MP के बाघों की दक्षिण में बढ़ी डिमांड, अब आंध्र ने मांगे बाघ, उप-मुख्यमंत्री पवन कल्याण ने लिखा पत्र

17 अप्रैल 2026

MP के बाघों की दक्षिण में बढ़ी डिमांड, अब आंध्र ने मांगे बाघ, उप-मुख्यमंत्री पवन कल्याण ने लिखा पत्र

मध्य प्रदेश अब 'टाइगर सप्लायर' के रूप में उभर रहा है। आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने पापीकोंडा नेशनल पार्क के लिए मध्य प्रदेश से बाघों की मांग की है। एनटीसीए की मंजूरी और उपयुक्त स्थलों के निरीक्षण के बाद ही स्थानांतरण होगा। तेलंगाना और झारखंड भी बाघों की कतार में हैं।

देश में 'टाइगर स्टेट' के रूप में अपनी पहचान बना चुका मध्य प्रदेश अब बाघ संरक्षण में अपनी सफलता की गाथा दूसरे राज्यों के साथ साझा करने की तैयारी में है। वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत, आंध्र प्रदेश सरकार ने अपने जंगलों को बाघों से आबाद करने के लिए मध्य प्रदेश से मदद मांगी है। आंध्र प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री पवन कल्याण ने इस संबंध में मध्य प्रदेश सरकार को एक औपचारिक पत्र लिखकर बाघों के स्थानांतरण का अनुरोध किया है। यह कदम मध्य प्रदेश की वन्यजीव प्रबंधन और बाघों की बढ़ती आबादी में अग्रणी भूमिका को रेखांकित करता है।

मध्य प्रदेश ने पिछले कुछ दशकों में बाघ संरक्षण में असाधारण सफलता हासिल की है। 2022 की बाघ गणना के अनुसार, 785 बाघों के साथ यह राज्य देश में पहले स्थान पर था। यह सफलता सख्त संरक्षण नीतियों, प्रभावी निगरानी और स्थानीय समुदायों की भागीदारी का परिणाम है। राज्य के कान्हा, बांधवगढ़ और पेंच जैसे टाइगर रिजर्व न केवल बाघों की एक स्वस्थ आबादी का समर्थन करते हैं, बल्कि अब एक ऐसी स्थिति में हैं जहाँ वे अन्य राज्यों को उनके क्षेत्रों में बाघों की आबादी को फिर से स्थापित करने या मजबूत करने में मदद कर सकते हैं। यह पहली बार नहीं है जब मध्य प्रदेश ने अन्य राज्यों की मदद की है; इससे पहले गुजरात और राजस्थान को भी यहां से बाघ दिए जा चुके हैं।

आंध्र प्रदेश का अनुरोध विशेष रूप से पापीकोंडा नेशनल पार्क और इससे सटे नल्लामाला के जंगलों के लिए है, जो ऐतिहासिक रूप से बाघों का निवास स्थान रहा है। यह क्षेत्र विशाल नागार्जुनसागर-श्रीशैलम टाइगर रिजर्व का हिस्सा है, जो भारत का सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य है। हालांकि, विभिन्न कारणों से यहाँ बाघों की संख्या में कमी आई थी। आंध्र प्रदेश सरकार अब इस क्षेत्र में शिकार के आधार को मजबूत करने और मानवजनित दबाव को कम करने जैसे उपायों के माध्यम से बाघों के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि मध्य प्रदेश से लाए जाने वाले बाघ यहां सफलतापूर्वक अपना वंश बढ़ा सकें।

बाघों का स्थानांतरण एक जटिल और वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसे राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के दिशा-निर्देशों के तहत किया जाता है। अनुरोध प्राप्त होने के बाद, एनटीसीए द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ दल आंध्र प्रदेश में प्रस्तावित क्षेत्र का दौरा करेंगे। वे वहां शिकार के लिए जानवरों की उपलब्धता, पानी के स्रोत, निवास स्थान की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था का मूल्यांकन करेंगे। उनकी रिपोर्ट और सिफारिशों के आधार पर ही एनटीसीए स्थानांतरण की अंतिम मंजूरी देता है। इसके बाद, मध्य प्रदेश के अभयारण्यों से उपयुक्त और स्वस्थ बाघों की पहचान कर उन्हें वैज्ञानिक तरीके से पकड़कर नए घर में भेजा जाता है।

यह अंतर-राज्यीय सहयोग भारत में वन्यजीव संरक्षण के भविष्य के लिए एक सकारात्मक संकेत है। यह दर्शाता है कि राज्य अपनी भौगोलिक सीमाओं से परे जाकर राष्ट्रीय धरोहर को बचाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। मध्य प्रदेश का एक 'टाइगर सप्लायर' के रूप में उभरना 'प्रोजेक्ट टाइगर' की सफलता का प्रमाण है, जिसने न केवल बाघों को विलुप्त होने से बचाया है, बल्कि उनकी आबादी को एक स्थायी स्तर पर पहुंचा दिया है। आंध्र प्रदेश में बाघों के सफल स्थानांतरण से न केवल वहां की पारिस्थितिकी को पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी, बल्कि यह पूरे देश में बाघों के लिए एक सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में एक और मील का पत्थर साबित होगा।

Source: jagran

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The World Dispatch

Source: World News API