जनगणना 2027: एक मोबाइल नंबर से केवल एक परिवार ही कर सकेगा 'स्व-गणना', 10-20 मिनट में खुद दर्ज कर सकेंगे डेटा
16 अप्रैल 2026
पटना में जनगणना 2027 का पहला चरण 2 मई से 31 मई तक चलेगा, जिसमें मकान सूचीकरण और आवास गणना होगी। इससे पहले, 17 अप्रैल से 1 मई तक 'स्व-गणना' की सुविधा शुरू हो गई है।
भारत की अगली जनगणना, जो 2027 में होनी है, की प्रक्रिया को अधिक सुगम और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है। इस बार नागरिकों को 'स्व-गणना' (सेल्फ-इन्यूमरेशन) की एक विशेष सुविधा प्रदान की जा रही है, जिसके माध्यम से वे घर बैठे ही अपनी और अपने परिवार की जानकारी सरकारी पोर्टल पर दर्ज कर सकेंगे। इस पूरी प्रक्रिया में 10 से 20 मिनट का समय लगने का अनुमान है और इसे पूरा करने के लिए एक मोबाइल नंबर की आवश्यकता होगी। सुरक्षा और डाटा की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए, एक मोबाइल नंबर से केवल एक ही परिवार का पंजीकरण किया जा सकेगा। यह कदम जनगणना को पूरी तरह से डिजिटल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
कोविड-19 महामारी के कारण 2021 में प्रस्तावित जनगणना को स्थगित कर दिया गया था, जिसके बाद अब इसे 2026-27 में दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है। पहला चरण, जिसे मकान सूचीकरण और आवास गणना कहा जाता है, अप्रैल 2026 से विभिन्न राज्यों में शुरू हो गया है। इसी चरण के तहत स्व-गणना का विकल्प उपलब्ध कराया गया है। नागरिक आधिकारिक वेब पोर्टल (se.census.gov.in) पर अपने मोबाइल नंबर का उपयोग करके लॉग इन कर सकते हैं। पंजीकरण के बाद, उन्हें अपने घर की भौगोलिक स्थिति को नक्शे पर चिन्हित करना होगा और फिर घर की स्थिति, उपलब्ध सुविधाएं और परिवार के सदस्यों से जुड़े लगभग 33 सवालों के जवाब देने होंगे।
यह प्रक्रिया पूरी होने पर प्रत्येक परिवार को एक विशिष्ट सेल्फ-इन्यूमरेशन आईडी (एसई आईडी) प्राप्त होगी, जो एसएमएस के माध्यम से भी भेजी जाएगी। इसके बाद, जब सरकारी प्रगणक घर-घर जाकर सर्वेक्षण करेंगे, तो नागरिकों को केवल यह आईडी उन्हें दिखानी होगी। प्रगणक उस आईडी के माध्यम से पहले से दर्ज जानकारी का मिलान और पुष्टि करेंगे, जिससे समय की बचत होगी और आंकड़ों की सटीकता भी बढ़ेगी। यदि कोई नागरिक स्व-गणना नहीं करता है, तो प्रगणक पहले की तरह ही पारंपरिक तरीके से घर आकर सभी जानकारी एकत्रित करेंगे। यह सुविधा विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों के लिए उपयोगी मानी जा रही है, जहाँ लोगों की व्यस्तता के कारण प्रगणकों को सही जानकारी जुटाने में कठिनाई होती है।
भारत में जनगणना हर दस साल में गृह मंत्रालय के अधीन भारत के महारजिस्ट्रार और जनगणना आयुक्त के कार्यालय द्वारा आयोजित की जाती है। यह दुनिया के सबसे बड़े प्रशासनिक अभ्यासों में से एक है। जनगणना से प्राप्त आंकड़े केवल जनसंख्या की गिनती तक सीमित नहीं होते, बल्कि ये देश के नीति निर्माण, योजनाओं के आवंटन, परिसीमन और विकास कार्यों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 2027 की जनगणना के आंकड़े लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के भविष्य के परिसीमन का आधार बनेंगे और महिलाओं के लिए आरक्षण जैसे प्रावधानों को लागू करने में भी सहायक होंगे।
स्व-गणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन का कार्य मई 2026 तक चलेगा। इसके बाद जनगणना का दूसरा और अंतिम चरण, जनसंख्या गणना, फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति की विस्तृत जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक जानकारी एकत्र की जाएगी। इस बार की जनगणना में जातिगत आंकड़ों को भी शामिल किया जाएगा, जो स्वतंत्र भारत में पहली बार होगा। पूरी तरह से डिजिटल होने के कारण यह जनगणना न केवल आंकड़ों को तेजी से संसाधित करेगी, बल्कि भविष्य की योजनाओं के लिए एक मजबूत और पारदर्शी आधार भी प्रदान करेगी।
Source: jagran