गर्मी में यूपी के सरकारी स्कूलों का समय बदलने की उठी मांग, RTE एक्ट और 5 घंटे पढ़ाई का किया जिक्र
17 अप्रैल 2026
भीषण गर्मी के कारण उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों का समय बदलने की मांग उठ रही है। तापमान 40 डिग्री पार होने से बच्चों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है और उपस्थिति घट रही है।
उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और चढ़ते पारे के साथ ही परिषदीय विद्यालयों के संचालन के समय में बदलाव की मांग जोर पकड़ने लगी है। प्रदेश के कई जिलों में तापमान के 40 डिग्री सेल्सियस को पार करने के बाद शिक्षक संघों ने बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की है। उन्होंने बेसिक शिक्षा विभाग और मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है कि स्कूलों का समय बदला जाए ताकि छात्र-छात्राओं को दोपहर की चिलचिलाती धूप और लू के प्रकोप से बचाया जा सके। यह मांग विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां कई बच्चे बिना निजी परिवहन के लंबी दूरी तय करके स्कूल आते-जाते हैं।
विभिन्न शिक्षक संगठनों, जिनमें उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ और विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन शामिल हैं, ने इस मुद्दे पर सक्रिय रूप से आवाज उठाई है। इन संगठनों ने सरकार को पत्र लिखकर वर्तमान स्कूल समय सारिणी पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। उनका प्रस्ताव है कि विद्यालयों का संचालन सुबह 7:30 बजे से लेकर दोपहर 12:30 बजे तक किया जाए। शिक्षकों का तर्क है कि दोपहर के समय, विशेषकर छुट्टी के वक्त, तेज धूप के कारण बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिससे हीट स्ट्रोक और अन्य गर्मी से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, गेहूं की कटाई के मौसम में होने वाली बिजली कटौती से स्कूलों में स्थिति और भी कठिन हो जाती है।
इस मांग के केंद्र में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 के प्रावधान भी हैं। शिक्षक संघों का कहना है कि कोरोना काल के दौरान पढ़ाई के नुकसान की भरपाई के लिए स्कूलों का समय बढ़ाकर छह घंटे कर दिया गया था। उनका तर्क है कि आरटीई एक्ट के तहत प्राथमिक विद्यालयों के लिए न्यूनतम 800 शिक्षण घंटे और उच्च प्राथमिक के लिए 1000 घंटे प्रति शैक्षणिक वर्ष अनिवार्य हैं, जिसे पांच घंटे के दैनिक शेड्यूल में भी पूरा किया जा सकता है। संघों के अनुसार, अब जबकि शैक्षणिक सत्र नियमित हो गया है, भीषण गर्मी को देखते हुए स्कूलों को वापस पांच घंटे के पुराने शेड्यूल पर लाना छात्रों के हित में एक आवश्यक कदम है।
यह मुद्दा केवल स्कूल के घंटों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह परिषदीय विद्यालयों में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं से भी जुड़ा है। कई स्कूलों में भीषण गर्मी से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन, जैसे कि सभी कक्षाओं में पंखे और ठंडे पीने के पानी की उचित व्यवस्था, का अभाव है। इन चुनौतियों के कारण, दोपहर के समय कक्षाओं में बैठना बच्चों के लिए बेहद मुश्किल हो जाता है, जिससे उनकी उपस्थिति और सीखने की क्षमता दोनों पर नकारात्मक असर पड़ता है। शिक्षकों का कहना है कि जब तक इन सुविधाओं में सुधार नहीं होता, तब तक स्कूल के समय को मौसम के अनुकूल बनाना ही एकमात्र व्यावहारिक समाधान है।
शिक्षक संगठनों की इस मांग पर शासन स्तर पर विचार-विमर्श शुरू होने की उम्मीद है। पिछले वर्षों में भी सरकार ने गर्मी की लहरों के दौरान छात्रों को राहत देने के लिए स्कूल के समय में बदलाव किए हैं। कुछ जिलों ने स्थानीय स्तर पर पहले ही समय में परिवर्तन कर दिया है, लेकिन अब एक प्रदेशव्यापी नीतिगत निर्णय की प्रतीक्षा है। बेसिक शिक्षा विभाग को अब आरटीई अधिनियम के तहत अनिवार्य शिक्षण घंटों और प्रदेश के लाखों बच्चों के स्वास्थ्य और कल्याण के बीच संतुलन साधते हुए एक उचित निर्णय लेना होगा, ताकि पढ़ाई भी जारी रहे और बच्चे भी सुरक्षित रहें।
Source: jagran