मुजफ्फरपुर में अब अपनी जमीन बचाने में जुटा डाक विभाग, शुरू हुई दाखिल-खारिज की प्रक्रिया
17 अप्रैल 2026
मुजफ्फरपुर में सरकारी जमीन की अवैध बिक्री के मामलों के बाद डाक विभाग अपनी भूमि सुरक्षित करने में जुट गया है। विभाग ने अपनी जमीन की खोजबीन कर दाखिल-खारिज की प्रक्रिया शुरू की है, ताकि अवैध बिक्री और अतिक्रमण रोका जा सके।
मुजफ्फरपुर में सरकारी भूमि की अवैध खरीद-बिक्री और अतिक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए अब डाक विभाग भी अपनी संपत्तियों को सुरक्षित करने के लिए जागृत हो गया है। दशकों से बिना किसी पुख्ता कागजी कार्रवाई के पड़ी अपनी जमीनों को बचाने के लिए विभाग ने अब दाखिल-खारिज की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कदम विभाग की करोड़ों की संपत्ति पर संभावित खतरों को रोकने और भविष्य में इसके उचित उपयोग का मार्ग प्रशस्त करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह मामला तब प्रकाश में आया जब यह पता चला कि शहर के केंद्र में स्थित कंपनीबाग प्रधान डाकघर की बेशकीमती जमीन का भी पिछले छह दशकों से दाखिल-खारिज नहीं हुआ था। लंबे समय से सरकारी रिकॉर्ड में स्वामित्व का अद्यतन न होने के कारण ऐसी संपत्तियां भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों के लिए एक आसान लक्ष्य बन जाती हैं। इसी तरह की स्थिति जिले भर में स्थित कई अन्य डाकघरों और विभाग की खाली पड़ी जमीनों की भी है, जिन्हें कई साल पहले अधिग्रहित तो किया गया था, लेकिन उनके स्वामित्व को राजस्व रिकॉर्ड में विधिवत दर्ज नहीं कराया गया।
दाखिल-खारिज एक कानूनी प्रक्रिया है जिसके तहत किसी संपत्ति के स्वामित्व में हुए परिवर्तन को सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता है। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक कानूनी रूप से संपत्ति का शीर्षक स्पष्ट नहीं माना जाता। डाक विभाग अब अपने सभी पुराने भूमि संबंधी दस्तावेजों, खरीद के कागजात और अधिग्रहण संबंधी फाइलों को इकट्ठा कर रहा है ताकि संबंधित अंचल कार्यालयों में दाखिल-खारिज के लिए आवेदन किया जा सके। यह प्रक्रिया न केवल भूमि पर विभाग के स्वामित्व को प्रमाणित करेगी, बल्कि इसे बिहार सरकार के भूमि रिकॉर्ड के डिजिटल डेटाबेस से भी जोड़ देगी।
बिहार में सरकारी और निजी भूमि पर अतिक्रमण एक गंभीर समस्या रही है। पूर्व में भी सीतामढ़ी और वैशाली जैसे जिलों में डाक विभाग की जमीनों पर अवैध कब्जे और निर्माण के मामले सामने आ चुके हैं। इन घटनाओं से सबक लेते हुए, मुजफ्फरपुर डाक विभाग का यह कदम एक निवारक उपाय है। एक बार दाखिल-खारिज पूरा हो जाने के बाद, विभाग को अपनी भूमि पर किसी भी प्रकार के निर्माण, चारदीवारी या अन्य विकास कार्यों के लिए कानूनी आधार मिल जाएगा, जिससे अतिक्रमण की संभावनाएं काफी कम हो जाएंगी।
इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद विभाग अपनी संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन कर सकेगा। सुरक्षित और विवाद-मुक्त भूमि का उपयोग भविष्य में नए डाकघर भवनों का निर्माण करने, कर्मचारियों के लिए आवास बनाने या सरकार की नीति के अनुसार अधिशेष भूमि का मुद्रीकरण करने के लिए किया जा सकता है। यह कदम न केवल सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सरकारी विभाग अपनी परिसंपत्तियों के प्रबंधन को लेकर अब अधिक सतर्क और सक्रिय हो रहे हैं। विभाग ने फिलहाल कंपनीबाग स्थित भूमि के लिए प्रस्ताव भेजा है और जल्द ही अन्य संपत्तियों के लिए भी यह प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
Source: jagran