जनगणना 2027: स्व-गणना की प्रक्रिया शुरू, घर बैठे भरें अपनी जानकारी; यहां देखें पूरा प्रोसेस
17 अप्रैल 2026
भारत सरकार की जनगणना-2027 के तहत अब नागरिक घर बैठे 'स्व-गणना' कर सकेंगे। गया में अपर समाहर्ता कुमार पंकज ने बताया कि यह ऑनलाइन प्रक्रिया सुरक्षित और गोपनीय रहेगी। बिहार विधानसभा अध्यक्ष सहित 1209 लोगों ने पोर्टल पर पंजीकरण कर अभियान की शुरुआत की।
भारत की जनगणना 2027 की प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गई है, जिसमें पहली बार नागरिकों को अपनी जानकारी स्वयं ऑनलाइन दर्ज करने की सुविधा प्रदान की गई है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक कवायद को अधिक सरल, तेज और सटीक बनाना है। नागरिक अब एक समर्पित वेब पोर्टल के माध्यम से घर बैठे ही अपने परिवार का विवरण दर्ज कर सकते हैं, जिससे जनगणना की पारंपरिक प्रक्रिया में एक क्रांतिकारी बदलाव आया है। यह कदम न केवल नागरिकों के लिए सुविधाजनक है, बल्कि इससे जनगणना के आंकड़ों की गुणवत्ता में भी सुधार की उम्मीद है।
यह ऐतिहासिक कदम दशकों से चली आ रही जनगणना प्रक्रिया के विकास का प्रतीक है। भारत में जनगणना हर दस साल में होती रही है, और यह देश की सामाजिक-आर्थिक नीतियों के निर्माण का एक महत्वपूर्ण आधार है। कोविड-19 महामारी के कारण 2021 में प्रस्तावित जनगणना को स्थगित करना पड़ा था, जिससे नवीनतम आंकड़ों की आवश्यकता और भी बढ़ गई थी। अब, 2027 की जनगणना को पूरी तरह से डिजिटल रूप में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें स्व-गणना एक प्रमुख विशेषता है। इस पहल से न केवल पूरी प्रक्रिया में लगने वाला समय कम होगा, बल्कि यह सरकार को एक अधिक गतिशील और सटीक डेटासेट भी प्रदान करेगा।
स्व-गणना की प्रक्रिया को काफी सरल बनाया गया है। नागरिकों को जनगणना पोर्टल पर अपने मोबाइल नंबर के साथ पंजीकरण करना होगा, जिसके बाद वे अपने घर और परिवार के सदस्यों से संबंधित जानकारी भर सकते हैं। इस प्रश्नावली में घर की स्थिति, उपलब्ध सुविधाएं, परिवार के सदस्यों की जनसांख्यिकीय, सामाजिक और आर्थिक जानकारी जैसे लगभग 33 प्रश्न शामिल हैं। यह पूरी प्रक्रिया हिंदी, अंग्रेजी सहित कई क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। एक बार जानकारी जमा करने के बाद, एक विशिष्ट पहचान संख्या उत्पन्न होती है, जिसे बाद में आने वाले प्रगणक (जनगणना कर्मचारी) के साथ सत्यापन के लिए साझा किया जा सकता है।
इस डिजिटल दृष्टिकोण के कई गहरे निहितार्थ हैं। सरकार और नीति निर्माताओं के लिए, यह जनगणना देश के विकास की योजनाओं, संसाधनों के आवंटन और कल्याणकारी कार्यक्रमों को सही दिशा देने के लिए एक ठोस आधार प्रदान करेगी। सटीक आंकड़ों से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास की बेहतर योजना बनाने, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को लक्षित करने तथा सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। हालांकि, डिजिटल साक्षरता और इंटरनेट की पहुंच जैसी चुनौतियां भी मौजूद हैं, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में। इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार ने एक हाइब्रिड मॉडल अपनाया है, जिसमें स्व-गणना के साथ-साथ प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर पारंपरिक सर्वेक्षण भी जारी रहेगा।
आगे बढ़ते हुए, स्व-गणना के लिए निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद, जनगणना कर्मचारी उन घरों का दौरा करेंगे जिन्होंने ऑनलाइन जानकारी दर्ज नहीं की है या जिनके डेटा में सत्यापन की आवश्यकता है। यह सुनिश्चित करेगा कि देश के हर नागरिक की गणना हो। नागरिकों द्वारा प्रदान की गई सभी जानकारी को गोपनीय रखा जाएगा और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। यह डिजिटल जनगणना भारत को एक डेटा-संचालित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य के विकास और सुशासन की नींव रखेगा।
Source: jagran