नैनीताल के 45 निजी स्कूलों को शिक्षा विभाग का नोटिस, फीस बढ़ोतरी और नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई

17 अप्रैल 2026

नैनीताल के 45 निजी स्कूलों को शिक्षा विभाग का नोटिस, फीस बढ़ोतरी और नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई

नैनीताल जिले के 45 निजी स्कूलों को शिक्षा विभाग ने नोटिस भेजा है। मुख्य शिक्षा अधिकारी ने शुल्क वृद्धि, वेबसाइट अपडेट न करने और अभिभावकों को तय दुकानों से किताबें-यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य करने पर यह कार्रवाई की।

नैनीताल जिले में निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। अभिभावकों से मिली शिकायतों और प्रशासनिक जांच के आधार पर मुख्य शिक्षा अधिकारी ने 45 निजी स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन स्कूलों पर नए शैक्षणिक सत्र में नियमों को ताक पर रखकर फीस बढ़ाने, अभिभावकों को खास दुकानों से किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर करने तथा अपनी वेबसाइट पर आवश्यक जानकारी अपडेट न करने जैसे गंभीर आरोप हैं। इस कार्रवाई से निजी स्कूलों के प्रबंधन में हड़कंप मच गया है, जबकि अभिभावक संघों ने इस कदम का स्वागत किया है।

यह मामला कई दिनों से तूल पकड़ रहा था जब नए सत्र की शुरुआत के साथ ही अभिभावकों ने स्कूलों द्वारा की जा रही मनमानी वसूली की शिकायतें प्रशासन से करनी शुरू कीं। शिकायतों में मुख्य रूप से यह कहा गया कि कई स्कूल बिना किसी तार्किक आधार के फीस में भारी बढ़ोतरी कर रहे हैं। इसके अलावा, स्कूलों पर यह भी आरोप है कि वे एनसीईआरटी की सस्ती किताबों की जगह निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने का दबाव बना रहे हैं और इसके लिए कुछ चुनिंदा बुक सेलर्स के साथ साठगांठ कर रखी है। इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने जांच शुरू की थी।

प्रशासनिक जांच के आधार पर मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद जायसवाल ने गुरुवार को यह बड़ी कार्रवाई की। नोटिस पाने वाले स्कूलों में हल्द्वानी ब्लॉक के 18, रामनगर के 20, भीमताल के छह और रामगढ़ ब्लॉक का एक स्कूल शामिल है। शिक्षा विभाग ने इन सभी स्कूलों से 20 अप्रैल तक अपना स्पष्टीकरण दाखिल करने को कहा है। विभाग ने साफ किया है कि यदि स्कूलों का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया या वे निर्धारित समय में जवाब देने में विफल रहते हैं, तो उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें मान्यता रद्द करने जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं।

यह पहली बार नहीं है जब इस क्षेत्र के निजी स्कूल जांच के दायरे में आए हैं। पिछले कुछ वर्षों में, उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने भी निजी स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस वसूलने के खिलाफ दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की है और सरकार को नियम बनाने के निर्देश दिए हैं। इन अदालती निर्देशों और शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत यह अनिवार्य है कि कोई भी स्कूल फीस बढ़ाने से पहले अभिभावक-शिक्षक संघ के साथ परामर्श करे और किसी भी तरह के व्यावसायिक लाभ के लिए काम न करे। ताजा कार्रवाई इन्हीं नियमों और निर्देशों के उल्लंघन का परिणाम है।

इस घटनाक्रम के बाद अब सभी की निगाहें 20 अप्रैल की समय सीमा पर टिकी हैं। स्कूल प्रबंधन अपने जवाब तैयार करने में जुट गए हैं, जबकि शिक्षा विभाग आगामी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। अभिभावकों को उम्मीद है कि प्रशासन की इस सख्ती से उन्हें राहत मिलेगी और भविष्य में स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगेगी। यह प्रकरण प्रदेश में निजी शिक्षा के नियमन और पारदर्शिता को लेकर एक बड़ी बहस को फिर से सामने ले आया है, जिसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

Source: jagran

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The World Dispatch

Source: World News API