लेबनान में युद्धविराम, पर हिज़्बुल्लाह की चेतावनी- 'उंगलियां ट्रिगर पर हैं'
17 अप्रैल 2026
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान युद्ध खत्म करने के लिए एक बड़े समझौते की उम्मीद जताई है। वहीं, हिज़्बुल्लाह ने संकेत दिया है कि वह इज़राइल-लेबनान युद्धविराम का पालन करेगा।
इज़राइल और लेबनान के बीच अमेरिका की मध्यस्थता से हुआ एक नाज़ुक युद्धविराम कायम है। यह रात से प्रभावी हुआ, जिससे छह हफ़्तों से चल रही भीषण लड़ाई रुक गई है। इस लड़ाई ने दक्षिणी लेबनान में भारी तबाही मचाई थी। इस 10 दिन के युद्धविराम के साथ हिज़्बुल्लाह ने एक कड़ी चेतावनी भी दी है। उसने कहा है कि उसके लड़ाकों की "उंगलियां ट्रिगर पर" रहेंगी। वे समझौते के किसी भी इज़राइली उल्लंघन का जवाब देने के लिए तैयार रहेंगे। हालांकि संगठन ने युद्धविराम का पालन करने का संकेत दिया है, लेकिन उसके औपचारिक बयान में गहरा अविश्वास दिखता है, जो मौजूदा शांति के नाज़ुक होने का सबूत है।
युद्धविराम स्थानीय समय के अनुसार आधी रात को शुरू हुआ। इससे 2 मार्च, 2026 को शुरू हुए क्रूर संघर्ष पर रोक लगी है। यह लड़ाई ईरान से जुड़े एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का हिस्सा थी। इसमें लेबनान में 2,100 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई। और दस लाख से ज़्यादा लोग विस्थापित हुए, जो देश की आबादी का लगभग पांचवां हिस्सा है। यह समझौता वॉशिंगटन में इज़राइली और लेबनानी अधिकारियों के बीच सीधी बातचीत के बाद हुआ। यह दशकों में इस तरह की पहली उच्च-स्तरीय बातचीत थी, जिसमें अमेरिका ने अहम मध्यस्थता की। संयुक्त राष्ट्र महासचिव समेत अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने इस ठहराव का स्वागत किया है और इसे कूटनीति के लिए एक अहम मौका बताया है।
बड़ी लड़ाइयों के रुकने के बावजूद तनाव बहुत ज़्यादा बना हुआ है। हिज़्बुल्लाह इस सरकारी समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर करने वालों में नहीं है। उसने इसका पालन इज़राइल की कार्रवाइयों पर निर्भर बताया है। संगठन ने कहा है कि वह सावधानी के साथ युद्धविराम का पालन करेगा, बशर्ते यह पूरे लेबनान पर लागू हो और इज़राइली सेना पूरी तरह से वापस चली जाए। वहीं, इज़राइल ने कहा है कि उसकी सेना युद्धविराम के दौरान दक्षिणी लेबनान के अंदर अपने 'मजबूत सुरक्षा घेरे' से पीछे नहीं हटेगी। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस युद्धविराम को 'ताकत के ज़रिए शांति' बताया। साथ ही उन्होंने किसी भी खतरे के खिलाफ आत्मरक्षा में कार्रवाई करने के इज़राइल के अधिकार को बनाए रखा।
युद्धविराम के तुरंत बाद, एक तरफ सतर्क उम्मीद है तो दूसरी तरफ उल्लंघन के शुरुआती आरोप भी लग रहे हैं। जैसे ही हज़ारों विस्थापित लेबनानी अपने शहरों और गांवों में वापस लौटने लगे, लेबनानी सेना ने कई इज़राइली उल्लंघनों की सूचना दी। इसमें दक्षिणी इलाकों में गोलाबारी भी शामिल है, और नागरिकों को सावधानी बरतने की चेतावनी दी। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने चिंता जताई है कि युद्धविराम 'पहले से ही कमज़ोर हो सकता है'। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अब इस बात पर है कि क्या इस अस्थायी रोक को आगे बढ़ाया जा सकता है और इसे एक स्थायी शांति में बदला जा सकता है। हिज़्बुल्लाह के हथियारों के ज़खीरे और लेबनान की ज़मीन पर इज़राइली सेना की मौजूदगी से यह प्रक्रिया जटिल हो गई है।
आने वाले दस दिन इसमें शामिल सभी पक्षों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। इस समझौते का मकसद एक स्थायी सुरक्षा व्यवस्था हासिल करने के लिए व्यापक बातचीत का रास्ता बनाना है। इसमें गैर-सरकारी सशस्त्र समूहों के विवादास्पद मुद्दे को हल करना भी शामिल है। समझौते में यह शर्त है कि देश में लेबनानी सशस्त्र बल ही एकमात्र अधिकृत सैन्य शक्ति होनी चाहिए। हालांकि, पहले के युद्धविराम, जैसे नवंबर 2024 में हुआ समझौता, आखिरकार टूट गया था। इसके बाद फिर से संघर्ष शुरू हो गया था। इस मौजूदा कोशिश की सफलता सभी पक्षों की इच्छा पर निर्भर करेगी। उन्हें तनाव कम करना होगा और एक स्थायी समाधान के लिए अच्छी नीयत से बातचीत करनी होगी।
Source: cbsnews