फर्जी खबर-भड़काऊ फोटो या वीडियो शेयर की तो खैर नहीं, 7 साल तक की सजा तय; जम्मू प्रशासन ने दी चेतावनी

17 अप्रैल 2026

फर्जी खबर-भड़काऊ फोटो या वीडियो शेयर की तो खैर नहीं, 7 साल तक की सजा तय; जम्मू प्रशासन ने दी चेतावनी

जम्मू जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए सोशल मीडिया पर भड़काऊ और भ्रामक सामग्री के प्रसार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। जिला मजिस्ट्रेट डॉ. राकेश मिन्हास द्वारा जारी आदेश के अनुसार, उल्लंघन करने पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत 3 से 7 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।

जम्मू जिला प्रशासन ने सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रशासन ने फर्जी खबरों, भड़काऊ तस्वीरों या वीडियो को साझा करने पर कड़ा रुख अपनाते हुए कठोर चेतावनी जारी की है। इस आदेश के तहत, कोई भी व्यक्ति यदि सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट या फॉरवर्ड करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें सात साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है। यह कदम क्षेत्र में शांति और कानून-व्यवस्था को भंग करने के किसी भी प्रयास को विफल करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

जिला मजिस्ट्रेट डॉ. राकेश मिन्हास ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किया है। इस आदेश में व्हाट्सएप, फेसबुक, एक्स (ट्विटर) और इंस्टाग्राम जैसे सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म शामिल हैं। प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि हाल के दिनों में इन मंचों का उपयोग झूठी और भड़काऊ सामग्री फैलाने के लिए किया जा रहा है, जिससे सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुँचने और तनाव उत्पन्न होने का खतरा बढ़ गया है। जम्मू, जो विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों का संगम है, में शांति बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

इस चेतावनी के पीछे एक मजबूत कानूनी ढांचा है। भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत भ्रामक या घृणा फैलाने वाली सामग्री का प्रसार एक गंभीर अपराध है। उदाहरण के लिए, आईपीसी की धारा 153ए धर्म, जाति या समुदाय के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने पर लागू होती है। इसी तरह, आईटी अधिनियम की धाराएं ऑनलाइन आपत्तिजनक सामग्री को पोस्ट करने और साझा करने को दंडनीय बनाती हैं। सात साल तक की सजा का प्रावधान अपराध की गंभीरता को दर्शाता है, विशेषकर जब इसका उद्देश्य दंगा भड़काना या सार्वजनिक शांति भंग करना हो।

इस आदेश के तहत, न केवल सामग्री बनाने वाले, बल्कि उसे आगे फॉरवर्ड करने वाले व्यक्ति भी समान रूप से उत्तरदायी होंगे। सोशल मीडिया ग्रुप्स के एडमिन की भी यह जिम्मेदारी तय की गई है कि वे अपने ग्रुप में किसी भी प्रकार की अवैध या भड़काऊ सामग्री को प्रसारित होने से रोकें। ऐसा करने में विफल रहने पर उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध या अपुष्ट जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें और ऐसी कोई भी सामग्री सामने आने पर तुरंत पुलिस या साइबर क्राइम यूनिट को सूचित करें।

प्रशासन के इस कदम का उद्देश्य डिजिटल स्पेस को सुरक्षित बनाना और नागरिकों को उनकी डिजिटल जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना है। आने वाले दिनों में, पुलिस और साइबर सेल द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कड़ी निगरानी रखे जाने की उम्मीद है। यह कदम एक स्पष्ट संदेश देता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में नफरत और गलत सूचना फैलाने वालों के साथ सख्ती से निपटा जाएगा। इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सोशल मीडिया का उपयोग समाज को जोड़ने के लिए हो, न कि तोड़ने के लिए।

Source: jagran

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The World Dispatch

Source: World News API