ममता सरकार को झटका: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, बंगाल में अधिकारियों के तबादले के खिलाफ याचिका खारिज
16 अप्रैल 2026
बंगाल सरकार और चुनाव आयोग के बीच विश्वास की कमी को उजागर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनावी राज्य में 1,000 से अधिक प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के स्थानांतरण के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ममता बनर्जी सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग द्वारा किए गए एक हजार से अधिक प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के तबादले को चुनौती दी गई थी। इस फैसले को राज्य सरकार के लिए एक बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया के बीच यह मामला प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र से जुड़ा था। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वह चल रही चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करेगा और चुनाव के दौरान अधिकारियों के तबादले एक सामान्य प्रक्रिया है।
यह मामला तब शुरू हुआ जब भारत के चुनाव आयोग ने राज्य में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और कई अन्य वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों सहित लगभग 1,100 अधिकारियों के तबादले का आदेश दिया। पश्चिम बंगाल सरकार ने इस कदम का विरोध करते हुए इसे प्रशासनिक कामकाज में हस्तक्षेप बताया। सरकार ने पहले कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन 31 मार्च को वहां भी उसकी याचिका खारिज कर दी गई थी। इसके बाद राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। पीठ ने कहा कि चुनाव के दौरान अधिकारियों का तबादला कोई नई बात नहीं है और यह देश के कई राज्यों में अपनाई जाने वाली एक स्थापित प्रक्रिया है। अदालत ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच "विश्वास की कमी" पर गहरी चिंता व्यक्त की और इसे देश का दुर्भाग्य बताया। अदालत ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि दोनों पक्षों के बीच अविश्वास इस स्तर तक पहुंच गया था कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के लिए भी न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति करनी पड़ी।
यह न्यायिक फैसला पश्चिम बंगाल में राज्य सरकार और विभिन्न केंद्रीय संस्थानों के बीच चल रहे टकराव की एक और कड़ी है। पिछले कई वर्षों में, ममता बनर्जी सरकार और केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्यपाल के बीच कई मुद्दों पर मतभेद देखे गए हैं। चाहे वह केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई हो, राज्य को दिए जाने वाले फंड का मामला हो, या राज्यपाल द्वारा विधेयकों को मंजूरी देने में देरी का आरोप, दोनों पक्षों के बीच संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। अधिकारियों के तबादले का यह विवाद इसी व्यापक राजनीतिक और प्रशासनिक खींचतान का एक हिस्सा माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि आगामी विधानसभा चुनाव इन्हीं बदले हुए प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख में होंगे। हालांकि, अदालत ने भविष्य में विचार के लिए इस बड़े कानूनी सवाल को खुला रखा है कि क्या चुनाव आयोग को इस तरह के बड़े पैमाने पर तबादले करने से पहले राज्य सरकार से परामर्श करने की आवश्यकता है। फिलहाल, इस निर्णय ने चुनाव प्रक्रिया के संचालन में चुनाव आयोग की शक्तियों को मजबूती से स्थापित किया है और राज्य में चुनावी सरगर्मियों के बीच प्रशासनिक नियंत्रण पर चल रही बहस पर विराम लगा दिया है।
Source: jagran