यूपी में 3 से 6 साल के बच्चों के लिए बदला पढ़ाई का तरीका, बालवाटिका का नया पाठ्यक्रम लागू
17 अप्रैल 2026
उत्तर प्रदेश में 3-6 वर्ष के बच्चों के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप नया बालवाटिका पाठ्यक्रम लागू किया गया है।
उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप छोटे बच्चों की शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। प्रदेश सरकार ने तीन से छह वर्ष की आयु के बच्चों के लिए 'बालवाटिका' का नया पाठ्यक्रम लागू कर दिया है, जिसका उद्देश्य प्रारंभिक शिक्षा को अधिक प्रभावी और रोचक बनाना है। यह कदम बच्चों के भविष्य की नींव को मजबूत करने की दिशा में एक अहम प्रयास है, जो पारंपरिक आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी स्कूलों के रूप में विकसित करेगा।
इस नए पाठ्यक्रम की सबसे खास बात यह है कि इसे भारतीय ज्ञान परंपरा के 'पंचकोश' सिद्धांत पर आधारित किया गया है। इस अवधारणा के तहत, बच्चों के समग्र विकास के लिए पांच आयामों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसमें अन्नमय कोष को शारीरिक विकास से, प्राणमय कोष को सामाजिक-भावनात्मक एवं नैतिक विकास से, मनोमय कोष को भाषा एवं साक्षरता से, विज्ञानमय कोष को संज्ञानात्मक विकास से और आनंदमय कोष को सौंदर्यबोध एवं रचनात्मक विकास से जोड़ा गया है। यह ढांचा सुनिश्चित करेगा कि बच्चों का केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास भी हो।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने इस पाठ्यक्रम को जमीन पर उतारने के लिए विशेष शिक्षण सामग्री तैयार की है। 'चहक', 'कदम' और 'कलांकुर' जैसे नामों से वर्कबुक, गतिविधि पुस्तिकाएं, चित्र कथाएं और संख्या ज्ञान पर आधारित सामग्री विकसित की गई है। इस नई व्यवस्था में खेल, कहानी, संवाद और समूह गतिविधियों के माध्यम से सीखने पर जोर दिया गया है, ताकि बच्चों पर पढ़ाई का बोझ न पड़े और वे खेल-खेल में ही जरूरी कौशल सीख सकें। यह पद्धति बच्चों को अनुभव आधारित और समग्र शिक्षा प्रदान करने पर केंद्रित है।
यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का एक अभिन्न अंग है, जो तीन से आठ वर्ष की आयु को सीखने के मूलभूत चरण के रूप में देखती है। इसके तहत, प्रदेश भर के आंगनबाड़ी केंद्रों को अब केवल पोषण और देखभाल तक सीमित न रखकर, उन्हें 'बालवाटिका' नामक प्री-स्कूल क्लासरूम के रूप में बदला जा रहा है। इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि जब बच्चे कक्षा एक में प्रवेश करें, तो वे पहले से ही एक मजबूत शैक्षिक आधार के साथ तैयार हों। इस प्रक्रिया में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों के बीच सामंजस्य स्थापित करने पर भी जोर दिया गया है।
इस नई पहल के सफल कार्यान्वयन के लिए शिक्षकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से इस व्यवस्था को प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीवन के शुरुआती वर्षों में मिली सही शिक्षा बच्चों की भविष्य की क्षमताओं को निर्धारित करती है। यह नया बालवाटिका पाठ्यक्रम इसी सोच को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे आने वाली पीढ़ी अधिक सक्षम, संवेदनशील और सृजनशील नागरिक बन सकेगी।
Source: jagran