पिंजौर-बद्दी फोरलेन सड़क निर्माण कार्य लटका, कारोबार पर असर और जनता परेशान, केंद्र सरकार तक पहुंचा मामला
17 अप्रैल 2026
शिवालिक विकास मंच के विजय बंसल ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को ज्ञापन भेजकर पिंजौर-बद्दी फोरलेन सड़क निर्माण में देरी पर चिंता जताई है। यह 38 किलोमीटर की परियोजना आठ साल से लंबित है। इससे हिमाचल और हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं। खराब सड़क से यातायात जाम, दुर्घटनाएं और आर्थिक नुकसान हो रहा है। बंसल ने जल्द काम पूरा न होने पर अदालत जाने की चेतावनी दी है।
एशिया के एक महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र, बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) को हरियाणा से जोड़ने वाली पिंजौर-बद्दी फोरलेन सड़क परियोजना का निर्माण कार्य आठ वर्षों से अधिक समय से अधर में लटका हुआ है। इस देरी के कारण न केवल औद्योगिक गतिविधियों पर गंभीर असर पड़ रहा है, बल्कि आम जनता को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते यह मामला अब केंद्र सरकार तक पहुंच गया है।
लगभग 38 किलोमीटर लंबी इस महत्वपूर्ण सड़क परियोजना का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक केंद्र को हरियाणा, चंडीगढ़ और देश के अन्य हिस्सों से बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करना है। यह क्षेत्र, जिसे हिमाचल प्रदेश की वित्तीय राजधानी भी कहा जाता है, में 2000 से अधिक उद्योग संचालित हैं और यहाँ से प्रतिदिन हजारों वाहन गुजरते हैं। अप्रैल 2022 में शुरू हुए इस फोरलेन निर्माण को सितंबर 2024 तक पूरा किया जाना था, लेकिन अब तक केवल 18 किलोमीटर सड़क ही बन पाई है। शेष हिस्से के लिए टेंडर प्रक्रिया बार-बार स्थगित होती रही है, जिससे निर्माण कार्य पूरी तरह से ठप पड़ा है।
परियोजना में देरी का एक बड़ा कारण पिछली निर्माण एजेंसी द्वारा लगभग 40 प्रतिशत काम पूरा करने के बाद जुलाई 2025 में काम छोड़ देना है। इसके बाद, नए टेंडर जारी करने की प्रक्रिया भी उलझ गई है। परियोजना की लागत भी लगभग 556 करोड़ रुपये से बढ़कर 670 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, और इस बढ़ी हुई लागत को प्रशासनिक मंजूरी न मिल पाना भी टेंडर प्रक्रिया में बार-बार हो रही देरी का एक प्रमुख कारण बताया जा रहा है। शिवालिक विकास मंच और बीबीएन उद्योग संघ जैसे कई स्थानीय और औद्योगिक संगठनों ने इस मामले को केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के संज्ञान में लाया है और जल्द हस्तक्षेप की मांग की है।
सड़क निर्माण में हो रही इस असाधारण देरी का खामियाजा पूरे क्षेत्र को भुगतना पड़ रहा है। मौजूदा टूटी-फूटी और गड्ढों से भरी सड़क पर वाहनों की गति धीमी हो गई है, जिससे कई किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम अब एक आम बात बन गई है। जो सफर पहले 40 मिनट में पूरा होता था, अब उसमें एक घंटे से भी अधिक समय लग रहा है। इससे न केवल उद्योगों के लिए कच्चे माल और तैयार उत्पादों के परिवहन में देरी हो रही है, बल्कि स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों और दैनिक यात्रियों का समय और पैसा भी बर्बाद हो रहा है। बरसात के मौसम में गड्ढों में पानी भर जाने से स्थिति और भी भयावह हो जाती है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय सांसद सुरेश कश्यप ने इस मुद्दे को संसद में भी उठाया है। सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया है कि स्थिति को सुधारने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। आगामी मानसून को देखते हुए सड़क की तत्काल मरम्मत के लिए 15 करोड़ रुपये का एक अलग टेंडर जारी किया जा रहा है। वहीं, अटके हुए मुख्य निर्माण कार्य के लिए नए टेंडर की प्रक्रिया भी जारी है, जिसकी अगली तारीख 24 अप्रैल, 2026 निर्धारित की गई है। यदि यह प्रक्रिया सफल रहती है, तो रुकी हुई परियोजना को फिर से गति मिल सकती है, जिससे परेशान उद्योगपतियों और लाखों नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
Source: jagran