सारंडा में माओवादियों के खिलाफ 'आर-पार' की जंग, 10 किमी के घेरे में फंसा एक करोड़ का इनामी मिसिर बेसरा
16 अप्रैल 2026
सारंडा में माओवादियों के खिलाफ निर्णायक अभियान जारी है, जिसमें एक करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा को 10 किलोमीटर के घेरे में फंसा लिया गया है।
झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में स्थित सारंडा के घने जंगलों में सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच निर्णायक लड़ाई छिड़ गई है। खुफिया सूचनाओं के आधार पर चलाए जा रहे एक बड़े अभियान में सुरक्षाबलों ने इस क्षेत्र में सक्रिय सबसे बड़े माओवादी नेताओं में से एक, एक करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा और उसके दस्ते को लगभग 10 किलोमीटर के दायरे में घेर लिया है। यह अभियान हाल के वर्षों में माओवाद के खिलाफ सबसे बड़ी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है, जिसका लक्ष्य सारंडा को माओवादियों से पूरी तरह मुक्त कराना है।
यह व्यापक अभियान सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन, झारखंड जैगुआर और जिला पुलिस के संयुक्त प्रयासों से चलाया जा रहा है। पिछले कई दिनों से चल रही इस कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने रणनीति के तहत जंगल के अंदरूनी इलाकों में अपनी पैठ बनाई है, जिससे माओवादियों के भागने के रास्ते बंद हो गए हैं। अभियान की गंभीरता इस बात से पता चलती है कि रुक-रुक कर मुठभेड़ हो रही है और माओवादी हताशा में आईईडी विस्फोटों का सहारा ले रहे हैं। हाल ही में हुए ऐसे ही एक आईईडी धमाके और गोलीबारी में कोबरा बटालियन के एक इंस्पेक्टर समेत कई जवान घायल भी हुए हैं, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए एयरलिफ्ट कर रांची भेजा गया है।
मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर, भाकपा (माओवादी) की सर्वोच्च पोलित ब्यूरो का सदस्य है और उसे संगठन का मास्टरमाइंड माना जाता है। झारखंड के गिरिडीह का मूल निवासी बेसरा दशकों से झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के इलाकों में सक्रिय रहा है और उस पर कई बड़े हमलों की साजिश रचने का आरोप है। उसकी वरिष्ठता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई राज्यों ने मिलकर उस पर एक करोड़ रुपये से अधिक का इनाम घोषित किया है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि संगठन में नेतृत्व के संकट के बीच बेसरा को महासचिव पद का दावेदार भी माना जा रहा था। उसकी घेराबंदी माओवादी संगठन के लिए एक बहुत बड़ा झटका है।
सारंडा का जंगल, जो झारखंड और ओडिशा की सीमा पर फैला है, अपने घने और दुर्गम भूगोल के कारण दशकों से माओवादियों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह और ट्रेनिंग का केंद्र रहा है। इस इलाके को "माओवादियों का गढ़" कहा जाता रहा है, जहां से वे अपनी गतिविधियों का संचालन करते थे। पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षाबलों ने ‘ऑपरेशन प्रहार’ और ‘ऑपरेशन मेगाबुरु’ जैसे कई अभियानों के जरिए इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत की है और कई शीर्ष कमांडरों को मार गिराया है। मौजूदा अभियान इसी कड़ी का अगला और निर्णायक चरण है, जिसका उद्देश्य मिसिर बेसरा के दस्ते को पूरी तरह से निष्क्रिय करना और क्षेत्र पर राज्य का पूर्ण नियंत्रण स्थापित करना है।
इस ऑपरेशन के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी या निष्क्रियता से न केवल पूर्वी भारत में माओवादी आंदोलन की कमर टूट जाएगी, बल्कि कैडर का मनोबल भी गिरेगा। सुरक्षाबल बेहद सावधानी से कदम बढ़ा रहे हैं, ताकि कम से कम नुकसान के साथ ऑपरेशन को उसके अंजाम तक पहुंचाया जा सके। ड्रोन और अन्य आधुनिक तकनीकों की मदद से नक्सलियों की सटीक लोकेशन का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई है और अतिरिक्त बल तैनात कर दिए गए हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी बड़ा माओवादी नेता इस चक्रव्यूह से बचकर न निकल पाए।
Source: jagran