आय से अधिक संपत्ति मामले में भूपेश बघेल की पूर्व उपसचिव पर आरोप तय, अब नियमित सुनवाई होगी प्रारंभ
17 अप्रैल 2026
भूपेश बघेल की पूर्व उपसचिव सौम्या चौरसिया पर रायपुर की विशेष अदालत ने आय से अधिक संपत्ति का आरोप तय किया है। ईओडब्ल्यू की चार्जशीट के अनुसार, उन्होंने 2018-2022 के बीच वैध आय से 47.17 करोड़ रुपये अधिक संपत्ति अर्जित की।
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पूर्व उपसचिव रहीं सौम्या चौरसिया की मुश्किलें आय से अधिक संपत्ति के मामले में बढ़ गई हैं। रायपुर की एक विशेष अदालत ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप तय कर दिए हैं। इस महत्वपूर्ण कानूनी विकास के बाद, अब इस बहुचर्चित मामले में नियमित सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है, जहाँ अभियोजन पक्ष अपने गवाहों और सबूतों को पेश करेगा। यह मामला राज्य की नौकरशाही और राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है।
राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) द्वारा प्रस्तुत आरोप पत्र के अनुसार, सौम्या चौरसिया पर दिसंबर 2018 से दिसंबर 2022 के बीच अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। जांच एजेंसी ने दावा किया है कि इस अवधि के दौरान उन्होंने लगभग 47.17 करोड़ रुपये की अतिरिक्त संपत्ति अर्जित की, जो उनकी वैध आय से मेल नहीं खाती। यह कार्रवाई चौरसिया के खिलाफ जुलाई 2024 में दर्ज की गई प्राथमिकी का परिणाम है, जिसके बाद एक विस्तृत जांच की गई। ईओडब्ल्यू ने अपनी जांच में पाया कि इस संपत्ति को कथित तौर पर परिवार के सदस्यों और परिचितों के नाम पर विभिन्न निवेशों और अचल संपत्तियों के रूप में रखा गया था।
शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश नीरज शर्मा की अदालत में जब आरोप पढ़कर सुनाए गए, तो सौम्या चौरसिया ने खुद को निर्दोष बताते हुए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने इन आरोपों को स्वीकार करने से इनकार किया और मामले में विचारण (ट्रायल) की मांग की। उनके इस इनकार के बाद, अदालत ने मामले को नियमित सुनवाई के लिए आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। वर्तमान में सौम्या चौरसिया निलंबित हैं और इस मामले में जमानत पर बाहर हैं। इससे पहले उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया गया था, जिसमें बाद में उन्हें उच्चतम न्यायालय से जमानत मिल गई थी।
आरोप तय होना किसी भी आपराधिक मामले में एक महत्वपूर्ण चरण होता है। इसका अर्थ है कि अदालत ने प्रथम दृष्टया अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को विचारण के लिए पर्याप्त माना है। अब नियमित सुनवाई के दौरान, ईओडब्ल्यू को अपने आरोपों को संदेह से परे साबित करना होगा। अभियोजन पक्ष अपने गवाहों के बयान दर्ज कराएगा और दस्तावेजी सबूत पेश करेगा। इसके बाद बचाव पक्ष को इन गवाहों से जिरह करने और अपने पक्ष में सबूत पेश करने का अवसर मिलेगा। दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद ही अदालत अपना अंतिम फैसला सुनाएगी।
यह मामला तब सामने आया जब सौम्या चaurasia तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यालय में एक शक्तिशाली अधिकारी के रूप में कार्यरत थीं। 2008 बैच की राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी चौरसिया को बघेल सरकार के दौरान काफी प्रभावशाली माना जाता था। इस मामले के घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका नतीजा न केवल आरोपी अधिकारी के भविष्य को तय करेगा, बल्कि राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक क्षेत्र पर भी इसका दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है। आने वाले महीनों में होने वाली अदालती कार्यवाही से कई नए तथ्य सामने आने की उम्मीद है।
Source: jagran