चतरा-हजारीबाग सीमा पर सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी, मुठभेड़ में कमांडर सहदेव समेत 4 इनामी नक्सली ढेर
17 अप्रैल 2026
हजारीबाग और चतरा की सीमा पर सुरक्षाबलों और प्रतिबंधित भाकपा माओवादी नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई। बटुका इलाके में हुई इस दो घंटे की मुठभेड़ में सबजोनल कमांडर सहदेव सहित चार इनामी नक्सली मारे गए।
झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ जारी अभियान में सुरक्षाबलों को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। इंटेलिजेंस ब्यूरो से मिली सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर शुक्रवार को चतरा और हजारीबाग जिले की सीमा पर की गई एक संयुक्त कार्रवाई में चार कुख्यात नक्सली मारे गए। मारे गए नक्सलियों में प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) का 15 लाख रुपये का इनामी सब-जोनल कमांडर सहदेव महतो उर्फ अविनाश भी शामिल है। झारखंड पुलिस मुख्यालय के सूत्रों ने इस मुठभेड़ की पुष्टि की है।
वरिष्ठ अधिकारियों को चतरा-हजारीबाग सीमा पर नक्सलियों के एक दस्ते की मौजूदगी की गुप्त सूचना मिली थी। इस सूचना के आधार पर चतरा और हजारीबाग पुलिस ने सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन के साथ मिलकर एक संयुक्त अभियान चलाया। सुरक्षा बलों ने पिपरवार और केरेडारी थाना क्षेत्रों के सीमावर्ती बटुका इलाके के खपिया कोतीझरना जंगल में घेराबंदी की। खुद को घिरा हुआ देखकर नक्सलियों ने सुरक्षाबलों पर गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद जवानों ने भी जवाबी कार्रवाई की। घंटों चली इस भीषण मुठभेड़ में चार नक्सली मारे गए।
मारे गए नक्सलियों में सब-जोनल कमांडर सहदेव महतो, उसकी पत्नी नताशा, जो छत्तीसगढ़ की रहने वाली थी, एरिया कमांडर बुधन करमाली और एरिया कमांडर रंजीत गंझू शामिल हैं। सहदेव महतो कई बड़ी नक्सली वारदातों का मास्टरमाइंड माना जाता था और लंबे समय से पुलिस की रडार पर था। नताशा हाल ही में छत्तीसगढ़ से झारखंड आकर माओवादी संगठन को मजबूत करने की साजिश में जुटी थी। इस घटना को राज्य में नक्सलवाद के खिलाफ एक ऐतिहासिक सफलता के तौर पर देखा जा रहा है।
मुठभेड़ स्थल से सुरक्षा बलों ने भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया है। बरामद किए गए हथियारों में दो एके-47 राइफलें, एक अमेरिकी राइफल, एक इंसास राइफल और अन्य देसी हथियार शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, बड़ी मात्रा में कारतूस और नक्सली साहित्य भी मौके से मिले हैं। चतरा के एसपी सुमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि घटना के बाद पूरे इलाके की घेराबंदी कर सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि कुछ अन्य नक्सली घायल हुए हैं और मुठभेड़ स्थल से भागने में सफल रहे।
यह घटना झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों की श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षाबलों के लगातार दबाव और अभियानों के कारण राज्य में नक्सली प्रभाव काफी कम हुआ है। हालांकि, सारंडा जैसे कुछ इलाकों में नक्सली अभी भी सक्रिय हैं, जहां एक करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा जैसे बड़े नेताओं की मौजूदगी की खबर है। सुरक्षा बल इन इलाकों में भी अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं और निगरानी के लिए ड्रोन जैसी तकनीक का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। सरकार की आत्मसमर्पण नीति के भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं, जिससे कई नक्सली मुख्यधारा में लौट रहे हैं। इस ताजा सफलता से सुरक्षाबलों का मनोबल और बढ़ेगा और उम्मीद है कि जल्द ही पूरे राज्य को नक्सल-मुक्त किया जा सकेगा।
Source: jagran