नेपाल में भारतीय वाहनों के लिए नए नियम लागू, PM बालेन शाह ने लिया एक और बड़ा फैसला
17 अप्रैल 2026
नेपाल सरकार ने भारतीय नंबर प्लेट वाले वाहनों के लिए नए, सख्त नियम लागू किए हैं। अब नेपाल में प्रवेश से पहले भंसार अनुमति और दैनिक शुल्क अनिवार्य है। दोपहिया के लिए ₹100, तीनपहिया के लिए ₹400 और चारपहिया के लिए ₹600 प्रतिदिन शुल्क है।
नेपाल सरकार ने भारतीय नंबर प्लेट वाले वाहनों के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं, जिससे सीमा पार आवागमन करने वाले पर्यटकों और व्यापारियों के लिए अब नियमों का पालन अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व में लिए गए इस फैसले का उद्देश्य सीमा पार यातायात को व्यवस्थित करना और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण स्थापित करना है। इन नए और सख्त नियमों के तहत, अब किसी भी भारतीय वाहन को नेपाल में प्रवेश करने से पहले भंसार (कस्टम) अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य होगा। बिना वैध अनुमति के भारतीय वाहनों का परिचालन अब गैर-कानूनी माना जाएगा और उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ वाहन को जब्त भी किया जा सकता है।
सरकार ने नेपाल में प्रवेश करने वाले भारतीय वाहनों के लिए एक दैनिक शुल्क प्रणाली भी शुरू की है। इस प्रणाली के तहत, दोपहिया वाहनों के लिए प्रतिदिन 100 रुपये, तिपहिया वाहनों के लिए 400 रुपये और कार या जीप जैसे चार पहिया वाहनों के लिए 600 रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया है। यह शुल्क भंसार कार्यालय में जमा करने के बाद ही वाहनों को देश में प्रवेश की अनुमति मिलेगी। इन वित्तीय szabályozások के अलावा, सरकार ने नेपाल में भारतीय वाहनों के रुकने की अवधि को भी सीमित कर दिया है। नए प्रावधानों के अनुसार, कोई भी विदेशी वाहन एक वित्तीय वर्ष में कुल मिलाकर अधिकतम 30 दिनों तक ही नेपाल में रह सकता है, चाहे यह अवधि लगातार हो या अलग-अलग समय में पूरी की गई हो।
इन नियमों को सख्ती से लागू करने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि बड़ी संख्या में भारतीय नंबर प्लेट वाली गाड़ियां बिना किसी अनुमति या कर चुकाए नेपाल में चल रही थीं, जिससे राजस्व का नुकसान हो रहा था। मधेश प्रांत जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में हजारों ऐसे वाहन होने का अनुमान है, जिन्हें अक्सर लोग अधिक कस्टम ड्यूटी से बचने के लिए खरीदते हैं। इसके अलावा, इन वाहनों का इस्तेमाल चोरी और तस्करी जैसी आपराधिक गतिविधियों में भी किए जाने की खबरें थीं, जिन्हें ट्रैक करना मुश्किल होता था। सरकार का यह भी तर्क है कि इस कदम से स्थानीय व्यापार को संरक्षण मिलेगा, क्योंकि सीमावर्ती नेपाली नागरिक अक्सर सस्ता सामान खरीदने के लिए भारतीय बाजारों का रुख करते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है।
प्रधानमंत्री बालेन शाह, जो हाल ही में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत जनादेश के साथ सत्ता में आए हैं, ने व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के कई प्रयास किए हैं। वाहनों पर नियंत्रण इसी दिशा में एक और बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, इस फैसले का नेपाल के भीतर भी विरोध हो रहा है। मधेश प्रांत के कई राजनीतिक दलों ने इन नियमों का विरोध करते हुए कहा है कि इससे दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सामाजिक और पारिवारिक संबंधों पर असर पड़ेगा। उन्होंने पहले की तरह सीमा के 30 किलोमीटर के दायरे में वाहनों को स्वतंत्र रूप से आने-जाने की अनुमति देने की मांग की है।
इन नए नियमों का सीधा असर भारत-नेपाल सीमा से जुड़े व्यापार और पर्यटन पर पड़ने की संभावना है। जो भारतीय पर्यटक या व्यापारी अपने वाहनों से नेपाल जाते हैं, उन्हें अब अतिरिक्त वित्तीय भार और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ेगा। वहीं, सीमा के पास स्थित भारतीय बाजारों में भी चिंता बढ़ गई है, क्योंकि वहां नेपाली ग्राहकों की संख्या में कमी आ सकती है। दूसरी ओर, यह उम्मीद की जा रही है कि इन कदमों से नेपाल में यातायात व्यवस्था अधिक संगठित होगी और कर चोरी पर लगाम लगेगी। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन चिंताओं का समाधान कैसे करती है और इन नियमों का जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी कार्यान्वयन हो पाता है।
Source: jagran