बंगाल में कल ममता के लिए चुनाव प्रचार करेंगे हेमंत सोरेन और कल्पना, अभिषेक संग बनाई रणनीति
17 अप्रैल 2026
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन शनिवार से बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के लिए प्रचार करेंगे। वे मुख्य रूप से बांकुड़ा, पुरुलिया, झाड़ग्राम और पश्चिम मेदिनीपुर के आदिवासी बहुल जिलों में जनसभाएं करेंगे।
पश्चिम बंगाल में जारी विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पक्ष में प्रचार करने के लिए बंगाल के चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। शनिवार से शुरू होने वाले इस अभियान का मुख्य उद्देश्य आदिवासी बहुल क्षेत्रों में तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी के समर्थन में माहौल बनाना है। इस महत्वपूर्ण कदम से पहले, सोरेन दंपति ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के साथ एक बैठक कर चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दिया, जिसका लक्ष्य जंगलमहल क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के प्रभाव को कम करना है।
हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन का तीन दिवसीय चुनाव प्रचार मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल के उन जिलों पर केंद्रित होगा जो झारखंड की सीमा से लगे हुए हैं और जहाँ आदिवासी मतदाताओं की एक बड़ी आबादी है। यह अभियान शनिवार को पुरुलिया से शुरू होगा और इसके बाद बांकुड़ा, झाड़ग्राम और पश्चिम मेदिनीपुर जैसे जिलों में जनसभाएं और रैलियां आयोजित की जाएंगी। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) का इन क्षेत्रों में, विशेषकर कुड़मी और संथाल समुदायों के बीच, पारंपरिक प्रभाव माना जाता है। इसी प्रभाव का लाभ उठाते हुए टीएमसी इन इलाकों में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
यह चुनावी सहयोग दो क्षेत्रीय दलों के बीच भाजपा के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा बनाने की रणनीति का हिस्सा है। झामुमो पश्चिम बंगाल में चुनाव नहीं लड़ रहा है, लेकिन उसने ममता बनर्जी की पार्टी को अपना पूरा समर्थन देने का फैसला किया है ताकि भगवा पार्टी को रोका जा सके। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन की रैलियों से आदिवासी मतदाताओं को यह संदेश जाएगा कि टीएमसी उनके हितों के लिए प्रतिबद्ध है। यह रणनीति पिछले चुनावों में जंगलमहल क्षेत्र में भाजपा को मिली बढ़त को कम करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस राजनीतिक घटनाक्रम के कई बड़े निहितार्थ हैं, खासकर झारखंड की गठबंधन राजनीति के संदर्भ में। झारखंड में झामुमो, कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के साथ मिलकर सरकार चला रहा है। वहीं, पश्चिम बंगाल में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ रही है। ऐसे में झामुमो द्वारा टीएमसी के लिए प्रचार करना गठबंधन के भीतर एक अजीब स्थिति पैदा करता है, जहाँ झारखंड में सहयोगी दल बंगाल के चुनावी अखाड़े में एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हैं। हालांकि, झामुमो नेताओं ने इसे भाजपा को हराने के एक बड़े लक्ष्य का हिस्सा बताया है।
आगामी दिनों में होने वाली इन रैलियों पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन का करिश्मा बंगाल के आदिवासी मतदाताओं पर कितना प्रभाव डालता है और क्या यह टीएमसी के लिए वोटों में तब्दील हो पाता है। इस अभियान का नतीजा न केवल बंगाल की राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों के बीच बन रहे समीकरणों और उनके आपसी संबंधों की भविष्य की दिशा भी तय करने में एक भूमिका निभा सकता है।
Source: jagran