दुबई से कानपुर तक सट्टे का मायाजाल: 202 शहरों में फैला गैंग, क्लोन वेबसाइट बनाकर लोगों के साथ की जाती थी ठगी
16 अप्रैल 2026
दुबई से संचालित एक बड़ा ऑनलाइन सट्टा और प्रतिबंधित गेम गिरोह 202 से अधिक शहरों में फैला हुआ है। कानपुर में इस गिरोह के आठ सदस्य गिरफ्तार किए गए हैं, जो ब्रांच कोड 24 से जुड़े थे।
कानपुर में एक अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन सट्टेबाजी और गेमिंग गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जिसके तार दुबई से जुड़े हैं और इसका नेटवर्क 202 से अधिक शहरों में फैला हुआ है। कानपुर पुलिस ने इस गिरोह के आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जो "ब्रांच 24" नामक एक कोडनेम के तहत काम कर रहे थे। यह कार्रवाई एक बड़े संगठित अपराध का खुलासा करती है जिसमें क्लोन वेबसाइटों और साइबर धोखाधड़ी के माध्यम से करोड़ों रुपये की ठगी की जा रही थी।
यह गिरोह प्रतिबंधित सट्टेबाजी ऐप्स जैसे लोटस 365 और रेडी बुक के क्लोन बनाकर संचालित होता था। ये धोखेबाज टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफार्मों का उपयोग करके लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते थे। शुरू में, उपयोगकर्ताओं को छोटी रकम जीतने की अनुमति देकर उनका विश्वास जीता जाता था। एक बार जब उपयोगकर्ता को इसकी लत लग जाती और वे बड़ी रकम दांव पर लगा देते, तो उन्हें हरवा दिया जाता था, जिससे वे धोखाधड़ी के जाल में फंस जाते थे। इस गिरोह की कार्यप्रणाली का एक और चौंकाने वाला पहलू यह था कि सट्टे में जीती गई छोटी-छोटी रकम का भुगतान करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला पैसा वास्तव में अन्य साइबर धोखाधड़ी से लूटा गया होता था।
जांच से पता चला है कि इस नेटवर्क का वित्तीय जाल बहुत बड़ा और जटिल है। पिछले तीन महीनों के भीतर, गिरोह से जुड़े बैंक खातों में एक अरब रुपये से अधिक का लेनदेन हुआ है। पुलिस को चकमा देने के लिए, गिरोह के सदस्य एक ही स्थान पर टिकने के बजाय ओला और उबर जैसी कैब में घूम-घूमकर ऑनलाइन लेनदेन करते थे। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और बैंक से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए हैं। पुलिस ने लगभग 50 लाख रुपये की संदिग्ध राशि को फ्रीज करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
इस गिरोह का संचालन एक कॉर्पोरेट मॉडल की तरह किया जा रहा था, जिसमें दुबई में बैठे सरगना और भारत में नोएडा और मुंबई जैसे शहरों में स्थानीय संचालक शामिल थे। कानपुर में पकड़े गए लोग इस नेटवर्क की एक स्थानीय शाखा के रूप में काम कर रहे थे, जिन्हें अपने काम के लिए 25 से 50 हजार रुपये तक का मासिक वेतन मिलता था। ये सदस्य व्हाट्सएप ग्रुपों के माध्यम से निर्देश प्राप्त करते थे और ठगी के पैसे को विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित करते थे। पुलिस ने इस मामले में सत्यम तिवारी, अनमोल विश्वकर्मा और नितिन गुप्ता सहित आठ लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि 14 अन्य साथियों की तलाश जारी है।
इस भंडाफोड़ के बाद, पुलिस अब इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की पूरी श्रृंखला को उजागर करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि "ब्रांच 24" जैसे कई अन्य सेल देश भर में सक्रिय हो सकते हैं। जांचकर्ता अब गिरोह के फरार सदस्यों, दुबई में बैठे मास्टरमाइंड और पूरे वित्तीय नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रहे हैं, जिसमें क्रिप्टोकरेंसी में लेनदेन भी शामिल हो सकता है। यह मामला ऑनलाइन सट्टेबाजी और साइबर अपराध के बढ़ते गठजोड़ को उजागर करता है, जो देश की सुरक्षा और वित्तीय प्रणालियों के लिए एक गंभीर चुनौती पेश कर रहा है।
Source: jagran