बिहार में 19 नए केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना का रास्ता साफ, मुख्य सचिव ने दिए निर्देश
17 अप्रैल 2026
बिहार में 19 नए केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना प्रक्रिया तेज हो गई है। मुख्य सचिव ने समीक्षा बैठक कर संबंधित विभागों को लंबित कार्य जल्द पूरे करने के निर्देश दिए। कई जिलों में भूमि चिन्हित है, पर अनापत्ति प्रमाण पत्र और अतिक्रमण जैसी बाधाएं हैं।
बिहार में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने लंबे समय से प्रस्तावित 19 नए केंद्रीय विद्यालयों (केवी) की स्थापना प्रक्रिया में तेजी लाने का फैसला किया है। इस संबंध में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में हुई एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद, सभी संबंधित विभागों और जिलाधिकारियों को परियोजना की राह में आ रही बाधाओं को प्राथमिकता पर दूर करने के लिए सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
केंद्रीय विद्यालय संगठन की एक रिपोर्ट के बाद यह बैठक बुलाई गई थी, जिसमें कई जिलों में भूमि चयन के बावजूद प्रक्रिया के अटके होने की बात सामने आई थी। इन नए विद्यालयों की स्थापना का प्रस्ताव कई वर्षों से लंबित था। मुख्य बाधाओं में विभिन्न विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मिलने में देरी, चयनित भूमि पर अतिक्रमण और भूमि हस्तांतरण की धीमी प्रक्रिया शामिल है। सरकार का लक्ष्य इन सभी प्रशासनिक और तकनीकी औपचारिकताओं को जल्द से जल्द पूरा करना है, ताकि इन नए विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र बिना किसी और विलंब के शुरू हो सके।
मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिया है कि वे अपने-अपने जिलों में विद्यालय के लिए चिह्नित भूमि से अतिक्रमण हटवाएं और भूमि हस्तांतरण या लीज डीड की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करें। जिन जिलों में भूमि की पहचान हो चुकी है उनमें पटना (वाल्मी), गया (बोधगया), कटिहार और दरभंगा (एम्स के निकट) शामिल हैं, जबकि भोजपुर और पूर्णिया जैसे जिलों में अतिक्रमण एक बड़ी समस्या बनी हुई है। इसके अलावा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे विभागों को भी निर्देश दिया गया है कि वे बिना देरी किए एनओसी जारी करें ताकि निर्माण कार्य आगे बढ़ सके।
केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना केंद्र और राज्य सरकार के बीच एक सहयोगात्मक प्रयास होता है। इस प्रक्रिया के तहत, राज्य सरकार नि:शुल्क भूमि और शैक्षणिक सत्र शुरू करने के लिए एक अस्थायी भवन उपलब्ध कराती है। इसके बाद, भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत केंद्रीय विद्यालय संगठन स्थायी भवन के निर्माण, वित्त पोषण और स्कूल के संपूर्ण संचालन की जिम्मेदारी लेता है। मुख्य सचिव ने यह भी निर्देश दिया है कि जब तक स्थायी भवनों का निर्माण पूरा नहीं हो जाता, तब तक अस्थायी रूप से चयनित भवनों की मरम्मत और रखरखाव का काम तुरंत शुरू किया जाए।
इन 19 नए केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना से बिहार के शैक्षिक परिदृश्य पर दूरगामी और सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। इससे न केवल हजारों छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर मिलेंगे, बल्कि मौजूदा स्कूलों पर पड़ रहा दबाव भी कम होगा। यह कदम ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में शैक्षिक सुविधाओं का विस्तार करेगा और राज्य के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासनों द्वारा इन निर्देशों के त्वरित कार्यान्वयन पर टिकी हैं, जिससे बिहार के हजारों बच्चों का भविष्य संवर सकता है।
Source: jagran