लव जिहाद की 'भोपाल फाइल्स' : MP में सुनियोजित मतांतरण का जाल, किशोरियों को बना रहे शिकार, बुर्का पहन पहुंच रहीं घर
17 अप्रैल 2026
मप्र के कई जिलों तक फैला है मुस्लिम युवकों का गिरोह। भोपाल-अशोनगर में कुचक्र में फंसीं तीन किशोरियों के मतांतरण व निकाह के ताजा मामले आए सामने। पुलिस जांच में जुटी।
मध्य प्रदेश में धर्मांतरण और किशोरियों के शोषण से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने एक सुनियोजित गिरोह की गतिविधियों की ओर इशारा किया है। इसका खुलासा तब हुआ जब अशोकनगर जिले की एक नाबालिग किशोरी भोपाल से अपने घर बुर्का पहनकर लौटी। जब परिवार ने उससे पूछताछ की तो उसने प्रेम, मतांतरण और निकाह की एक चौंकाने वाली कहानी सुनाई, जिसमें न केवल वह, बल्कि भोपाल की रहने वाली उसकी दो और सहेलियां भी शिकार बनी थीं। इस घटना के बाद, मामले को "भोपाल फाइल्स" का नाम दिया जा रहा है, जो एक संगठित साजिश की ओर संकेत करता है।
पीड़िता की मां द्वारा पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, कहानी लगभग चार महीने पहले पिपरई रेलवे स्टेशन से शुरू हुई थी। वहां किशोरी की मुलाकात भोपाल निवासी अल्तमश खान नामक युवक से हुई। आरोप है कि अल्तमश ने किशोरी को बहला-फुसलाकर और उसका "ब्रेनवाश" करके अपने जाल में फंसाया। इसके बाद आरोपी उसे भोपाल ले गया, जहां उसने न केवल किशोरी के साथ कई बार दुष्कर्म किया, बल्कि उसका जबरन धर्मांतरण कराकर उससे निकाह भी कर लिया। जांच में यह भी सामने आया है कि अल्तमश के दो साथियों, अरहान खान और आहत शेख ने इसी तरह पीड़िता की दो अन्य नाबालिग सहेलियों को भी अपना शिकार बनाया।
मामले के प्रकाश में आने के बाद अशोकनगर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। पीड़िता के परिजनों के साथ कुछ हिंदू संगठन भी थाने पहुंचे, जिसके बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी अल्तमश खान सहित तीन युवकों के खिलाफ मामला दर्ज किया। आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं के अलावा, मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम-2021, पॉक्सो एक्ट और एससी-एसटी एक्ट के तहत भी प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अपनी टीमें भोपाल भेज दी हैं और छापेमारी की जा रही है। जानकारी के अनुसार, एक आरोपी पहले से ही किसी अन्य आपराधिक मामले में भोपाल की जेल में बंद है।
यह घटना मध्य प्रदेश में "लव जिहाद" को लेकर चल रही बहस को और तेज करती है। प्रदेश में जबरन या धोखे से होने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए वर्ष 2021 में मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम लागू किया गया था। इस कानून का उद्देश्य प्रलोभन, धमकी, विवाह या किसी अन्य कपटपूर्ण तरीके से होने वाले धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना है। मौजूदा मामले ने इस कानून की प्रासंगिकता और ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वाले संगठित गिरोहों के अस्तित्व पर फिर से ध्यान केंद्रित कर दिया है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या यह गिरोह सोशल मीडिया के माध्यम से किशोरियों को निशाना बनाता था और क्या इसके पीछे कोई बड़ी फंडिंग भी है।
इस खुलासे के बाद स्थानीय समुदाय में अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंता और भय का माहौल है। पुलिस की जांच अब केवल तीन आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य उस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करना है जो किशोरियों को सुनियोजित तरीके से अपना शिकार बना रहा है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इस गिरोह के तार कहां-कहां तक फैले हैं और इसमें और कितने लोग शामिल हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां और नए खुलासे होने की उम्मीद है, जिससे इस कथित "भोपाल फाइल्स" की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।
Source: jagran