दिल्ली की 'दमघोंटू' हवा पर बरसी राहत, 12 इलाकों में 300 पार था AQI; बारिश ने टाला सांसों पर संकट
17 अप्रैल 2026
दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है, शुक्रवार को 12 इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 'बहुत खराब' श्रेणी में रहा। समग्र AQI 263 दर्ज किया गया, जो 'खराब' श्रेणी में आता है। बारिश की कमी और सूखे मौसम के कारण धूल प्रदूषण मुख्य कारण है।
दिल्ली की दमघोंटू हवा से जूझ रहे नागरिकों को शुक्रवार शाम हुई बारिश ने बड़ी राहत दी। दिनभर प्रदूषण की मोटी चादर में लिपटी राजधानी में शाम होते ही मौसम ने करवट ली और तेज हवाओं के साथ हुई वर्षा ने सांसों पर मंडरा रहे संकट को कुछ समय के लिए टाल दिया। इससे पहले, शहर का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 263 दर्ज किया गया, जो 'खराब' श्रेणी में आता है, लेकिन चिंता की बात यह थी कि दिल्ली के 12 इलाके 'बहुत खराब' श्रेणी में पहुंच गए थे, जहां एक्यूआई 300 के चिंताजनक स्तर को पार कर गया था।
आमतौर पर गर्मियों में दिल्ली की हवा अपेक्षाकृत साफ रहती है, लेकिन इस बार अप्रैल में स्थिति अलग रही। पिछले कुछ दिनों से बारिश न होने के कारण मौसम शुष्क और गर्म बना हुआ था, जिससे मिट्टी की नमी खत्म हो गई थी। परिणामस्वरूप, हल्की तेज हवाएं भी अपने साथ भारी मात्रा में धूल उड़ा रही थीं। इस धूल ने स्थानीय स्रोतों, जैसे कि वाहन और औद्योगिक उत्सर्जन, से निकलने वाले प्रदूषक कणों के साथ मिलकर एक खतरनाक मिश्रण तैयार किया, जिसे शांत मौसम की स्थिति ने जमीन के करीब ही कैद कर लिया और पूरी दिल्ली-एनसीआर में धुंध की परत छा गई।
वायु गुणवत्ता में लगातार हो रही गिरावट को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने पहले ही सक्रियता दिखाते हुए गुरुवार को ही दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) का पहला चरण लागू कर दिया था। यह निर्णय तब लिया गया जब दिल्ली का औसत एक्यूआई 226 पर 'खराब' श्रेणी में पहुंच गया था। ग्रैप-1 के तहत, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के सख्त उपाय, सड़कों पर पानी का छिड़काव, कचरा जलाने पर प्रतिबंध और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर निगरानी जैसे कई कदम उठाए जाते हैं, ताकि स्थिति को और बिगड़ने से रोका जा सके।
शुक्रवार को प्रदूषण का स्तर अपने चरम पर पहुंच गया था। शाम चार बजे तक दिल्ली के कई घनी आबादी वाले और रिहायशी इलाकों की हवा बेहद जहरीली हो चुकी थी। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, वजीरपुर में एक्यूआई 379, मुंडका में 371, रोहिणी में 354, नरेला में 343 और नेहरू नगर में 330 दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि शाम की बारिश से पहले इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सांस लेने में कितनी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा होगा।
हालांकि, शाम को हुई बारिश ने प्रदूषक कणों को धोकर हवा को साफ कर दिया, जिससे दिल्लीवासियों ने राहत की सांस ली। इस बारिश से न केवल प्रदूषण कम हुआ, बल्कि तापमान में भी 7 से 10 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे भीषण गर्मी से भी राहत मिली। मौसम विभाग और प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों का अनुमान है कि इस वर्षा के प्रभाव से अगले कुछ दिनों तक वायु गुणवत्ता 'खराब' या 'मध्यम' श्रेणी में बनी रह सकती है। यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि दिल्ली का वायु प्रदूषण अब केवल सर्दियों तक सीमित नहीं है और इसके स्थायी समाधान के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है।
Source: jagran