याददाश्त की समस्या है? ज़्यादा नमक आपकी मुश्किलें और बढ़ा सकता है, स्टडी में खुलासा
17 अप्रैल 2026
एक नई स्टडी के मुताबिक, ज़्यादा नमक खाने से आपकी याददाश्त तेज़ी से कम हो सकती है। यह असर ख़ास तौर पर पुरुषों में देखा गया है। इससे पता चलता है कि हमारे खान-पान का दिमाग की सेहत पर गहरा असर पड़ता है।
ऑस्ट्रेलिया की एक नई स्टडी में सामने आया है कि ज़्यादा नमक खाने से याददाश्त में तेज़ी से गिरावट आ सकती है। यह स्टडी इस बात का एक और सबूत है कि हमारे खान-पान का दिमाग की सेहत पर लंबा असर पड़ता है। यह रिसर्च एडिथ कोवान यूनिवर्सिटी में की गई है। इसमें पता चला है कि ज़्यादा सोडियम लेने से एपिसोडिक मेमोरी तेज़ी से कम होती है। एपिसोडिक मेमोरी यानी जीवन की ख़ास घटनाओं और व्यक्तिगत अनुभवों को याद रखने की हमारी क्षमता। यह असर ख़ास तौर पर पुरुष प्रतिभागियों में देखा गया, जबकि स्टडी के दौरान महिलाओं में ऐसा कोई संबंध नहीं मिला। ये नतीजे *न्यूरोबायोलॉजी ऑफ एजिंग* जर्नल में प्रकाशित हुए हैं। ये हमारी जीवनशैली से जुड़े एक ऐसे कारक पर रोशनी डालते हैं जिसे बदला जा सकता है और इससे सोचने-समझने की क्षमता में आने वाली कमी को रोकने में मदद मिल सकती है।
यह स्टडी छह साल तक चली। इसमें 1,208 लोगों को शामिल किया गया। शुरुआत में उनके सोडियम सेवन का आकलन किया गया और फिर हर 18 महीने में टेस्ट के ज़रिए उनकी मानसिक क्षमता को जांचा गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन पुरुषों ने शुरुआत में ज़्यादा सोडियम का सेवन किया, उनकी पुरानी व्यक्तिगत घटनाओं को याद करने की क्षमता में तेज़ी से गिरावट आई। हालांकि यह स्टडी सीधे तौर पर कारण और प्रभाव का संबंध स्थापित नहीं करती है। लेकिन यह खाने और याददाश्त के बीच एक मज़बूत संबंध का 'शुरुआती सबूत' देती है। यह ज़्यादा नमक खाने से जुड़े ख़तरों में एक नई बात जोड़ता है, जिसे लंबे समय से हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों के बढ़ते ख़तरे से जोड़ा जाता रहा है।
प्रमुख शोधकर्ता सामंथा गार्डनर ने बताया कि याददाश्त में इस गिरावट के सटीक कारण अभी तक पूरी तरह से समझे नहीं गए हैं। लेकिन, वैज्ञानिकों का मानना है कि ज़्यादा सोडियम का स्तर दिमाग में सूजन पैदा कर सकता है। यह खून की नलियों को नुकसान पहुंचा सकता है और याददाश्त के लिए ज़रूरी हिस्सों में खून के बहाव को कम कर सकता है। दिलचस्प बात यह है कि जानवरों पर हुई कुछ पिछली स्टडीज़ में यह भी पता चला है कि नमक का दिमाग पर बुरा असर ब्लड प्रेशर पर होने वाले प्रभाव से अलग भी हो सकता है। यह सोडियम और सोचने-समझने की क्षमता के बीच एक सीधे संबंध की ओर इशारा करता है।
यह नई रिसर्च एक ऐसे क्षेत्र में हुई है जिसके नतीजे अक्सर मिले-जुले रहे हैं। जानवरों पर हुए कई अध्ययनों में लगातार यह दिखाया गया है कि ज़्यादा नमक वाला खाना सोचने-समझने की क्षमता को कमज़ोर करता है, लेकिन इंसानों पर हुई रिसर्च के नतीजे अलग-अलग रहे हैं। शोधकर्ताओं के लिए एक चुनौती यह है कि वे नमक के असर को खाने-पीने की दूसरी चीज़ों से अलग करके देखें। क्योंकि ज़्यादा सोडियम वाले खाद्य पदार्थ अक्सर 'पश्चिमी' डाइट का हिस्सा होते हैं, जिसमें ज़्यादा फैट और चीनी भी होती है। यह ऑस्ट्रेलियाई स्टडी इसलिए ख़ास है क्योंकि यह लंबे समय तक की गई है और इसमें एक ख़ास तरह की याददाश्त पर ध्यान दिया गया है।
अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) जैसी स्वास्थ्य संस्थाएं आमतौर पर एक दिन में 2,300 मिलीग्राम से कम सोडियम लेने की सलाह देती हैं। यह मात्रा लगभग एक छोटे चम्मच नमक के बराबर है। इस नई स्टडी में शामिल शोधकर्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि और ज़्यादा जांच की ज़रूरत है, ताकि यह पूरी तरह समझा जा सके कि सोडियम दिमाग को कैसे प्रभावित करता है। भविष्य की स्टडीज़ में शायद पुरुषों और महिलाओं में देखे गए अंतरों की जांच की जाएगी। इससे खान-पान से जुड़ी सलाह को और बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है, ताकि दुनिया की बढ़ती उम्र वाली आबादी में मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखा जा सके और डिमेंशिया के ख़तरे को कम किया जा सके।
Source: usnews