यूपी में 80 हजार घरों तक पहुंचेगा शुद्ध पानी, योगी सरकार ने 633 करोड़ की 11 परियोजनाओं को दी मंजूरी
17 अप्रैल 2026
मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में हुई बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार ने पेयजल और जल संरक्षण से संबंधित 11 परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति और जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में हुई एक उच्च-स्तरीय समिति की बैठक में कुल 633.40 करोड़ रुपये की 11 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इस निर्णय से प्रदेश के विभिन्न शहरों में लगभग 80 हजार घरों तक शुद्ध पेयजल के कनेक्शन पहुंचाए जा सकेंगे, जिससे लाखों लोगों के जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद है।
इन स्वीकृत परियोजनाओं को दो मुख्य भागों में बांटा गया है। इसमें चार परियोजनाएं सीधे तौर पर पेयजल आपूर्ति से संबंधित हैं, जिन पर 610.22 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। शेष सात परियोजनाएं तालाबों के विकास, जल संरक्षण और सीवरेज प्रबंधन पर केंद्रित हैं, जिनके लिए 23.18 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। यह पहल केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'अमृत 2.0' योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य शहरों को जल सुरक्षित बनाना और प्रत्येक घर तक पानी की पहुँच सुनिश्चित करना है।
पेयजल योजनाओं के अंतर्गत लखनऊ, वाराणसी और चित्रकूट जैसे प्रमुख शहरों के कई इलाकों को शामिल किया गया है। लखनऊ में बख्शी का तालाब, हैदरगंज, आलमनगर और केशरीखेड़ा वार्डों में पेयजल योजनाओं का विस्तार होगा। वहीं, वाराणसी के 18 अत्यधिक प्रभावित वार्डों और चित्रकूट के राजापुर नगर पंचायत में भी नई पेयजल योजनाएं लागू की जाएंगी। इसके अतिरिक्त, जल संरक्षण और तालाबों के पुनरुद्धार के लिए गोरखपुर, रायबरेली, भदोही, गाजियाबाद, बाराबंकी और लखनऊ के जानकीपुरम जैसे क्षेत्रों में स्थित तालाबों का विकास और सौंदर्यीकरण किया जाएगा।
यह निर्णय योगी सरकार द्वारा प्रदेश भर में चलाई जा रही 'जल जीवन मिशन' और 'हर घर जल' जैसी व्यापक योजनाओं की निरंतरता को दर्शाता है। जहां जल जीवन मिशन मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक नल से जल पहुंचाने पर केंद्रित है, वहीं अमृत 2.0 योजना शहरी क्षेत्रों में पानी की बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने का काम कर रही है। इन दोनों योजनाओं का समन्वित क्रियान्वयन यह सुनिश्चित करता है कि प्रदेश के हर नागरिक को, चाहे वह गांव में हो या शहर में, स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके, जो 'ईज ऑफ लिविंग' के लिए एक प्रमुख मानक है।
इन परियोजनाओं के पूरा होने से न केवल लोगों को पानी की किल्लत से राहत मिलेगी, बल्कि दूषित जल से होने वाली बीमारियों में भी कमी आने की संभावना है। सरकार का अगला कदम इन योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करना होगा ताकि इसका लाभ जल्द से जल्द आम जनता तक पहुंच सके। इन पहलों से यह स्पष्ट है कि जल प्रबंधन और प्रत्येक नागरिक तक इसकी पहुंच सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक बना हुआ है।
Source: jagran