दिल्ली की 220 अनधिकृत कॉलोनियों के भविष्य पर संकट के बादल, आखिर क्या है समाधान
17 अप्रैल 2026
दिल्ली की 220 अनधिकृत कॉलोनियों का भविष्य अधर में है, क्योंकि उन्हें नियमितीकरण प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है। ये कॉलोनियां यमुना खादर या संरक्षित भूमि पर बसी हैं, जिससे कानूनी अड़चनें हैं। लगभग पांच लाख लोग प्रभावित हैं।
दिल्ली की 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की हालिया घोषणा के बीच, राजधानी की 220 अन्य कॉलोनियो के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इन कॉलोनियों में रहने वाले लगभग पांच लाख लोगों की उम्मीदों को उस समय झटका लगा जब उन्हें नियमितीकरण प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। केंद्र सरकार ने हाल ही में दिल्ली की 1,731 में से 1,511 कॉलोनियों को 'जैसा है, जहां है' के आधार पर नियमित करने की एक सरल नीति की घोषणा की है, लेकिन शेष 220 कॉलोनियों को इस सूची से बाहर रखा गया है, जिससे उनके निवासियों का भविष्य अधर में लटक गया है।
इन 220 कॉलोनियों को नियमितीकरण के लाभ से वंचित रखने का मुख्य कारण कानूनी और पर्यावरणीय अड़चनें हैं। जानकारी के अनुसार, इनमें से लगभग 90 कॉलोनियां यमुना खादर के संवेदनशील 'ओ-जोन' में स्थित हैं, जबकि शेष कॉलोनियां वन विभाग या भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की संरक्षित भूमि पर बसी हैं। मौजूदा नियमों और सर्वोच्च न्यायालय के सख्त रुख के कारण इन भूमियों पर किसी भी प्रकार के निर्माण को नियमित करना लगभग असंभव है। इसी कानूनी जटिलता के चलते इन कॉलोनियों को 2019 में शुरू की गई पीएम-उदय योजना के तहत भी मालिकाना हक देने की प्रक्रिया से अलग रखा गया है।
यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब 1,511 अन्य कॉलोनियों में 24 अप्रैल से मालिकाना हक के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। इन कॉलोनियों के निवासियों को अब दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग के माध्यम से 45 दिनों के भीतर स्वामित्व विलेख मिल सकेगा, जिससे उन्हें अपने घरों पर कानूनी अधिकार प्राप्त होगा। इसके विपरीत, 220 कॉलोनियों के निवासी न केवल मालिकाना हक से वंचित रहेंगे, बल्कि उन्हें हमेशा अपने आशियाने पर कार्रवाई का डर भी सताता रहेगा। इन क्षेत्रों में बुनियादी नागरिक सुविधाओं जैसे पक्की सड़कें, स्वच्छ पानी और सीवर लाइनों का अभाव बना हुआ है।
इस मामले पर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है। दिल्ली के सांसदों ने केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल से मुलाकात कर मानवीय आधार पर इन 220 कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने का अनुरोध किया है, भले ही उनका नियमितीकरण तत्काल संभव न हो। वहीं, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के उपाध्यक्ष एन सरवन कुमार ने स्पष्ट किया है कि इन कॉलोनियों को फिलहाल प्रक्रिया से बाहर रखा गया है और इनके भविष्य का निर्णय केंद्र सरकार द्वारा एक अलग नीति के तहत ही लिया जाएगा।
शहरी नियोजन विशेषज्ञों का मानना है कि इन कॉलोनियों का मौजूदा स्थान पर नियमितीकरण संभव नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, एकमात्र व्यावहारिक समाधान इन कॉलोनियों के निवासियों का पुनर्वास नीति के तहत किसी अन्य स्थान पर फ्लैट या प्लॉट आवंटित करना हो सकता है। फिलहाल, इन पांच लाख लोगों का भविष्य केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिका है, जो यह तय करेगा कि क्या उन्हें मूलभूत नागरिक अधिकार मिलेंगे या वे अनिश्चितता के साये में ही जीने को मजबूर होंगे।
Source: jagran