बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव! लोकसभा 60 और विधानसभा 365 सीटें होने की संभावना, बदल जाएगा पूरा सत्ता समीकरण
17 अप्रैल 2026
Bihar Nari Shakti Vandan Adhiniyam: नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लागू होने से बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव आने वाला है। लोकसभा सीटें 40 से बढ़कर 60 और विधानसभा सीटें 243 से 365 तक पहुंच सकती हैं। इनमें महिलाओं के लिए क्रमशः 20 और 120 सीटें आरक्षित होंगी।
बिहार की राजनीतिक संरचना में एक ऐतिहासिक बदलाव की नींव रखी जा रही है, जिससे राज्य के सत्ता समीकरण पूरी तरह से बदल सकते हैं। केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए नए परिसीमन प्रस्तावों के अमल में आने पर बिहार में लोकसभा सीटों की संख्या 40 से बढ़कर 60 और विधानसभा सीटों की संख्या 243 से बढ़कर 365 हो जाने की प्रबल संभावना है। यह परिवर्तन न केवल सांसदों और विधायकों की संख्या में वृद्धि करेगा, बल्कि राज्य की राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका और आंतरिक राजनीतिक गतिशीलता को भी एक नई दिशा देगा।
यह प्रस्तावित बदलाव उस प्रक्रिया का हिस्सा है जिसे केंद्र सरकार ने तीन विधेयकों के माध्यम से शुरू किया है: संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026, और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026। इन विधेयकों का मुख्य उद्देश्य लोकसभा की कुल सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करना और नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के तहत महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण को लागू करने का मार्ग प्रशस्त करना है। दशकों से, 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या स्थिर रही है, जिसे 1976 में एक संवैधानिक संशोधन के माध्यम से फ्रीज कर दिया गया था। अब सरकार इस रोक को हटाकर 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर नए सिरे से परिसीमन कराना चाहती है ताकि महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले लागू किया जा सके।
इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए एक परिसीमन आयोग का गठन किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे। इस आयोग का काम जनसंख्या के अनुपात में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से निर्धारित करना होगा। यह आयोग ही तय करेगा कि कौन सी नई सीटें बनेंगी और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा महिलाओं के लिए कौन-कौन सी सीटें आरक्षित की जाएंगी। आयोग के फैसले अंतिम माने जाते हैं और उन्हें किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती, जो इस प्रक्रिया की महत्ता को दर्शाता है।
बिहार जैसे घनी आबादी वाले राज्य के लिए इस बदलाव के गहरे राजनीतिक निहितार्थ हैं। लोकसभा में 20 अतिरिक्त सीटें मिलने से राष्ट्रीय स्तर पर बिहार का प्रभाव काफी बढ़ जाएगा और राज्य के मुद्दों को संसद में अधिक मजबूती से उठाने के लिए ज्यादा प्रतिनिधि मौजूद होंगे। इसी तरह, विधानसभा में लगभग 122 नई सीटें सृजित होने से नए राजनीतिक समीकरण बनेंगे। इससे नए नेताओं को उभरने का मौका मिलेगा और स्थापित राजनीतिक दलों के मौजूदा वोट बैंक और प्रभाव क्षेत्र में भी बदलाव आएगा, जिसका लाभ क्षेत्रीय दलों को भी मिल सकता है।
यह परिसीमन राज्य की राजनीति में सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को भी प्रभावित करेगा। नई सीटों के गठन से जातीय समीकरण बदल सकते हैं और कई दशकों से चले आ रहे राजनीतिक वर्चस्व को चुनौती मिल सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि महिला आरक्षण लागू होने के बाद बिहार से लोकसभा में लगभग 20 और विधानसभा में 120 से अधिक महिला प्रतिनिधि चुनकर आएंगी। यह न केवल लैंगिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम होगा, बल्कि इससे स्थानीय स्तर पर सड़क, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर भी अधिक ध्यान केंद्रित होने की उम्मीद है। यदि संसद इन विधेयकों को पारित कर देती है, तो बिहार की राजनीति एक नए युग में प्रवेश करने के लिए तैयार है।
Source: jagran