियाणा की राजनीति के लिए काफी महत्वपूर्ण होंगे। जैसे ही उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया पूरी होगी और चुनाव प्रचार गति पकड़ेगा, तीनों शहरों में एक त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है। 'आप' की भागीदारी न केवल स्थापित दलों के वोट बैंक को प्रभावित कर सकती है, बल्कि राज्य के राजनीतिक समीकरणों को भी एक नई दिशा दे सकती है। इन चुनावों के परिणाम यह स्पष्ट करेंगे कि हरियाणा की जनता राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से सटे इन महत्वपूर्ण शहरों के विकास के लिए किस दल पर अपना भरोसा जताती है।
Source: jagran