बदरीनाथ और भविष्य बदरी धाम के कपाट कब खुलेंगे? चारधाम यात्रा पर आ रहे तो मौका है सप्त बदरी दर्शन का
17 अप्रैल 2026
उत्तराखंड की चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु सप्त बदरी दर्शन का लाभ उठा सकते हैं। चमोली जिले में स्थित इन सात धामों में से अधिकांश मंदिर साल भर खुले रहते हैं।
बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इसके साथ ही जोशीमठ-मलारी मार्ग पर सुभांई गांव के पास स्थित भविष्य बदरी धाम के कपाट भी इसी दिन खुलेंगे। इस वर्ष चारधाम यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए यह एक अनूठा अवसर है जब वे भगवान विष्णु को समर्पित सात मंदिरों के समूह, सप्त बदरी के दर्शन कर सकते हैं। ये सभी सात धाम चमोली जिले में स्थित हैं और थोड़ी सी योजना के साथ, तीर्थयात्री इन पवित्र स्थलों की यात्रा कर सकते हैं।
चारधाम यात्रा 2026 की शुरुआत 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ होगी। इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के द्वार खुलेंगे और फिर 23 अप्रैल को बदरीनाथ के कपाट खोले जाएंगे। बदरीनाथ, भविष्य बदरी और आदि बदरी को छोड़कर, सप्त बदरी के अन्य सभी मंदिर साल भर भक्तों के लिए खुले रहते हैं। आदि बदरी धाम के कपाट केवल पौष माह के दौरान बंद रहते हैं। इस यात्रा के दौरान श्रद्धालु न केवल आध्यात्मिक शांति का अनुभव करेंगे, बल्कि हिमालय के मनोरम दृश्यों, गहरी घाटियों, बहती नदियों और ऐतिहासिक स्थलों का भी आनंद ले सकेंगे।
सप्त बदरी यात्रा की शुरुआत अक्सर ज्योतिर्मठ स्थित नृसिंह बदरी मंदिर से होती है, जो बदरीनाथ धाम का शीतकालीन गद्दी स्थल भी है। यहां भगवान नृसिंह की एक शालिग्राम मूर्ति स्थापित है, जिसके बारे में एक मान्यता है कि उनकी बाईं कलाई समय के साथ पतली होती जा रही है। ऐसा माना जाता है कि जिस दिन यह कलाई टूटकर गिर जाएगी, उस दिन नर और नारायण पर्वत मिल जाएंगे और बदरीनाथ का वर्तमान मार्ग बंद हो जाएगा। इसके बाद, भगवान बदरी विशाल भविष्य बदरी मंदिर में दर्शन देंगे। अन्य बदरी मंदिरों में पांडुकेश्वर में स्थित योग-ध्यान बदरी, अणिमठ में वृद्ध बदरी, उर्गम घाटी में ध्यान बदरी, और कर्णप्रयाग के पास आदि बदरी शामिल हैं।
बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया एक प्राचीन और अनूठी परंपरा है, जो वसंत पंचमी से शुरू होती है। इस दिन टिहरी के नरेंद्र नगर स्थित राजदरबार में पंचांग गणना के बाद कपाट खोलने की तिथि और मुहूर्त निश्चित किया जाता है। इस घोषणा के साथ ही गाडू घड़ा (तेल कलश) की तैयारी भी शुरू हो जाती है। राजपरिवार की सुहागिन महिलाएं पारंपरिक रूप से तिलों का तेल निकालती हैं, जिसे बाद में एक कलश में भरकर एक भव्य शोभायात्रा के साथ बदरीनाथ धाम पहुंचाया जाता है। कपाट खुलने के दिन इसी पवित्र तेल से भगवान बदरी विशाल का अभिषेक किया जाता है और मंदिर में अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित की जाती है।
इस साल की चारधाम यात्रा के लिए तीर्थयात्रियों में भारी उत्साह है और बड़ी संख्या में पंजीकरण हो चुके हैं। प्रशासन ने यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक प्रबंध किए हैं। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले उत्तराखंड के मौसम और स्वास्थ्य संबंधी दिशानिर्देशों की जानकारी अवश्य ले लें। सप्त बदरी की यात्रा का यह अवसर तीर्थयात्रियों को भगवान विष्णु के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन करने और इस पवित्र क्षेत्र की आध्यात्मिक गहराई को अनुभव करने का एक दुर्लभ मौका प्रदान करता है।
Source: jagran