योगी आदित्यनाथ सरकार ने तैयार कर ली तबादला नीति 2026, अब जल्द ही की जाएगी जारी
17 अप्रैल 2026
Yogi Adityanath Government Transfer Policy 2026: विभागाध्यक्षों को तबादला प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक महीने का समय दिया जाएगा।
उत्तर प्रदेश में एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी पूरी हो गई है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई तबादला नीति का मसौदा तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू कर दिया जाएगा। इस नीति का मुख्य उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाना तथा लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे अधिकारियों व कर्मचारियों को स्थानांतरित कर प्रशासनिक व्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार करना है। सरकार का मानना है कि इस कदम से भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगेगा और कार्यप्रणाली की सुस्ती दूर होगी।
नई नीति के तहत सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान अनिवार्य स्थानांतरण से जुड़ा है। अब जो भी अधिकारी या कर्मचारी किसी एक जिले में तीन साल या एक ही मंडल में सात साल की सेवा पूरी कर चुके होंगे, उनका तबादला निश्चित तौर पर किया जाएगा। यह नियम उन कर्मचारियों पर भी सख्ती से लागू होगा जो वर्षों से एक ही सीट या पटल पर काम कर रहे हैं, ताकि किसी एक जगह पर किसी का नियंत्रण स्थापित न हो सके। इस व्यापक फेरबदल को व्यवस्थित ढंग से करने के लिए सीमाएं भी तय की गई हैं। नीति के अनुसार, समूह 'क' और 'ख' के 20 प्रतिशत तक अधिकारियों का तबादला किया जा सकेगा, जबकि समूह 'ग' और 'घ' के कर्मचारियों के लिए यह सीमा 10 प्रतिशत रखी गई है। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में विभागीय मंत्री की अनुमति से इस सीमा को बढ़ाया जा सकता है।
इस नीति में सरकार ने एक मानवीय दृष्टिकोण भी अपनाया है। सरकारी सेवा में कार्यरत पति-पत्नी को यथासंभव एक ही जिले या पास के जिलों में तैनात करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि वे अपने पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन आसानी से कर सकें। इसके अतिरिक्त, दिव्यांग कर्मचारियों को बड़ी राहत दी गई है। नीति के मसौदे के अनुसार, 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले कर्मचारियों को सामान्य तबादलों से छूट मिलेगी। साथ ही, जिन कर्मचारियों के बच्चे गंभीर रूप से दिव्यांग या मंदबुद्धि हैं, उन्हें भी उनकी इच्छा के अनुसार तैनाती में प्राथमिकता देने का प्रस्ताव है।
प्रशासनिक शुचिता और भ्रष्टाचार पर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति को पुख्ता करने के लिए भी कड़े नियम बनाए गए हैं। समूह 'क' के अधिकारियों को उनके गृह जिले या मंडल-स्तरीय पद होने पर गृह मंडल में तैनाती नहीं दी जाएगी। इसके अलावा, जिन कर्मचारियों का रिकॉर्ड संदिग्ध माना गया है, उन्हें किसी भी संवेदनशील पद पर जिम्मेदारी नहीं सौंपी जाएगी। सरकार ने यह भी सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है कि आकांक्षी जिलों और विकास खंडों में कोई भी पद खाली न रहे, ताकि विकास कार्यों की गति प्रभावित न हो। इन क्षेत्रों में भेजे गए कर्मचारियों को दो साल बाद तबादले का विकल्प दिया जा सकता है।
कार्मिक विभाग द्वारा तैयार इस तबादला नीति के मसौदे पर उच्च स्तर पर सहमति बन चुकी है और अब इसे कैबिनेट की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। एक बार मंजूरी मिलने के बाद, सभी विभागाध्यक्षों को स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक महीने का समय दिया जाएगा। उम्मीद है कि यह प्रक्रिया मई के अंत तक पूरी कर ली जाएगी, जिससे प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों की जिम्मेदारियों और तैनाती में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। यह कदम आगामी जनगणना और पंचायत चुनावों की प्रशासनिक तैयारियों को समय पर पूरा करने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Source: jagran