लखनऊ में गैस एजेंसी से गायब हो गए 661 सिलिंडर, बड़ा हेरफेर देख टीम भी रह गई सन्न
17 अप्रैल 2026
लखनऊ की विहान इंडेन गैस एजेंसी में पूर्ति निरीक्षक की छापेमारी के दौरान स्टॉक से 661 एलपीजी सिलिंडर कम पाए गए।
लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में एक गैस एजेंसी में बड़े पैमाने पर हेरफेर का मामला सामने आया है, जहां जांच के दौरान 661 घरेलू गैस सिलेंडर गायब पाए गए। यह मामला शेखूपुरा स्थित विहान इंडेन गैस एजेंसी का है, जहां आपूर्ति विभाग और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन की एक संयुक्त टीम ने औचक निरीक्षण किया। इस बड़ी अनियमितता के उजागर होने के बाद एजेंसी के प्रोप्राइटर, राहुल गंगवार, के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत विकासनगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। यह घटना घरेलू गैस की कालाबाजारी और वितरण प्रणाली में सेंधमारी की गंभीर समस्या को दर्शाती है, जिसने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है।
यह कार्रवाई 14 अप्रैल को की गई जब कालाबाजारी की शिकायतों के बाद अधिकारियों की टीम ने एजेंसी पर छापा मारा। जांच के दौरान, ऑनलाइन स्टॉक रिकॉर्ड और भौतिक रूप से मौजूद सिलेंडरों के बीच एक बड़ा अंतर पाया गया। रिकॉर्ड के अनुसार, एजेंसी के पास 291 खाली और 384 भरे हुए सिलेंडर होने चाहिए थे, लेकिन मौके पर केवल 22 खाली सिलेंडर मिले और एक भी भरा हुआ सिलेंडर नहीं था। इस भारी अंतर को देखकर जांच टीम भी सन्न रह गई। जब प्रोप्राइटर से इस बारे में सवाल किया गया तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके, जिससे कालाबाजारी का संदेह और गहरा हो गया।
जांच में यह भी पता चला कि यह कोई पहली बार नहीं था जब इस एजेंसी में अनियमितताएं पाई गई हों। इससे ठीक पहले, 23 मार्च को हुई एक और जांच में भी एजेंसी के स्टॉक से 318 सिलेंडर कम पाए गए थे। उस समय, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने एजेंसी संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी कर पंद्रह दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन एजेंसी की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके अतिरिक्त, यह भी पाया गया कि एजेंसी को 6 और 7 अप्रैल को प्राप्त हुए 702 सिलेंडरों का रिकॉर्ड भी रजिस्टर में दर्ज नहीं किया गया था, जो एक सुनियोजित हेरफेर की ओर इशारा करता है।
इस घटना के पीछे का मुख्य उद्देश्य घरेलू सिलेंडरों को अवैध रूप से ऊंचे दामों पर काला बाजार में बेचना माना जा रहा है। घरेलू उपयोग के लिए दिए जाने वाले सब्सिडी वाले सिलेंडरों को वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों या अन्य खरीदारों को बेचकर भारी मुनाफा कमाया जाता है। इस तरह की गतिविधियों से न केवल सरकार को राजस्व का नुकसान होता है, बल्कि आम उपभोक्ता भी परेशान होते हैं, जिन्हें समय पर सिलेंडर नहीं मिल पाता और उन्हें गैस की कमी का सामना करना पड़ता है। यह मामला लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में गैस वितरण प्रणाली में मौजूद बड़ी खामियों और निगरानी की आवश्यकता को भी उजागर करता है।
अब इस मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर अपनी जांच शुरू कर दी है। पुलिस साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी, जिसमें एजेंसी के संचालक की गिरफ्तारी भी हो सकती है। कानूनी प्रक्रिया के तहत, आवश्यक वस्तु अधिनियम के उल्लंघन के लिए कठोर दंड का प्रावधान है, जिसमें जेल की सजा भी शामिल है। इसके साथ ही, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन द्वारा एजेंसी का लाइसेंस रद्द करने जैसी विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित उपभोक्ताओं की गैस आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए उन्हें पास की अन्य एजेंसियों से जोड़ने की व्यवस्था की जा रही है।
Source: jagran