KDA की एयरो सिटी योजना से पहले बिल्डरों का खेल, चकेरी में धड़ल्ले से बेचे जा रहे अवैध प्लॉट
17 अप्रैल 2026
कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) चकेरी में एयरो सिटी और एयरपोर्ट विस्तार की योजना बना रहा है। इस बीच, बिल्डर इन परियोजनाओं का हवाला देकर अवैध प्लाटिंग कर जमीन बेच रहे हैं, जिससे खरीदार फंस रहे हैं।
कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) की महत्वाकांक्षी एयरो सिटी योजना की औपचारिक घोषणा से पहले ही चकेरी क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। कई बिल्डर और डेवलपर इस प्रस्तावित योजना की चर्चा का लाभ उठाकर किसानों से सीधे जमीन खरीद रहे हैं और बिना किसी मंजूरी के अवैध रूप से प्लॉट काटकर बेच रहे हैं। यह स्थिति उन हजारों लोगों के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर रही है जो एक नियोजित टाउनशिप में अपने घर का सपना देख रहे हैं, क्योंकि वे अनजाने में अपनी जीवन भर की जमा-पूंजी को एक अवैध सौदे में फंसा सकते हैं।
केडीए की एयरो सिटी योजना को चकेरी हवाई अड्डे के पास एक बड़े भूभाग पर विकसित करने का प्रस्ताव है। इस योजना का उद्देश्य एक आधुनिक और विश्व स्तरीय टाउनशिप का निर्माण करना है, जिसमें आवासीय भूखंडों के साथ-साथ होटल, रिसॉर्ट्स, शॉपिंग मॉल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां भी शामिल होंगी। एयरपोर्ट के विस्तार और बेहतर कनेक्टिविटी की संभावनाओं के कारण यह क्षेत्र निवेशकों और घर खरीदारों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। इसी प्रचार का फायदा उठाकर अवैध कॉलोनाइजर सक्रिय हो गए हैं और लोगों को सुनहरे सपने दिखाकर गुमराह कर रहे हैं।
इन अवैध कॉलोनियों को विकसित करने का तरीका बेहद चिंताजनक है। डेवलपर कृषि भूमि को खरीदकर बिना ले-आउट पास कराए और बिना रेरा पंजीकरण के मनमाने ढंग से छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट रहे हैं। इन कॉलोनियों में सड़क, जल निकासी, सीवर, पार्क या बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए कोई प्रावधान नहीं किया जाता है। खरीदारों को सिर्फ एक कागज के टुकड़े पर प्लॉट का कब्जा दिया जा रहा है, जिसकी कानूनी वैधता शून्य के बराबर है। यह स्थिति न केवल शहर के अनियोजित विकास को बढ़ावा दे रही है, बल्कि भविष्य में इन क्षेत्रों को अविकसित बस्तियों में तब्दील करने का खतरा भी पैदा कर रही है।
ऐसे अवैध भूखंडों में निवेश करने वाले खरीदारों को गंभीर वित्तीय और कानूनी जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। चूंकि ये कॉलोनियां केडीए द्वारा अनुमोदित नहीं हैं, इसलिए इन पर किया गया कोई भी निर्माण पूरी तरह से अवैध माना जाएगा। प्राधिकरण को ऐसे निर्माणों को बिना किसी मुआवजे के ध्वस्त करने का पूरा अधिकार है। इसके अतिरिक्त, इन संपत्तियों पर किसी भी राष्ट्रीयकृत या निजी बैंक से ऋण प्राप्त करना असंभव है, जिससे खरीदार पूरी तरह से अपनी बचत पर निर्भर हो जाते हैं और धोखाधड़ी की स्थिति में उनके पास कोई सुरक्षा नहीं बचती।
इस अवैध कारोबार पर संज्ञान लेते हुए कानपुर विकास प्राधिकरण ने सख्त रुख अपनाने की तैयारी कर ली है। प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, बिना ले-आउट के हो रही प्लॉटिंग के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है और ऐसे अवैध निर्माणों को गिराया जाएगा। केडीए ने जनता से भी अपील की है कि वे चकेरी क्षेत्र में किसी भी डेवलपर या बिल्डर से जमीन खरीदने से पहले पूरी तरह से सतर्क रहें। किसी भी सौदे को अंतिम रूप देने से पहले, खरीदारों को सीधे केडीए कार्यालय से संपर्क करके योजना की वैधता और संबंधित दस्तावेजों की जांच अवश्य करनी चाहिए। केवल प्राधिकरण द्वारा आधिकारिक तौर पर शुरू की गई योजना में निवेश करना ही सुरक्षित और कानूनी रूप से सही कदम होगा।
Source: jagran