मिथिला विश्वविद्यालय में बड़े मंथन की तैयारी, देशभर के विद्वान जुटेंगे, 22 से शुरू होगा राष्ट्रीय सम्मेलन
17 अप्रैल 2026
मिथिला विश्वविद्यालय में 22 से 26 अप्रैल तक 'समकालीन समय में व्यावसायिक अनुसंधान' पर पांच दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन होगा। बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सय्यद अता हसनैन इसका उद्घाटन करेंगे। देश भर से 300 से अधिक विद्वान भाग लेंगे।
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा, एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन के लिए पूरी तरह से तैयार है, जिसमें देशभर के विद्वान और शोधकर्ता अकादमिक विमर्श के लिए एकत्रित होंगे। आगामी 22 अप्रैल से शुरू होने वाला यह पांच दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन विश्वविद्यालय के वाणिज्य एवं व्यवसाय प्रशासन विभाग के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। इस प्रतिष्ठित आयोजन का उद्घाटन बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन द्वारा नरगौना स्थित जुबली हॉल में किया जाएगा। यह सम्मेलन विश्वविद्यालय में अकादमिक और शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
सम्मेलन का मुख्य विषय 'समकालीन समय में व्यावसायिक अनुसंधान' रखा गया है, जो वर्तमान दौर की चुनौतियों और अवसरों को समझने का एक प्रयास है। इस पांच दिवसीय अकादमिक मंथन में देश के विभिन्न प्रांतों से 300 से अधिक विद्वानों, शोधार्थियों और छात्रों के शामिल होने की उम्मीद है। आयोजन के लिए अब तक 250 से अधिक प्रतिभागियों ने अपना पंजीकरण करा लिया है, जिनमें वाणिज्य, प्रबंधन, अर्थशास्त्र और सामाजिक विज्ञान के शिक्षक और शोधार्थी शामिल हैं। यह आयोजन न केवल मिथिला क्षेत्र बल्कि पूरे बिहार के अकादमिक जगत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा, जहाँ नए विचारों का आदान-प्रदान होगा।
इस राष्ट्रीय सम्मेलन में कई सत्रों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें उद्घाटन और समापन सत्र के अतिरिक्त पांच तकनीकी सत्र भी शामिल होंगे। इन सत्रों में सतत विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का प्रयोग, स्मार्ट इकोसिस्टम, नीति निर्माण, समग्र शोध-विधि और नवाचार के लिए वातावरण निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श होगा। सम्मेलन का उद्देश्य वाणिज्य संकाय में शोध के माहौल को और बेहतर बनाना है, विशेषकर तब जब विश्वविद्यालय को मेरू (मल्टीडिसीplinरी एजुकेशन एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी) का दर्जा प्राप्त हुआ है, जिससे संस्थान का क्रियाकलाप शोध केंद्रित हो रहा है।
सम्मेलन में देश के कई जाने-माने शिक्षाविद और विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। विशिष्ट अतिथि के तौर पर पूर्व कुलपति प्रोफेसर एन.सी. गौतम और प्रोफेसर एन.के. यादव 'इंदु' शामिल होंगे। इसके अलावा, मोतिहारी केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर संजय श्रीवास्तव, पूर्व कुलपति प्रोफेसर एच.के. सिंह और प्रोफेसर नीलिमा गुप्ता जैसे कई विद्वान संसाधन पुरुष के रूप में सम्मेलन को संबोधित करेंगे। कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी के मुख्य संरक्षण और वाणिज्य संकायाध्यक्ष प्रोफेसर एच.के. सिंह के मार्गदर्शन में आयोजन की सभी तैयारियां समय पर और सुचारू रूप से चल रही हैं।
इस बड़े आयोजन को सफल बनाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने युद्ध स्तर पर तैयारियां की हैं। आयोजन समिति, स्वागत समिति, तकनीकी समिति, और आवास एवं यातायात जैसी कई समितियों का गठन किया गया है जो अपने-अपने कार्यों में जुटी हुई हैं। यह सम्मेलन न केवल विश्वविद्यालय के अकादमिक कैलेंडर की एक महत्वपूर्ण घटना है, बल्कि यह इस क्षेत्र में उच्च शिक्षा और अनुसंधान के भविष्य के लिए एक नई दिशा तय करने की क्षमता भी रखता है। इससे छात्रों और शिक्षकों को राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों से जुड़ने और नवीनतम शोध प्रवृत्तियों को समझने का एक अनूठा अवसर मिलेगा।
Source: jagran