यूपी पुलिस बनेगी 'हाई-टेक', योगी सरकार तैयार कर रही 500 क्राइम सीन एक्सपर्ट; अपराधियों के लिए बिछा जाल

17 अप्रैल 2026

यूपी पुलिस बनेगी 'हाई-टेक', योगी सरकार तैयार कर रही 500 क्राइम सीन एक्सपर्ट; अपराधियों के लिए बिछा जाल

उत्तर प्रदेश पुलिस अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'जीरो टॉलरेंस' विजन के तहत अपराधियों पर वैज्ञानिक तरीके से शिकंजा कसेगी। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) 500 'क्राइम सीन एक्सपर्ट' तैयार कर रहा है, जिनमें से 300 प्रशिक्षित हो चुके हैं। ये विशेषज्ञ फील्ड में काम करने के साथ-साथ अन्य पुलिसकर्मियों को साइबर फॉरेंसिक और डिजिटल साक्ष्य संरक्षण सिखाएंगे, जिससे जांच प्रक्रिया में क्रांतिकारी सुधार आएगा और अपराधियों को सजा दिलाना आसान होगा।

उत्तर प्रदेश में गंभीर अपराधों की जांच और अपराधियों को सजा दिलाने की दर को बढ़ाने के लिए योगी सरकार पुलिस व्यवस्था के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रही है। इस पहल के केंद्र में वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित जांच को मजबूत करना है, जिसके लिए 500 विशेष प्रशिक्षित क्राइम सीन एक्सपर्ट तैयार किए जा रहे हैं। यह कदम प्रदेश में कानून-व्यवस्था को और सुदृढ़ करने तथा अपराधियों के बीच कानून का भय स्थापित करने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इस योजना का क्रियान्वयन लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस) द्वारा किया जा रहा है।

यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अक्सर वैज्ञानिक और तकनीकी सबूतों के अभाव में अदालतों में आपराधिक मामले कमजोर पड़ जाते हैं, जिसका लाभ उठाकर अपराधी बरी हो जाते हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पुलिस बल को आधुनिक जांच तकनीकों में प्रशिक्षित करने पर जोर दिया जा रहा है। योजना के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों और कमिश्नरेट से पुलिसकर्मियों का चयन कर उन्हें क्राइम सीन मैनेजमेंट का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी अपराध स्थल पर पहुंचने वाले पहले पुलिसकर्मी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने में सक्षम हों ताकि जांच को एक ठोस वैज्ञानिक आधार मिल सके।

पांच चरणों में पूरी होने वाली इस प्रशिक्षण योजना के तहत अब तक 300 विशेषज्ञों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। इन अधिकारियों को अपराध स्थल पर डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों को सुरक्षित करने, साइबर ट्रैकिंग, वैज्ञानिक तरीके से सैंपल इकट्ठा करने और सबूतों के संरक्षण की आधुनिक विधियों में पारंगत किया गया है। प्रशिक्षण का पाठ्यक्रम पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर साइबर फॉरेंसिक, डिजिटल एविडेंस प्रिजर्वेशन और फॉरेंसिक एनालिसिस जैसे उन्नत विषयों पर केंद्रित है, ताकि जांचकर्ता छोटी से छोटी गलती से भी बच सकें। संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी के अनुसार, विशेषज्ञों का चौथा बैच 27 अप्रैल से अपना प्रशिक्षण शुरू करेगा।

इस योजना की एक खास बात यह है कि यूपीएसआईएफएस से प्रशिक्षण प्राप्त ये 500 विशेषज्ञ अपने-अपने जिलों में 'मास्टर ट्रेनर' के रूप में भी कार्य करेंगे। वे अपने कार्यक्षेत्र में कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर स्तर तक के अन्य पुलिसकर्मियों को कार्यशालाओं के माध्यम से आधुनिक जांच की बारीकियां सिखाएंगे। इससे पूरे प्रदेश में फॉरेंसिक पुलिसिंग की एक एकीकृत और मजबूत प्रणाली विकसित होगी, जो जांच की गुणवत्ता को जमीनी स्तर पर सुधारेगी और अपराधियों के बच निकलने की संभावना को न्यूनतम करेगी।

यह कदम उत्तर प्रदेश पुलिस को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने और अपराध नियंत्रण के मामले में राज्य को अग्रणी बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। वैज्ञानिक जांच पर बढ़ता जोर यह सुनिश्चित करेगा कि हर सबूत को प्रभावी ढंग से अदालत में पेश किया जा सके, जिससे न केवल जांच प्रक्रिया मजबूत होगी, बल्कि अपराधियों को सजा दिलाने की दर में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह पहल प्रदेश में फॉरेंसिक-आधारित पुलिसिंग को एक नई दिशा देने के साथ ही न्याय प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होगी।

Source: jagran

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The World Dispatch

Source: World News API