कानपुर में स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी में 37 अस्पताल को नोटिस, जवाब नहीं मिलने पर मकान मालिकों पर भी कार्रवाई

17 अप्रैल 2026

कानपुर में स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी में 37 अस्पताल को नोटिस, जवाब नहीं मिलने पर मकान मालिकों पर भी कार्रवाई

कानपुर में किडनी कांड के बाद स्वास्थ्य विभाग ने 50 से अधिक अस्पतालों पर छापेमारी की थी। इस दौरान 13 बिना लाइसेंस वाले अस्पताल सील किए गए और 37 को नोटिस जारी किया गया।

कानपुर में हाल ही में उजागर हुए किडनी कांड के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अवैध और मानक विहीन चल रहे निजी अस्पतालों के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ दिया है। इस व्यापक कार्रवाई के तहत, विभाग ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में 50 से अधिक अस्पतालों और नर्सिंग होम पर छापेमारी की। इस दौरान गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर 13 अस्पतालों को तत्काल सील कर दिया गया, जबकि 37 अन्य संस्थानों को नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है। विभाग अब उन अस्पतालों पर शिकंजा कसने की तैयारी में है, जिनकी ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।

यह बड़ी कार्रवाई विशेष रूप से कल्याणपुर-शिवली, नौबस्ता, बर्रा और रामादेवी जैसे इलाकों में केंद्रित रही, जहाँ कई अस्पताल बिना लाइसेंस या उचित पंजीकरण के संचालित होते पाए गए। निरीक्षण के दौरान, टीमों ने पाया कि कई अस्पतालों में मौके पर कोई योग्य डॉक्टर मौजूद नहीं था, और वे नामचीन डॉक्टरों के नाम का उपयोग करके मरीजों को गुमराह कर रहे थे। इसके अतिरिक्त, बिना अनुमति के ऑपरेशन थिएटर (ओटी) और आईसीयू जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं का संचालन किया जा रहा था। कुछ मामलों में तो ऑपरेशन थिएटर के अंदर बिस्तर बिछे मिलने जैसी चौंकाने वाली अनियमितताएं भी सामने आईं, जो मरीजों के जीवन के साथ हो रहे खिलवाड़ को दर्शाती हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने जिन 37 अस्पतालों को नोटिस जारी किया था, उनमें बेबी केयर, राजा हॉस्पिटल, केपीएम, खाटू श्याम, और संस्कार समेत कई अन्य शामिल हैं। इन नोटिसों के माध्यम से अस्पताल संचालकों से उनके लाइसेंस, डॉक्टरों के पैनल, और उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा गया था। अब, निर्धारित समय-सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब न देने वाले अस्पतालों की सूची तैयार की जा रही है, और पुलिस की सहायता से इन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। यह अभियान किडनी कांड जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने और स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।

इस मामले में एक महत्वपूर्ण नया मोड़ यह है कि स्वास्थ्य विभाग ने अब केवल अस्पताल संचालकों पर ही नहीं, बल्कि उन भवन मालिकों पर भी कार्रवाई करने का फैसला किया है, जिनकी संपत्तियों में यह अवैध अस्पताल किराए पर चल रहे थे। यह एक नई रणनीति है, जिसका उद्देश्य अवैध स्वास्थ्य सुविधाओं के संचालन को जड़ से खत्म करना है। अब अगर कोई अस्पताल बिना लाइसेंस के चलता हुआ पाया जाता है, तो उसके संचालक के साथ-साथ मकान मालिक को भी कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ेगा। इस कदम से उम्मीद है कि भवन मालिक अपनी संपत्ति किराए पर देने से पहले अस्पताल के पंजीकरण और अन्य कानूनी दस्तावेजों की पूरी जांच करेंगे।

इस पूरी कार्रवाई ने कानपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था में मौजूद गहरी खामियों को उजागर कर दिया है। आने वाले दिनों में, स्वास्थ्य विभाग द्वारा सीलिंग और अन्य कानूनी कार्रवाइयों में तेजी आने की संभावना है। विभाग का स्पष्ट कहना है कि मरीजों के जीवन से खिलवाड़ करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा। यह अभियान उन सभी अवैध नर्सिंग होम और अस्पतालों के लिए एक कड़ी चेतावनी है, जो मानकों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे हैं और यह दर्शाता है कि प्रशासन अब इस मुद्दे को लेकर पहले से कहीं ज्यादा गंभीर है।

Source: jagran

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The World Dispatch

Source: World News API