Tax Slab बढ़ने का असर: बिहार-झारखंड में घटा टैक्स कलेक्शन, वेतनभोगी बने सबसे बड़े करदाता
17 अप्रैल 2026
Bihar-Jharkhand Tax Collection Drops: बिहार-झारखंड में आयकर संग्रह में गिरावट दर्ज की गई है, जिसका मुख्य कारण टैक्स स्लैब में वृद्धि है। वित्त वर्ष 2025-26 में शुद्ध संग्रह 17,580 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष से कम है।
नई कर व्यवस्था लागू होने के बाद से आयकर संग्रह पर इसके प्रभाव को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। हाल ही में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 के बाद बिहार और झारखंड के आयकर संग्रह के आंकड़े एक नई तस्वीर पेश कर रहे हैं। इन आंकड़ों के अनुसार, कर स्लैब में बदलाव और नई कर व्यवस्था को डिफ़ॉल्ट बनाने का असर राजस्व पर पड़ा है, जिससे इस क्षेत्र के कुल टैक्स कलेक्शन में कमी दर्ज की गई है। साथ ही, यह भी सामने आया है कि वेतनभोगी वर्ग इस क्षेत्र में सबसे बड़ा और सबसे ईमानदार करदाता समूह बनकर उभरा है।
आयकर विभाग, बिहार-झारखंड क्षेत्र के हालिया आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में शुद्ध कर संग्रह 17,580 करोड़ रुपये रहा। यह पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 के सकल संग्रह 26,470 करोड़ रुपये और शुद्ध संग्रह 18,780 करोड़ रुपये के मुकाबले कम है। इस गिरावट का एक मुख्य कारण नई आयकर व्यवस्था है, जिसमें करदाताओं को सात लाख रुपये तक की आय पर छूट का प्रावधान है। इस व्यवस्था के कारण बड़ी संख्या में करदाता, विशेषकर निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोग, कर के दायरे से बाहर हो गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि कुल कर संग्रह का लगभग 75% हिस्सा स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) से आया है, जिसमें सबसे बड़ा योगदान वेतनभोगी कर्मचारियों का रहा है।
इस प्रवृत्ति के पीछे कई कारण हैं। सरकार ने कर प्रणाली को सरल बनाने और छोटे करदाताओं को राहत देने के उद्देश्य से नई कर व्यवस्था को बढ़ावा दिया है। इस व्यवस्था में कई कटौतियों और छूटों को खत्म कर दिया गया है, लेकिन कम आय वालों के लिए यह फायदेमंद साबित हुई है। बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में जहां वेतनभोगी और कम आय वाले लोगों की संख्या अधिक है, वहां इस बदलाव का सीधा असर कर संग्रह पर दिख रहा है। दूसरी ओर, वेतनभोगी कर्मचारियों का वेतन सीधे उनके बैंक खातों में आता है और नियोक्ता द्वारा टीडीएस काट लिया जाता है, जिससे उनकी आय का हिसाब-किताब पारदर्शी रहता है और कर चोरी की गुंजाइश कम होती है। इसके विपरीत, गैर-वेतनभोगी पेशेवरों और व्यापारियों के लिए आय के सभी स्रोतों का सटीक आकलन करना और उन पर कर लगाना विभाग के लिए एक चुनौती बनी हुई है।
इस बदलते परिदृश्य के कई महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं। एक ओर जहां कर संग्रह में कमी केंद्र और राज्य सरकारों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे विकास परियोजनाओं के वित्तपोषण पर असर पड़ सकता है, वहीं दूसरी ओर यह कर के बोझ के असंतुलन को भी उजागर करता है। यह स्पष्ट है कि वेतनभोगी वर्ग पर कर का बोझ आनुपातिक रूप से अधिक है। यह स्थिति कर नीति निर्माताओं के लिए एक संकेत है कि कर आधार को व्यापक बनाने और गैर-वेतनभोगी वर्ग से कर अनुपालन बढ़ाने के लिए और अधिक प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।
भविष्य में, आयकर विभाग द्वारा कर के दायरे को बढ़ाने के लिए प्रयास तेज किए जाने की संभावना है। इसमें उन क्षेत्रों और लोगों पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है जो अब तक कर के दायरे से बाहर हैं या अपनी आय को कम करके दिखा रहे हैं। विभाग तकनीक और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करके ऐसे लोगों की पहचान करने में अधिक सक्षम हो रहा है। बिहार-झारखंड के प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त ने भी इस बात पर जोर दिया है कि करदाताओं की संख्या बढ़ाना समग्र विकास के लिए आवश्यक है। साथ ही, 1 अप्रैल, 2026 से एक नया, सरल आयकर अधिनियम भी लागू होने वाला है, जिसका उद्देश्य करदाताओं के लिए कानूनों को और स्पष्ट करना है। इन सभी कदमों का उद्देश्य भविष्य में एक अधिक संतुलित और प्रभावी कर प्रणाली स्थापित करना है।
Source: jagran