डीए हड़ताल पर राहत: कोलकाता हाई कोर्ट ने कर्मचारियों पर कार्रवाई पर लगाई रोक
17 अप्रैल 2026
कोलकाता हाई कोर्ट ने महंगाई भत्ते की मांग को लेकर हड़ताल पर गए सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार के कर्मचारियों को एक बड़ी राहत प्रदान की है। महंगाई भत्ते (डीए) की मांग को लेकर हाल ही में हुई हड़ताल में शामिल हुए कर्मचारियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई करने पर अदालत ने अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा की एकल पीठ ने यह स्पष्ट किया कि जब तक राज्य सरकार द्वारा जारी की गई हड़ताल-विरोधी निर्देशिका की वैधता पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक किसी भी कर्मचारी के विरुद्ध कोई कठोर कदम नहीं उठाया जाएगा।
यह मामला कई वर्षों से चले आ रहे विवाद का हिस्सा है, जिसमें राज्य सरकार के कर्मचारी केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बराबर डीए की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों का तर्क है कि बढ़ती महंगाई के बीच जीवन यापन के लिए यह भत्ता आवश्यक है और डीए में मौजूदा अंतर उनके साथ अन्याय है। इस मांग को लेकर कर्मचारी संगठन कई बार विरोध प्रदर्शन, कार्य विराम और हड़ताल कर चुके हैं। हालिया हड़ताल भी इसी सिलसिले की एक कड़ी थी, जिसमें लाखों कर्मचारियों ने हिस्सा लिया था।
हड़ताल से पहले, राज्य सरकार ने एक सख्त परिपत्र जारी किया था, जिसमें कर्मचारियों को चेतावनी दी गई थी कि हड़ताल में शामिल होने पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसमें वेतन कटौती और सेवा में व्यवधान जैसी कार्रवाइयां शामिल थीं। इसी परिपत्र की वैधता को कर्मचारी संगठनों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके परिणामस्वरूप अदालत ने यह राहत भरा आदेश दिया है। अदालत के इस कदम से हड़ताली कर्मचारियों और उनके संगठनों का मनोबल बढ़ा है, जो इसे अपनी कानूनी लड़ाई में एक महत्वपूर्ण जीत के रूप में देख रहे हैं।
अदालत ने अपने निर्देश में राज्य सरकार को इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद याचिकाकर्ता संगठन को अपना जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मिलेगा, जिसके बाद मामले की विस्तृत सुनवाई होगी। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों को सरकार द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस का जवाब देना होगा। यह कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी कि दोनों पक्षों को अपनी दलीलें पेश करने का पूरा अवसर मिले।
अब सभी की निगाहें इस मामले की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत का यह अंतरिम आदेश राज्य सरकार पर कर्मचारियों के साथ बातचीत के माध्यम से इस मुद्दे का समाधान खोजने के लिए दबाव बढ़ाएगा। यह फैसला इस लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि सरकार अदालत के रुख को देखते हुए उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी और एक स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ेगी।
Source: jagran