पाकिस्तानी हैंडलर्स के हाथ में थी 'कमांड', राजस्थान में सैन्य क्षेत्रों में लगे सोलर कैमरों से हो रही थी लाइव जासूसी
16 अप्रैल 2026
राजस्थान में अलवर एवं बीकानेर के सैन्य क्षेत्रों की जासूसी का मामला सामने आया है। इसके लिए सैन्य छावनी क्षेत्रों में सौर उर्जा संचालित सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे।
राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में जासूसी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें पाकिस्तानी हैंडलर्स द्वारा भारतीय सैन्य क्षेत्रों की निगरानी के लिए सौर ऊर्जा से चलने वाले कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा था। यह खुलासा तब हुआ जब सुरक्षा एजेंसियों ने अलवर और बीकानेर के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सैन्य छावनी इलाकों के पास लगे इन हाई-टेक कैमरों को पकड़ा। इन कैमरों के जरिए सेना की गतिविधियों की लाइव फुटेज सीधे पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स को भेजी जा रही थी, जो देश की सुरक्षा में एक बड़ी सेंधमारी है।
जांच से पता चला है कि यह जासूसी नेटवर्क अत्यंत सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। सौर ऊर्जा से संचालित होने के कारण इन कैमरों को दूरस्थ स्थानों पर बिना बिजली के भी लंबे समय तक सक्रिय रखा जा सकता था। दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा ने खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई करते हुए इन कैमरों को हटवाया। इस ऑपरेशन में अलवर से एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है, जिससे पूछताछ जारी है ताकि नेटवर्क की पूरी श्रृंखला का पता लगाया जा सके। सूत्रों के अनुसार, इन कैमरों का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना की आवाजाही, वाहनों की तैनाती और अन्य संवेदनशील गतिविधियों पर चौबीसों घंटे नजर रखना था।
इस जासूसी कांड के तार सिर्फ राजस्थान तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि यह एक बड़े अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा प्रतीत होता है। जांच में सामने आया है कि इस पूरे ऑपरेशन के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) का हाथ हो सकता है। इसी तरह के कैमरे राजस्थान के अलावा पंजाब के कपूरथला, जालंधर, पठानकोट, पटियाला, मोगा, और हरियाणा के अंबाला जैसे कई अन्य संवेदनशील सैन्य ठिकानों के पास भी लगाए गए थे, जिन्हें बरामद कर लिया गया है। इस मामले में दिल्ली और पंजाब से कुल 11 जासूसों और आतंकियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनसे इस व्यापक साजिश का पर्दाफाश हुआ।
यह घटनाक्रम राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चिंताएं पैदा करता है। तकनीक के दुरुपयोग से की जा रही यह जासूसी पारंपरिक तरीकों से बिल्कुल अलग है, जहां स्थानीय एजेंटों को भौतिक रूप से जानकारी एकत्र करने की आवश्यकता नहीं होती। इन कैमरों के जरिए दुश्मन देश भारतीय सेना की तैयारियों और गतिविधियों की रियल-टाइम जानकारी हासिल कर रहा था, जिसका उपयोग भविष्य में किसी भी संघर्ष की स्थिति में सामरिक बढ़त हासिल करने के लिए किया जा सकता था। यह मामला सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी और सतर्कता को और अधिक मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करता है।
फिलहाल, देश की शीर्ष खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां इस मामले की गहनता से जांच कर रही हैं। गिरफ्तार किए गए संदिग्धों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। एजेंसियों का मुख्य ध्यान अब इस नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त करने और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए एक मजबूत तंत्र विकसित करने पर है। इसके तहत सीमावर्ती इलाकों में आम नागरिकों को भी अधिक जागरूक बनाने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने के लिए प्रोत्साहित करने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
Source: jagran