जनगणना 2027: इंटरनेट के दौर में रेडियो के शौकीनों को भी ढूंढेगी टीम, पूछेगी 34 सवाल
17 अप्रैल 2026
जनगणना 2027 के पहले चरण में हल्द्वानी में घरों की गणना होगी। टीमें इंटरनेट युग में भी रेडियो सुनने वालों, भोजन पकाने के तरीके (एलपीजी, चूल्हा), पानी के स्रोत और घर की सुविधाओं जैसे 34 सवाल पूछेंगी।
भारत की आगामी जनगणना 2027 की तैयारियां शुरू हो गई हैं और इस बार यह प्रक्रिया कई मायनों में ऐतिहासिक होगी। यह देश की पहली पूर्ण रूप से डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें आंकड़ों के संग्रह के लिए मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग किया जाएगा। इस व्यापक कवायद के तहत, जनगणना टीमें घर-घर जाकर लगभग 34 सवालों की एक विस्तृत सूची के साथ जानकारी जुटाएंगी। दिलचस्प बात यह है कि जहां एक ओर यह जनगणना डिजिटल युग के प्रतीक, इंटरनेट की उपलब्धता, पर सवाल पूछेगी, वहीं यह पुराने संचार माध्यम, रेडियो, के शौकीनों की भी जानकारी एकत्रित करेगी।
यह जनगणना, जो 2021 में प्रस्तावित थी लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित हो गई थी, अब नए सिरे से और उन्नत तकनीक के साथ आयोजित की जा रही है। गृह मंत्रालय के अधीन भारत के महापंजीयक कार्यालय द्वारा संचालित यह विशाल अभियान दो चरणों में पूरा होगा। पहला चरण मकान सूचीकरण और आवास गणना का है, जो देश के अधिकांश हिस्सों में अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच चलेगा। इसी चरण में परिवारों से उनकी आवासीय स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और संपत्ति से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। दूसरा चरण, जनसंख्या गणना, फरवरी 2027 में शुरू होगा, जिसमें व्यक्तिगत जानकारी एकत्र की जाएगी।
इस बार की प्रश्नावली आधुनिक भारत की बदलती सामाजिक-आर्थिक तस्वीर को समझने का प्रयास करती है। इसमें इंटरनेट सुविधा, स्मार्टफोन और कंप्यूटर/लैपटॉप की उपलब्धता जैसे प्रश्न शामिल हैं, जो देश में डिजिटल पैठ का आकलन करने में मदद करेंगे। साथ ही, यह भी पूछा जाएगा कि परिवार में रेडियो या ट्रांजिस्टर है या नहीं। यह सवाल दर्शाता है कि सरकार आज भी सूचना प्रसार के लिए रेडियो की पहुंच को महत्वपूर्ण मानती है, खासकर उन दूरदराज के इलाकों में जहां इंटरनेट की सुविधा अभी भी सीमित हो सकती है। इन दो प्रश्नों का एक साथ होना यह दिखाता है कि जनगणना पारंपरिक और आधुनिक दोनों पहलुओं को समेटते हुए विकास का एक समग्र दृष्टिकोण अपना रही है।
प्रश्नावली में अन्य महत्वपूर्ण सवाल भी शामिल हैं जो नागरिकों के जीवन स्तर को दर्शाते हैं। इनमें पीने के पानी का स्रोत, शौचालय की उपलब्धता, रसोई गैस कनेक्शन का प्रकार (एलपीजी/पीएनजी), और खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले मुख्य ईंधन जैसे विषय शामिल हैं। पहली बार, परिवारों द्वारा मुख्य रूप से उपभोग किए जाने वाले अनाज (जैसे गेहूं, चावल, बाजरा) के बारे में भी जानकारी जुटाई जाएगी, जिससे देश की पोषण संबंधी आदतों का पता चलेगा। ये सभी आंकड़े सरकार को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं जैसे 'स्वच्छ भारत मिशन' और 'उज्ज्वला योजना' के प्रभाव का मूल्यांकन करने और भविष्य की नीतियों को अधिक प्रभावी ढंग से बनाने में सक्षम बनाएंगे।
इस डिजिटल जनगणना की एक और महत्वपूर्ण विशेषता नागरिकों के लिए 'स्व-गणना' (सेल्फ-एन्यूमरेशन) का विकल्प है। इसके तहत, लोग जनगणना कर्मियों के घर आने से पहले ही एक विशेष वेब पोर्टल पर जाकर अपने परिवार से संबंधित जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। यह प्रक्रिया न केवल नागरिकों के लिए सुविधाजनक होगी बल्कि इससे आंकड़ों के संग्रह में तेजी और सटीकता भी बढ़ेगी। जो लोग इस सुविधा का उपयोग नहीं कर पाएंगे, उनके लिए जनगणना कर्मी घर-घर जाकर पारंपरिक तरीके से, लेकिन डिजिटल डिवाइस के माध्यम से, डेटा एकत्र करेंगे। यह पूरी प्रक्रिया जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत की जाती है, जो एकत्र की गई जानकारी की पूर्ण गोपनीयता सुनिश्चित करता है।
Source: jagran